4 करोड़ लाशों पर बैठा था यूरोप: 76 साल पहले कैसे बना NATO, क्या अब बिखरना तय है; आखिरी कील ठोक रहे ट्रम्प

राष्ट्रपति बनते ही डोनाल्ड ट्रम्प ने नाटो सहयोगियों को साफ शब्दों में सुना दिया- अपने हिस्से का पैसा खर्च करो, नहीं तो सुरक्षा भूल जाओ।
 
नाटो की बातें तो हमेशा ही खलल डालती हैं - यह न कि हमारे लिए, बल्कि अपने देश के लिए ही 🤔
डोनाल्ड ट्रम्प की बोली से लगता है कि वह अपने हिस्से को फिट करना चाहते हैं - लेकिन सुरक्षा का मतलब नहीं है कि हम अपने पैसे निकालकर उन्हें देने जाएं 🤑
हमें अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना चाहिए, ताकि वह हमारे लिए सुरक्षित और समृद्ध हो - नहीं तो हम अपने पैसे भी खो देंगे 💸
नाटो सहयोगियों को यह समझना चाहिए कि हमारी मदद से उनकी खाली नौकरियां भरने में मदद करेंगे - नहीं तो वे हमारे लिए फायदा नहीं देंगे 🤷‍♂️
मुझे लगता है कि भारत अपनी सुरक्षा और अर्थव्यवस्था को बनाए रखने में सफल रहेगा - नाटो सहयोगियों की बातों पर विश्वास करने की जरूरत नहीं है 🙅‍♂️
 
अरे, तुमने देखा है यार, राष्ट्रपति बनते ही डोनाल्ड ट्रम्प ने ऐसी बातें क्या कही? 😂 मुझे लगता है कि ये पूरा तरीका गलत है, जैसे ही हम अपने देश को सुरक्षित बनाने की कोशिश करते हैं तुम्हारे खिलाफ बोलते हैं। मेरे फोन में भी पहले से तो पोर्टल पर लोगों की बातें पढ़ता रहता हूं, और मुझे लगता है कि ये एक और ऐसी दिशा में जाना चाहिए। 😒
 
नाटो की बात करते समय ट्रम्प ने सच कहा है, लेकिन हमारा देश ऐसा नहीं है जहां हर कोई अपना बोझ उठाने को तैयार हो। हमें अपनी आर्थिक स्थिति को भी समझना होता है। पैसे कमाना आसान नहीं है, और हमारे देश में बहुत से लोग गरीबी की लहर में डूब रहे हैं।

ट्रम्प ने कहा है कि अगर आप नहीं देते हैं तो सुरक्षा भूल जाओ, यह तो सच में है। हमारे देश में सुरक्षा एक बहुत बड़ी चुनौती है, और हमें अपनी आर्थिक स्थिति को समझने की जरूरत है। लेकिन इसके लिए हमें अपने नेताओं को भी बदलने की जरूरत है जो सिर्फ पैसे कमाने में रुचि रखते हैं, और जनता की जरूरतों को नहीं समझते।
 
😒 यार, यह डोनाल्ड ट्रम्प की बात है तो सब समझ गया, लेकिन हमारे देश में इतने बड़े नेता क्यों इतने ही चपेट में आ गए? 🤔

मुझे लगता है कि यह कहावत "धनधानी से गद्दार" सच में तो पूरी है। जब हमारे देश में बड़े नेता बोलते हैं तो सब उनकी बात पर चुपचाप सुनने लगते हैं, लेकिन क्या वास्तव में उनकी बात समझना है? 🤷‍♂️

आजकल यूरोपीय देशों में ऐसे नेता कई हो गए हैं जो अपने देश की सुरक्षा के लिए इतने ही चिंतित नहीं होते। उनकी बातें सुनने के लिए हमारे देश के नेताओं को तैयार रहना चाहिए, लेकिन क्या वे सही रास्ते पर चल रहे हैं? 🤔
 
नाटो सहयोगियों की बात सुनकर मुझे थोड़ा अजीब लग रहा है 🤔, डोनाल्ड ट्रम्प जी का यह दृष्टिकोण हमारे विश्वास समूह, शांति और सुरक्षा पर कैसा प्रभाव डालेगा, यह बात मुझे थोड़ी चिंतित करती है। 🤝

लेकिन फिर भी, मुझे लगता है कि हमें अपनी रणनीतियों को थोड़ा संशोधित करने की जरूरत है, ताकि हम अपने पड़ोसी देशों के साथ अच्छे संबंध बनाए रख सकें। 🌎

अगर हमारा विश्वास समूह एकजुट होकर और अपने विभिन्न रूपों में काम करता है, तो शायद हम अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर सकते हैं। 💪

लेकिन यह जरूरी नहीं कि हमारे पड़ोसी देश हमेशा सहयोग करें। इसलिए, हमें अपनी सीमाओं का ध्यान रखना भी चाहिए। 🚫
 
