भारत ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर पर अपना दावा दोबार से मजबूत कर दिया है। लद्दाख के उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता ने कहा, 'पूरा पाकिस्तानी कश्मीर भारत का है, इसका कोई शक नहीं है।'
कविंदर गुप्ता ने चीन को भी स्पष्ट दिखाया कि वह अपनी विस्तारवादी नीतियों पर में नहीं जाएगा। उन्होंने कहा, 'चीन ने पहले अरुणाचल प्रदेश के हिस्से को दावा किया था, लेकिन भारत सहमत नहीं हुआ। इस बार भी चीन का दावा अस्वीकार किया जाएगा।'
उपराज्यपाल ने पाकिस्तान पर भी साधा निशाना लगाया। उन्होंने कहा, 'पाकिस्तान अपने ही लोगों को छल चुका है, संदिग्ध गतिविधियों में शामिल है। वह देश अपनी संप्रभुता पर ध्यान नहीं देता.'
कविंदर गुपता ने भी ऑपरेशन सिंदूर पर सेना प्रमुख के बयान पर कहा, 'स्पष्ट रूप से यह बताया गया है कि पूरा PoK भारत का है।'
उन्होंने कहा, 'पाकिस्तान एक ऐसा देश है जिसे बेचा जा रहा है, उसकी संप्रभुता पर ध्यान नहीं देता। वहां आवाजें उठ रही हैं और पाकिस्तानी सेना को अत्याचार किए जा रहे हैं।'
गुप्ता ने भारत की ताकत पर जोर दिया और कहा, 'भारत एक मजबूत राष्ट्र है, वह अपनी सीमाओं की रक्षा करेगा।'
उपराज्यपाल ने भारत को यह बताया कि 1962 का भारत नहीं है बल्कि 2026 का भारत है। उन्होंने कहा, 'भारत पहले की तुलना में अधिक मजबूत है, वह विस्तारवादी नीतियों पर स्वीकार नहीं करेगा।'
कविंदर गुप्ता ने चीन को भी स्पष्ट दिखाया कि वह अपनी विस्तारवादी नीतियों पर में नहीं जाएगा। उन्होंने कहा, 'चीन ने पहले अरुणाचल प्रदेश के हिस्से को दावा किया था, लेकिन भारत सहमत नहीं हुआ। इस बार भी चीन का दावा अस्वीकार किया जाएगा।'
उपराज्यपाल ने पाकिस्तान पर भी साधा निशाना लगाया। उन्होंने कहा, 'पाकिस्तान अपने ही लोगों को छल चुका है, संदिग्ध गतिविधियों में शामिल है। वह देश अपनी संप्रभुता पर ध्यान नहीं देता.'
कविंदर गुपता ने भी ऑपरेशन सिंदूर पर सेना प्रमुख के बयान पर कहा, 'स्पष्ट रूप से यह बताया गया है कि पूरा PoK भारत का है।'
उन्होंने कहा, 'पाकिस्तान एक ऐसा देश है जिसे बेचा जा रहा है, उसकी संप्रभुता पर ध्यान नहीं देता। वहां आवाजें उठ रही हैं और पाकिस्तानी सेना को अत्याचार किए जा रहे हैं।'
गुप्ता ने भारत की ताकत पर जोर दिया और कहा, 'भारत एक मजबूत राष्ट्र है, वह अपनी सीमाओं की रक्षा करेगा।'
उपराज्यपाल ने भारत को यह बताया कि 1962 का भारत नहीं है बल्कि 2026 का भारत है। उन्होंने कहा, 'भारत पहले की तुलना में अधिक मजबूत है, वह विस्तारवादी नीतियों पर स्वीकार नहीं करेगा।'