अजित पवार की हिमालय में घेरे हुए विमान हादसे ने देशभर में गहरा आंदोलन फैलाया है। पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार, उनके परिवार और साथियों के कई सदस्य इस हादसे में शहीद हो गए थे।
इस दुर्घटना ने लोगों को गहराई से सोचने पर मजबूर किया। कैसे एक व्यक्ति की मृत्यु इतनी जल्दबाजी से हुई, यह प्रश्न हर किसी के मन में उठता है। ऐसे कई सवाल जिनके जवाब ढूंढने की जरूरत है।
विमान हादसे की घटना 17 जुलाई 2024 को नागपुर से गडचिरोली के बीच घूम रहे हेलीकॉप्टर में अजित पवार और चार अन्य लोगों की जान गई थी।
इस दुर्घटना के समय अजित पवार ने बताया था कि उनके साथ तत्कालीन उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उद्योग मंत्री उदय सामंत भी थे।
हालांकि, जब विमान बादलों में घुसते ही बाहर कुछ भी दिखना बंद हो गया, तो अजित पवार ने बताया था कि उन्हें अंधेरे में उड़ रहे हैं, लेकिन फडणवीस बिल्कुल शांत थे। उन्होंने पवार को भरोसा दिलाया कि ऐसे हालात वे पहले भी झेल चुके हैं और कुछ नहीं होगा।
इस घटना के समय अजित पवार ने भगवान का नाम जपना शुरू कर दिया। उन्होंने बताया था कि ऐसे अनुभव इंसान को हिला देते हैं और सावधानी जरूरी है।
इस विमान हादसे की घटना ने पवार के मानवीय पक्ष और विश्वास को सामने लाया है। जिस नेता को लोग दादा कहकर जानते थे, वह भी कठिन क्षणों में ईश्वर का सहारा लेते थे।
इस दुर्घटना ने लोगों को गहराई से सोचने पर मजबूर किया। कैसे एक व्यक्ति की मृत्यु इतनी जल्दबाजी से हुई, यह प्रश्न हर किसी के मन में उठता है। ऐसे कई सवाल जिनके जवाब ढूंढने की जरूरत है।
विमान हादसे की घटना 17 जुलाई 2024 को नागपुर से गडचिरोली के बीच घूम रहे हेलीकॉप्टर में अजित पवार और चार अन्य लोगों की जान गई थी।
इस दुर्घटना के समय अजित पवार ने बताया था कि उनके साथ तत्कालीन उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उद्योग मंत्री उदय सामंत भी थे।
हालांकि, जब विमान बादलों में घुसते ही बाहर कुछ भी दिखना बंद हो गया, तो अजित पवार ने बताया था कि उन्हें अंधेरे में उड़ रहे हैं, लेकिन फडणवीस बिल्कुल शांत थे। उन्होंने पवार को भरोसा दिलाया कि ऐसे हालात वे पहले भी झेल चुके हैं और कुछ नहीं होगा।
इस घटना के समय अजित पवार ने भगवान का नाम जपना शुरू कर दिया। उन्होंने बताया था कि ऐसे अनुभव इंसान को हिला देते हैं और सावधानी जरूरी है।
इस विमान हादसे की घटना ने पवार के मानवीय पक्ष और विश्वास को सामने लाया है। जिस नेता को लोग दादा कहकर जानते थे, वह भी कठिन क्षणों में ईश्वर का सहारा लेते थे।