'2020 में जुल्म और 2026 में ओके', ट्रंप के गाजा पीस बोर्ड पर पलटे शहबाज, PAK में उड़ रही खिल्ली

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के गाजा से जुड़े नए प्लान का समर्थन किया है. 22 जनवरी 2026 को वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) में वर्ल्ड बोर्ड ऑफ पीस का चार्टर लॉन्च किया. इस बोर्ड का उद्देश्य गाजा में युद्ध रोकने, सीजफायर लागू करने, मानवीय सहायता बढ़ाने और गाजा के पुनर्निर्माण की व्यवस्था करना है.

शहबाज शरीफ ने इस चार्टर पर हस्ताक्षर किए. उन्होंने बोर्ड में शामिल होने की घोषणा की. अब भारत इनमें शामिल नहीं हो पाया. वास्तविकता यह रही है कि 5 साल पहले शरीफ ने ट्रंप का 'पीस टू प्रॉस्पेरिटी' प्लान का कड़ा विरोध किया था.

अब उनके बयान में एक उलटफेर देखा गया है. ट्रंप ने कहा है कि गाजा का युद्ध 'अब वाकई खत्म हो रहा है' और हमास को हथियार डालने होंगे. इस बदलाव पर भारतीय राजनेताओं से चर्चा नहीं हुई.

इस फैसले से पूरे देश में विरोध हुआ है. मुख्य विपक्षी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने कहा, 'पाकिस्तान सरकार के बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने का फैसला नकारती है. इस फैसले को पारदर्शी बनाया जाए और सभी पक्षों से सलाह ली, इसके अलावा यह UN सिस्टम को मजबूत करें, न कि नया समानांतर ढांचा बनाए.
 
तो ये तो देखा, अब पाकिस्तान के नेता अपने पिछले विरोध को भूल गये हैं 🤦‍♂️. और अमेरिकी राष्ट्रपति के नए प्लान पर उनका समर्थन करने के बाद, देश में विरोध हुआ है . लेकिन मुझे लगता है कि अब तो हमारे पास इस फैसले से निपटने की कोई रणनीति नहीं है।

मैं तो उम्मीद करता हूं कि देश के नेताओं और लोगों को यह समझ में आएगा कि हमारी सरकारें और नेताएं हमेशा अलग-अलग दृष्टिकोण रखती हैं, लेकिन हमें अपने देश की सुरक्षा और कल्याण पर ध्यान रखना चाहिए।

और फिर भी, इस बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने से पहले, पाकिस्तान ने हमें याद दिलाया कि उनके सरकारों को अपनी दुनिया बनानी है और हमें उनके साथ समझौता करना चाहिए। लेकिन मुझे लगता है कि अब यह समय है कि हम अपनी स्वतंत्रता पर ध्यान रखें और हमारी सरकारों को इस फैसले से निपटने के लिए मजबूत और स्पष्ट रणनीति बनाएं।
 
आजकल गाजा में हालात कितने भयानक हैं .. यहां की स्थिति इतनी खराब है कि एक सामान्य आदमी तो वहां जाने से नहीं डरेगा, लेकिन हमारे देश के नेताओं को यहां की स्थिति बिल्कुल समझ में नहीं आती ..

मुझे लगता है कि इस चार्टर पर हस्ताक्षर करने वाले प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के बयान में एक उलटफेर देखा गया है, लेकिन यह सिर्फ़ तो बदलाव ही नहीं , बल्कि हमास और फिलिस्तीन की सुरक्षा पर अमेरिका की मंशा भी उजागर होती है ..

इस बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने से पहले हमें यह सोचना चाहिए कि इस प्लान के पीछे क्या मंशा है, क्या यह पूरे फिलिस्तीनी लोगों के हित में है या अमेरिका के राजनीतिक हित में ?
 
