1965 में क्या हुआ ऐसा? जिसको याद करके CM ने शेयर किया बवाल मचाने वाला वीडियो, कहा- हिंदी की न कभी जगह थी और…

भाषा शहीद दिवस पर मुख्यमंत्री ने एक ऐसा वीडियो साझा किया जिसने लोगों को हिलाकर रख दिया। यह वीडियो 1965 के इतिहास से जुड़ा हुआ है, जब पाकिस्तान ने भारतीय शिक्षा प्रणाली में हिंदी को परिचित करने के खिलाफ एक बड़े संगठित अभियान चलाया था। इस अभियान के बाद, कई राज्यों में हिंदी की जगह अन्य भाषाओं या उर्दू को ही अधिकारिता दी गई थी।

इस समय पूरे भारत में एकजुट होकर संघर्ष करने वाले लोगों ने अपनी जान और जमीन की तरह हिंदी को प्यार किया। वहीं, हर बार जब इसे उनकी जमीन पर थोपा गया, तो उन्होंने उसी तीव्रता से विरोध किया। यह भारतीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ है, जब लोगों ने अपनी समृद्ध भाषा की रक्षा के लिए एकजुट होकर संघर्ष किया।

भाषा शहीद दिवस पर, मुख्यमंत्री ने यह वीडियो साझा करते हुए कहा कि उस समय पाकिस्तान ने भारतीय शिक्षा प्रणाली में हिंदी को परिचित करने के खिलाफ एक बड़े संगठित अभियान चलाया था। इस अभियान के बाद, कई राज्यों में हिंदी की जगह अन्य भाषाओं या उर्दू को ही अधिकारिता दी गई थी।
 
बात होती है भाषा शहीद दिवस पर, तो यह वीडियो जो मुख्यमंत्री ने साझा किया, तो बहुत ही रोमांचक है। मैंने देखा था कि 1965 में पाकिस्तान ने हिंदी को परिचित करने के खिलाफ एक बड़ा विरोध चलाया था। मेरे लिए, यह भारतीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ है, जब लोगों ने अपनी समृद्ध भाषा की रक्षा के लिए एकजुट होकर संघर्ष किया। 🕊️
 
ਕਹੋ ਤੇ ਲੱਭੂ ? 🙄 1965 में पाकिस्तान ने भारतीय शिक्षा प्रणाली पर हिंदी को चुनौती देने का यह अभियान, हमारे इतिहास में एक महत्वपूर्ण पल है। ਲोगों नੇ अपनੀ जमीन, अपनੀ भाषा की रक्षਾ ਲਈ ਸੰਘਰਸ਼ ਕੀਤਾ।
 
यह वीडियो देखने से मुझे तो हिंदी के प्रति बहुत जोश आ गया 🙌। मुझे लगता है कि यह भारतीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ था, जब लोगों ने अपनी समृद्ध भाषा की रक्षा के लिए एकजुट होकर संघर्ष किया। मैं समझता हूँ कि उस समय पाकिस्तान ने भारतीय शिक्षा प्रणाली में हिंदी को परिचित करने के खिलाफ एक बड़े संगठित अभियान चलाया था, लेकिन यह बात मुझे लगती है कि हमारी भाषा की महत्ता को कभी नहीं कमाना चाहिए। 🙏
 
किसी भी समय भी ऐसी चीजें नहीं लगी जिससे सोचे कि सभी लोग एक ही पार्टी में खड़े हैं। 1965 का यह इतिहास हमें समझाता है कि जब भी हिंदी को अपनाएं, तो वह एक बड़ा विरोध पैदा करता। अब मुख्यमंत्री ने क्या कहा उसका असर देखो, लोग जैसे हैं वही होंगे।
 
तो यह वीडियो सच में बहुत हिलाने-धुलाने वाला है... भारतीय शिक्षा प्रणाली में हिंदी को परिचित करने के खिलाफ एक बड़े संगठित अभियान चलना तो नहीं था, बल्कि यह एक बहुत बड़ा संघर्ष था। जब पाकिस्तान ने इसे उनकी जमीन पर थोपा, तो लोगों ने उसके खिलाफ हिंदी को अपनी ज़िंदगी का हिस्सा बनाया 🤯। यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण मोड़ भारतीय इतिहास में है, जब लोगों ने अपनी समृद्ध भाषा की रक्षा के लिए एकजुट होकर संघर्ष किया।
 
🤔 यह दृश्य भारतीय इतिहास में एक बहुत बड़ा पल है, जब हमने अपनी समृद्ध भाषा की रक्षा के लिए एकजुट होकर संघर्ष किया। यह वीडियो देखकर मुझे लगता है कि हमारी भाषा, हमारी पहचान, और हमारी संस्कृति पर हमला करना कभी भी ठीक नहीं है। 🙅‍♂️