मुझे लगता है कि ये बात सच नहीं होगी, लेकिन फिर भी मैं कहूँगा कि इससे नाटो को फायदा होगा, 😒 तो दूसरी ओर मेरा मानना है कि डोनाल्ड ट्रम्प की बात सुनकर नाटो के लिए बहुत बड़ा खतरा है, क्योंकि ये वास्तव में उनकी राजनीतिक शक्ति को दिखाने की कोशिश कर रहे हैं, और इससे हमारे हिस्से का पैसा खर्च करने से पहले उन्हें अपने देश की अर्थव्यवस्था की समस्याओं का समाधान करना होगा, जो बिल्कुल भी आसान नहीं है... लेकिन फिर मुझे लगता है कि इससे नाटो की सुरक्षा कमजोर हो सकती है, अर्थात अगर हम अपना पैसा खर्च कर देते हैं तो हमारे देश की सुरक्षा पर ध्यान न दिया जाए... तो फिर मेरा विचार है कि डोनाल्ड ट्रम्प की बात सुनकर हमें अपने देश की सुरक्षा के लिए थोड़ा और सावधान रहना चाहिए, लेकिन फिर मुझे लगता है कि इससे नाटो को फायदा होगा, यह तो वास्तव में एक बड़ी समस्या नहीं है, 😒
 
🤔 मुझे लगता है कि यह बात समझ में आती है, लेकिन कुछ शब्दों को साफ़ करना जरूरी है। राष्ट्रपति बनने के बाद डोनाल्ड ट्रम्प ने नाटो सहयोगियों को कहा कि अपने हिस्से का पैसा खर्च करें और अगर नहीं तो सुरक्षा खो दो 🚨। यह कहना मुझे लगता है कि बिल्कुल सही है, लेकिन एक साथ समझने की जरूरत है।

ज़रूर, अगर हमारा हिस्सा नाटो में नहीं डालते तो ख्याल नहीं आ सकता 🤷‍♂️। लेकिन यह बात केवल हमारी रक्षा के बारे में नहीं है, बल्कि दुनिया के साथ सहयोग करने की बात भी। नाटो का उद्देश्य सुरक्षा और सहयोग बढ़ाना है 🌟
 
अरे, ये तो एक बड़ा मुद्दा है... नाटो के लिए डोनाल्ड ट्रम्प की बातें सुनकर लगता है कि वे अपने देश के हिसाब से खिलवाड़ कर रहे हैं। लेकिन, यह तो इंटरनेशनल राजनीति है, जहां हर देश की अपनी जरूरतें और हित होते हैं।

मुझे लगता है कि ट्रम्प जी की बातें सुनकर नाटो के अन्य सदस्य देश भी थक सकते हैं। अगर वे अपने हिस्से का पैसा खर्च नहीं करेंगे, तो फिर उनकी सुरक्षा कौन देखेगा? यह एक बड़ा जिम्मेदारी समझ में नहीं आ रही है।
 
😒 ये दुनिया कितनी अजीब है... राष्ट्रपति बनकर तो डोनाल्ड ट्रम्प को लगता है अपने सहयोगियों को धमकाने का मौका मिल गया। नाटो सहयोगियों को साफ शब्दों में कह देने की जरूरत नहीं थी, बस उनके देश की आर्थिक स्थिति को समझने और उनकी सहायता करने की जरूरत थी।

कुछ लोग कहते हैं कि डोनाल्ड ट्रम्प अमेरिकी अर्थव्यवस्था को बहुत मजबूत बनाते हैं, लेकिन ये बातें सुनकर लगता है कि वे अपने देश की आर्थिक स्थिति पर बहुत भरोसा करते हैं। 🤔

यह भी कहना मुश्किल है कि क्या नाटो सहयोगियों को ऐसी धमकी देने की जरूरत थी। तो अगर वे अपने देश की आर्थिक स्थिति पर खरे उतरेंगे, तो फिर भी उन्हें अमेरिकी मदद मांगनी पड़ेगी। यह तो एक बड़ा चक्कर लगता है। 🔄
 
न्यूज़ सुनकर बहुत खेद महसूस होता है कि डोनाल्ड ट्रम्प ने इतनी हिंसक बातें कही हैं। राष्ट्रपति बनते ही ऐसी बातें नहीं कहनी चाहिए, यह सम्मान कमाने वालों को दर्शाता है। सुरक्षा और आर्थिक सहयोग में समझौता करना उचित होता है, लेकिन इस तरह तारीफ करना ठीक नहीं है।

नाटो सहयोगियों को अपनी राजदूतियां खोलने के लिए प्रोत्साहन देना चाहिए, न कि डंक मारना। यह सुरक्षा और व्यापार के लिए एक अच्छा मंच बनाता है।
 
