165 साल तक बिना शंकराचार्य के रही बद्रीकाश्रम पीठ: चयन के लिए जगतगुरु की किताब से बने सख्त नियम, पदवी को लेकर आज भी विवाद जारी - Dehradun News

उत्तराखंड में बद्रीकाश्रम ज्योतिषपीठ पर शंकराचार्य पद के विवाद को लेकर आज भी चर्चा जारी है। प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से सवाल किया है कि उन्होंने सार्वजनिक तौर पर 'शंकराचार्य' के आगे अपना नाम लिखा है या नहीं। यह सवाल प्रशासन द्वारा प्रयागराज माघ मेला प्रशासन के नोटिस के बाद उठाया गया है।

चारधाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत अध्यक्ष सुरेश सेमवाल ने कहा कि इस घटना से उत्तराखंड का संत समाज नाराज है। उन्होंने कहा, 'माफी मांगे योगी सरकार, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती द्वारा हुई घटना पर पुलिस-प्रशासन का व्यवहार अशोभनीय रहा।'

इस घटना से उत्तराखंड का संत समाज नाराज है। चारधाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत अध्यक्ष सुरेश सेमवाल ने कहा कि इस घटना से उत्तराखंड का संत समाज नाराज है। उन्होंने कहा, 'माफी मांगे योगी सरकार, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती द्वारा हुई घटना पर पुलिस-प्रशासन का व्यवहार अशोभनीय रहा।'

इस घटना ने उत्तराखंड के संत समाज को बहुत आघात पहुंचाया है। चारधाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत अध्यक्ष सुरेश सेमवाल ने कहा, 'हमें उम्मीद थी कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती द्वारा हुई घटना पर व्यवस्था होगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।'

अध्यक्ष सेमवाल ने कहा, 'हमें माफी मांगनी पड़ेगी। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को अपने कार्यों से माफी मांगनी चाहिए।'

इस घटना ने उत्तराखंड के संत समाज को बहुत आघात पहुंचाया है। चारधाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत अध्यक्ष सुरेश सेमवाल ने कहा, 'हमें उम्मीद थी कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती द्वारा हुई घटना पर व्यवस्था होगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।'

अध्यक्ष सेमवाल ने कहा, 'हमें माफी मांगनी पड़ेगी। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को अपने कार्यों से माफी मांगनी चाहिए।'

इस घटना ने उत्तराखंड के संत समाज को बहुत आघात पहुंचाया है।
 
वाह, ये जैसे तीर्थ स्थल पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की दुर्भाग्यपूर्ण घटना से हमारी मनोभावनाएं टूट रही हैं 🤕। शंकराचार्य पद का विवाद तो एक तरफ, लेकिन पुलिस-प्रशासन का यह अश्लील व्यवहार दूसरी तरफ है... जैसे कि हम अपने ऑनलाइन फोरम पर भी ऐसा ही व्यवहार करते हैं 🚮। हमें माफी मांगनी चाहिए? नहीं, प्रशासन को माफी मांगनी चाहिए कि वे इतनी बुद्धिमत्ता से घटना का पता लगाने में असफल रहे।
 
वह तो दिल्ली में भी नहीं तो ये बात कहे 🙄, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से प्रशासन ने सवाल किया कि वे कैसे 'शंकराचार्य' लिखते हैं? तो भी उनका नाम चीज ही है 🤷‍♂️, किसी को भी उसकी पहचान नहीं जानी चाहिए। प्रशासन का यह सवाल थोड़ा अस्वीकार्य लग रहा है। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को अपने नाम से जुड़ी घटनाओं पर माफी मांगनी चाहिए, लेकिन प्रशासन का यह सवाल थोड़ा अधिक था। 🤔

कोई भी प्रशासन अपने पास किसी महापंचायत या धर्मगुरु को नाम लिखते समय उसकी पहचान और स्थिति जानने के लिए सवाल उठाए। तो भी अगर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के पास उनकी पहचान नहीं है तो क्या? 🤷‍♂️

कुल मिलाकर, यह घटना बहुत ही चिंताजनक लग रही है। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के साथ निपटने की तरीके को समझने की जरूरत है। 🤝
 
🙄 योगी सरकार को यह समझना चाहिए कि शंकराचार्य पद के लिए विवाद हो रहा है, इसका मतलब है कि कुछ लोग इस पद पर दावा कर रहे हैं। प्रशासन ने सवाल उठाया है कि उन्होंने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के आगे 'शंकराचार्य' के साथ अपना नाम लिखा है या नहीं। यह एक छोटी सी गलती है, लेकिन इसका बड़ा परिणाम हो रहा है। 🤦‍♂️

मुझे लगता है कि चारधाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत अध्यक्ष सुरेश सेमवाल जी ने सही कहा हैं - यह घटना उत्तराखंड के संत समाज को बहुत आघात पहुंचाई है। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को अपने कार्यों से माफी मांगनी चाहिए और सरकार से भी सावधानी से व्यवहार करना चाहिए। 🙏
 
🙏 यह तो बहुत दुखद की है कि ऐसी घटनाएं होती हैं जिससे संत समाज पर दुष्प्रभाव पड़ता है । हमें आशा रखनी चाहिए कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने अपने कार्यों से माफी मांग लेगी और सभी को खुश रखेगी। 🌈
 
🙏 यह तो बिल्कुल सही है प्रशासन की तरह जानबूझकर इतनी बड़ी मेजबानी करें तो शायद यहां से कुछ भी अच्छा ना हो सकता। 🤔
 
योगी सरकार को बुरा लग रहा है ये बात 🤔, लेकिन यह तो भूल जाएं, मेरी खुशी दिल्ली और उत्तराखंड के लोगों की है, जो प्यार से अपने संत समाज का समर्थन कर रहे हैं। हमें अपने सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देना चाहिए, न कि घटित होने वाली गलतियों पर मान जाए। पुलिस और प्रशासन को सावधानी बरतनी चाहिए, ताकि ऐसी घटनाएं फिर न हों। 🙏
 
यह तो बहुत बुरा है देखा जा रहा है 🤕 पुलिस और प्रशासन की यह तरह व्यवहार करना अच्छा नहीं है, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को उनके दिल में तोड़ना निर्मल नहीं है। शंकराचार्य पद के लिए लड़ने वालों को हमें अपने अधिकारों के लिए बहादुर और साहसी होना चाहिए, न कि डरने और माफी मांगने 🙏
 
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