30 महीने का इंतजार और टूटा सब्र, किराया न मिलने पर मकान मालिक ने MPDO दफ्तर पर जड़ा ताला

ਇਹ ਤਾਂ ਅਸੀਂ ਜਿੰਨ੍ਹਾਂ ਦੀਆਂ ਕੁੱਝ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ਤਾਵਾਂ ਛੋਟੀਆਂ ਗਲਤੀਆਂ ਨਹੀਂ ਰੱਖ ਸਕਦੇ। 30 ਮਹੀਨਿਆਂ ਤੋਂ ਵੀ ਜਿੰਨਾ ਸਮਾਂ ਗੁਝਰ ਚੁੱਕਾ ਹੈ, ਉਹ ਇਹ ਦੁਖਦਾਈ ਘਟਨਾ ਇਸੇ ਜ਼ਮੀਨੀ ਲੰਬਾਈ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਵੀ ਹੋਣ ਦਿੱਸ ਰਿਹਾ ਹੈ।
 
अरे वाह, यह तो बिल्कुल भी सही नहीं है कि सरकारी पैसे समय पर न मिलें। 30 महीने तक किराए चुकाने के बाद भी कोई जवाब देने का मनोबल? यह तो जमीनी स्तर पर बहुत परेशान कर रही है। क्योंकि जैसे ही हमें कोई पैसा मिलने की उम्मीद थी, वहीं सभी अधिकारी ताला लटका देने लगे। इससे घर चलाना कितना मुश्किल हो गया है!

मैंने सुना है कि सरकार अब एक नई प्लेटफॉर्म पर आधारित सेवाएं शुरू करने जा रही है, जिसमें राज्य सरकार द्वारा भुगतान और अनुप्रयोग एकीकृत किया गया है। इससे बेहतर होने का इंतजार नहीं था। अब ही हमें इस प्लेटफॉर्म पर जाकर अपने अधिकारों की जांच करनी चाहिए। 📊💼
 
यह बिल्कुल सही है, लोगों को पैसा देने में इतनी मुश्किल क्यों होती है? क्या हमारे पास सरकार ठीक से नहीं चल रही? यह ताला लगने की बात बड़ी शरारत है, लेकिन सच्चाई यह है कि कई बार जब हमें पैसा मांगने की जरूरत होती है तो सरकार हमेशा एक दूसरे से मक्कार बन जाती है।
 
यह तो और भी अजीब बात है 🤯। 30 महीने से मकान मालिक ने किराया नहीं चुकाया और अब ताला लटका दिया? यह तो एक बड़ी समस्या है, लेकिन सरकारी भवनों में चलने वाले अधिकारियों के लिए यह सिर्फ एक मजाक है 😂। उन्हें लगता है कि अगर वे अपना काम ठीक से करें, तो सब कुछ आसानी से होगा। लेकिन दिल्ली में रास्ता खोजते रहना और पैसे कमाने की जरूरत है, यह तो उनकी जिम्मेदारी नहीं है 🤷‍♂️
 
यह बात सुनने पर मुझे बहुत सोचने की जरूरत है कि सरकारी तंत्र इतना अनजान हो सकता है कि लोगों की जरूरतें समझने में असमर्थ है। 30 महीनों से किराया नहीं चुकाए जाने और फिर भी कुछ पैसे देने की उम्मीद में एक व्यक्ति अपना घर सरकारी दफ्तर के लिए देता है, यह तो बहुत दिलचस्प है। लेकिन जब ताला लग जाता है और कामकाज पूरी तरह से बंद हो जाता है, तो यह दर्शाता है कि सरकारी तंत्र में भ्रम हो सकता है या फिर कुछ लोगों की धैर्य की कमी हो सकती है। 🤔
 
अरे, यह तो बिल्कुल भी सही नहीं... 30 महीने से किराया नहीं चुकाया गया था, तो फिर सरकारी दफ्तर के लिए मकान मालिक ने ताला लटका दिया। यह एक बड़ी समस्या है, मैं समझता हूं कि मकान मालिकों की परिस्थितियां अच्छी नहीं हैं, लेकिन ताला लगने से दफ्तर का काम भी रुक गया है। यह एक बड़ा विवाद है, और हमें इसका समाधान निकालना चाहिए।
 
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