ये तो एक बड़ा मोड़ है... पाकिस्तान की सरकार ने गाजा पर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के नए प्लान का समर्थन किया है. लेकिन यह समझना जरूरी है कि पहले से शरीफ जी ने इस प्लान को कड़ा विरोध किया था. अब यह उलटफेर देखा गया है, लेकिन क्या यह बदलाव सचमुच बदलेगा या फिर कुछ और है?

मुझे लगता है कि भारतीय राजनेताओं से चर्चा नहीं हुई है. यह एक बड़ा सवाल है... अगर हमारी सरकार ने भी इस प्लान पर विचार नहीं किया, तो फिर इसके पीछे क्या कारण है?
 
अरे, याद रखें कि शांति के लिए हमेशा प्रयास करना चाहिए 🙏। पाकिस्तान सरकार का इस फैसले से कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा, बस ज्यादा बातचीत हो रही है। अमेरिका और पाकिस्तान की दोस्ती में एक नया मोड़ आ गया है, लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि गाजा की समस्या बहुत जटिल है और इसका समाधान आसान नहीं होगा। 🤔
 
तो ये तो पाकिस्तान सरकार की दुनिया है... शरीफ जी ने ट्रंप के प्लान पर हस्ताक्षर किए, लेकिन 5 साल पहले वे उसी प्लान का विरोध कर चुके थे. अब तो यह तो एक उलटफेर है... मुझे लगता है कि भारतीय राजनेताओं ने इस फैसले पर बोल नहीं दिया, लेकिन मैंने उनसे कहा है कि हमें गाजा स्थिति को ध्यान से देखना चाहिए.

मुझे लगता है कि वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) का यह चार्टर एक अच्छी बात है, लेकिन पाकिस्तान सरकार की इस तरह से शामिल होने से देखकर सबकुछ नहीं लगता... मुझे लगता है कि हमें भारतीय राजनेताओं से जुड़कर इस फैसले पर बातचीत करनी चाहिए, ताकि हमारी विचारधारा पाकिस्तान सरकार को समझी जा सके।
 
क्या भारतीय राजनेताओं को पता है कि विश्व में कुछ ऐसी चीजें होती हैं जिन्हें हम पीछे छोड़कर चले जाते हैं. पाकिस्तान ने गाजा से संबंधित नए प्लान का समर्थन किया है और अब भारत शामिल नहीं हो पाया. यह एक बड़ा मुद्दा है और हमें इसके बारे में बहुत सोचते हुए विचार करना चाहिए.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के गाजा से जुड़े नए प्लान को लेकर पूरे देश में विरोध हुआ है. यह एक बड़ा मुद्दा है और हमें इसके बारे में बहुत सोचते हुए विचार करना चाहिए.

क्या हमें अपनी राजनीति को इस तरह छोड़ना चाहिए ताकि दूसरों को अपनी जगह हो? पाकिस्तान ने गाजा से संबंधित नए प्लान का समर्थन किया है और अब भारत शामिल नहीं हो पाया.
 
मुझे लगता है की पाकिस्तान सरकार और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस नए प्लान पर विश्वास करना मुश्किल है... 🤔 क्या युद्ध खत्म हो रहा है? क्या हमास ने अपने हथियार स्वेच्छा से रख दिए? और भारतीय राजनेताओं से चर्चा नहीं हुई तो यह अच्छी बात नहीं है... 😒 मुझे लगता है की शहबाज शरीफ ने बदले में अपने पूर्व विरोध को भूल दिया है और इस फैसले से हम सब ज्यादा प्रभावित होंगे. 🤷‍♂️
 
शायद लोग इस बात पर चिंतित हैं कि पाकिस्तान सरकार गाजा में युद्ध रोकने की कोशिश कर रही है लेकिन वास्तविकता यह है कि गाजा की समस्या बहुत जटिल है. हमें सोच-समझकर इस पर आगे बढ़ना चाहिए. पाकिस्तान सरकार ने अपने प्लान में बदलाव किया है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उन्हें गलत रहा था. हमें उनकी दिशा में मिलकर जाना चाहिए और इस समस्या को हल करने के तरीके खोजने की कोशिश करनी चाहिए.
 
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