ED छापे के बाद ममता की इमरजेंसी-मीटिंग में क्या हुआ: I-PAC स्टाफ के लिए ‘सीक्रेट गाइडलाइंस’ लागू, क्या रेड से BJP को नुकसान होगा

क्या लगता है कि I-PAC पर छापेमारी कितनी गंभीर है? वो लोग जिनसे उनके नाम के साथ फाइलें जुड़ी हुई थी, कौन से और क्यों? मुझे लगने लगा कि वो रेड गाइडलाइंस बहुत तेजी से लागू किए गए। क्या यही नहीं था, तो बाकी सब फाइलें गायब हो जातीं।
 
अरे, ममता सरकार की चुनावी रणनीति पर I-PAC पर छापेमारी ने दिखाया है कि उनकी हरकतें कितनी गहरी हैं 🚨
 
बोलते हुए भी मुस्कुराएं, यह तो सचमुच चुनावी राजनीति का माहौल है। I-PAC की जिंदगी में अब इतने सारे नियमों का पालन करना पड़ रहा है, तो देखिए CM ममता बनर्जी के घर तक छापेमारी। चुनावी रणनीति बनाते समय हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि सबकुछ नज़रअंदाज़ है 🤑, लेकिन जब ED की टीम आपके पास खड़ी होती है, तो सारे फाइल्स और डेटा पर ध्यान देने की जरूरत है। यह तो मुझे लगता है कि चुनावी लड़ाई में सभी पक्षों को अपने काम पर चलने की स्वतंत्रता देनी चाहिए, लेकिन फिर भी जिम्मेदारियां निभानी होंगी।
 
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