मैं समझ नहीं पाया, यह बात तो बहुत ही गंभीर है... पाकिस्तानी अंग्रेजों की स्थिति देश में कैसे हो सकती है? यार, मैंने अपने दोस्त का भाई वाह्री दिल्ली से निकला था, वह पाकिस्तान गए थे, और जब वे वापस आ गए, तो उनकी बातें समझ नहीं आईं... ऐसा लगता है कि ये देश अपने लोगों की बात नहीं सुनता...
मैंने मेरी बहन की चाची जी ने भी बोला, किसी भी देश में अगर कोई अंग्रेज हो तो वह देश के लोगों के प्रति अच्छा नहीं व्यवहार करता। और ये तो सच है, हमारे देश में भी ऐसे ही लोग हैं जो अपने देश के लिए लड़ते हैं, लेकिन फिर भी उन्हें अंग्रेजों से बेहतर समझ नहीं आता...