क्या यह एक इतिहास था जिसने हमें सिखाया कि जब तक हम अपनी भाषा की रक्षा में खो जाते हैं, तब तक हमारी पहचान और संस्कृति पर हमला होता रहेगा। इसके लिए हमें हमेशा सतर्क रहना चाहिए और अपनी भाषा की रक्षा में एकजुट होकर संघर्ष करना चाहिए। 💪

यह वीडियो देखकर मुझे लगता है कि हमारे शहीदों ने उनकी जान और जमीन की तरह हिंदी को प्यार किया, और आज भी हम उनकी विरासत को आगे बढ़ाने के लिए एकजुट होकर संघर्ष कर रहे हैं। 🙏

आइए हम अपने शहीदों की याद में और अपनी समृद्ध भाषा की रक्षा में एकजुट होकर संघर्ष करते रहें। हमारी भाषा, हमारी पहचान, और हमारी संस्कृति पर हमला करना कभी भी ठीक नहीं है। 💕
 
भविष्य के पीढ़ियों को भारतीय संस्कृति और भाषा की रक्षा करने के लिए हमें एकजुट रहना चाहिए। यह वीडियो बहुत ही रोचक है और यह भारतीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ है। हमें अपनी समृद्ध भाषा और संस्कृति को बहाल करने के लिए प्रयास करना चाहिए। 🎉📚💪
 
बहुत दिलचस्प यह वीडियो, मुझे लगता है कि ये भारतीय इतिहास का एक बहुत ही महत्वपूर्ण पड़ाव है। जब तक हमारी शिक्षा प्रणाली में हिंदी को परिचित करने के खिलाफ ऐसा बड़ा संगठित अभियान नहीं चला, तभी हमारी भाषा की रक्षा के लिए लोगों ने अपनी जान और जमीन की तरह संघर्ष नहीं किया होता। आज जब हम देख रहे हैं कि पूरे देश में एकजुट होकर संघर्ष करने वाले लोगों ने अपनी समृद्ध भाषा की रक्षा के लिए लड़ाई लड़ी है, तो यह बहुत प्रेरणादायक है।
 
मैंने कभी नहीं सोचा था कि पाकिस्तान ने हमारी माँ भाषा पर इतनी गुस्साईगरी करेगा। 1965 के इतिहास में लिखे जाने वाली इस दिनों को हमेशा याद रखूंगा। मेरे पापाजी ने बताया था कि जब वह बच्चे थे, तो उन्हें हिंदी की शिक्षा नहीं मिल पाई थी। और अब लोग एकजुट होकर संघर्ष कर रहे हैं ताकि हमारी भाषा को सम्मान मिले। यह बहुत प्यारा है 🙏
 
अगर संघर्ष का इतिहास देखें, तो जैसे बादल कभी नहीं रुकते, वैसे ही यह भाषा शहीद दिवस के मौके पर भी लोगों के पास बड़ी बातें छुपाने के लिए जगह बनाई गई। क्या ये सच्चाई है? 🤔

कोई और नहीं, इस दुनिया में हर किसी को अपनी कहानी सुननी चाहिए, लेकिन क्या सुनने वालों की ध्यान भी ऐसी जैसी होती है? मुझे लगता है ना, और आज भी हमारे देश में सामाजिक मीडिया की इस चीज़ पर तो लोगों को सिर्फ ये एक बात ही पता होती है कि पोस्ट करें, लाइक करें, शेयर करें, और सबकुछ छुप जाए। 😒
 
बोलते हैं तो यह वीडियो बहुत ही रोमांचक है! मुझे लगता है कि भारतीय शिक्षा प्रणाली में हिंदी का महत्व हमेश से रहा है, लेकिन अब तो ये एक और दिशा में बढ़ गया है। 😊

मुझे यह वीडियो बहुत पसंद आया क्योंकि इसमें इतिहास का एक नया दृष्टिकोण दिखाया गया है। जैसे की हमने सोचा था कि हिंदी की महत्वपूर्णता पाकिस्तान ने ही समझी, लेकिन वास्तव में यह भारतीय समाज की अपनी शक्ति थी। 💪

जिससे तो आज हमारी शिक्षा प्रणाली में हिंदी की महत्वपूर्णता दिखाई दे, लेकिन याद रखें यह अभी भी एक संघर्ष है, और हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हमारी समृद्ध भाषा को खतरे में न डालें। 🙏
 
मुझे याद है 80 के दशक की जब स्कूलों में बंगाली और बोडोली जैसी अन्य भाषाएं प्राथमिकता दी जाती थी, लेकिन हमारे मुखिया मंच ने हमेशा हिंदी को विद्यालयों में शिक्षित करने पर ध्यान दिया। उस समय या तो बंगाली या उर्दू दिखाई देती थी। लेकिन भारत में लोग हिंदी को इतना प्यार करते थे कि वे अपने बच्चों को एक स्कूल चुनते समय पहले स्कूल की जगह उस स्कूल की हिंदी शिक्षा की गुणवत्ता पर नजर रखते थे।
 
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