नोटिज़ में लगी है कि डोनाल्ड ट्रम्प ऐसा क्यों बोल रहे हैं? यार देश के लिए क्या कर सकते हैं वो तो कहीं नहीं सुन रहे हैं। यही सवाल सभी राष्ट्रपतियों का क्यों न लग जाए कि हमारा पैसा चोरी कर रहे है और हमें सुरक्षा करनी पड़ेगी। लेकिन अगर वो भी ऐसा कह देते तो ये देश तो बर्बाद हो जाएगा।
 
नाटो की बातें सुनकर बहुत चिंतित हूँ, ये सहयोगियों को लगता है कि हमारा रक्षा बजट हमेशा खुला रखा हुआ रहेगा। दोनाल्ड ट्रम्प जी ने सच्चाई कही है, हमें अपना पैसा सुरक्षा में खर्च करना चाहिए। लेकिन इसके बाद क्या होगा, हमारे रक्षकों को ठीक से पैसा नहीं मिलेगा। यह दुनिया की दुर्दशा है, जहाँ हम अपने रक्षाकारों को भी अपने बजट से बाहर करना पड़ता है।
 
मैंने कभी नहीं सोचा था कि अमेरिका के राष्ट्रपति कितने सीधे दिखते हैं। डोनाल्ड ट्रम्प ने नाटो सहयोगियों से बात करने के लिए एक अजीब तरीका अपनाया है। तो वे अपने हिस्से का पैसा खर्च करें और अगर नहीं तो वे अपनी सुरक्षा भूल जाएं। यह बहुत ही सीधा और सतर्क तरीका है, लेकिन मुझे लगता है कि इससे कुछ भी फायदा नहीं होगा।

मैंने देखा है कि नाटो सहयोगियों में विभिन्न देश होते हैं और उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी अलग-अलग है। अगर उन्हें अपना पैसा खर्च करना पड़ता है, तो इससे वे अपनी सुरक्षा नहीं बेहतर बना पाएंगे। इसके बजाय, वे एक-दूसरे की मदद कर सकते थे और अपनी सुरक्षा को साथ में मजबूत बना सकते थे।
 
अरे, इस बात पर सोचने की जरूरत है कि राष्ट्रपति बनने के बाद और क्या कोई बदलाव आ सकता है? लेकिन दोनाल्ड ट्रम्प ने नाटो सहयोगियों को इतने साफ शब्दों में बताया कि अगर वो अपना पैसा खर्च नहीं करेंगे तो सुरक्षा भूल जाएंगे, तो यहाँ कोई हल नहीं है।

मुझे लगता है कि यह एक दूसरी चीज़ है अगर हमारा राष्ट्रपति अपने देश के लिए काम कर रहा है या विदेशी मुद्दों पर चर्चा कर रहा है। और डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा तो बिल्कुल सही क्योंकि अगर हमारा पैसा खर्च नहीं करते तो यह हमारे देश के लिए कुछ नहीं है।

लेकिन, सुरक्षा एक बहुत बड़ी चीज़ है और इस पर किसी भी तरह की धारणा करना गलत है। मुझे लगता है कि हमें अपने राष्ट्रपति को थोड़ा समय देना चाहिए ताकि वो देश की जरूरतों को समझ ले।
 
नेटवर्क पर पढ़कर लगा कि यह सच है - डोनाल्ड ट्रम्प ने नाटो की बैठक में बहुत ही तेज आवाज़ में बात की और अपने देश के लिए सुरक्षा पर जोर दिया। मुझे लगता है कि यह अच्छी बात है, हमें अपने देश की सुरक्षा को सबसे पहले प्राथमिकता देनी चाहिए। लेकिन फिर भी इससे नाटो के अन्य सदस्यों की भावनाओं पर ध्यान रखना जरूरी है। हमें अपने पड़ोसियों के साथ सहयोग करने का प्रयास करना चाहिए। 🤝🌎

कुछ लोग कहते हैं कि डोनाल्ड ट्रम्प ने बहुत ही ठोस आवाज़ में बात की और इससे नाटो के अन्य सदस्यों पर दबाव पड़ेगा। लेकिन हमें यह भी याद रखना चाहिए कि नाटो एक संयुक्त अभियान है और सभी सदस्यों को एक ही दिशा में चलना चाहिए। 🔄💪

मुझे लगता है कि डोनाल्ड ट्रम्प की बात सुनकर हमें अपने देश की सुरक्षा पर विचार करना चाहिए और नाटो के अन्य सदस्यों की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए। 🤝🌟 #नाटो #सुरक्षा #देश_की_सुरक्षा
 
डोनाल्ड ट्रम्प की बात सुनकर मुझे थोड़ा असहज लगा, खासकर जब उन्होंने नाटो सहयोगियों को अपने हिस्से का पैसा खर्च करने के लिए कहा। ऐसा लगता है जैसे अगर हमारी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है, तो हमें अपनी सुरक्षा पर ध्यान देने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

लेकिन, मुझे लगता है कि हमें अपने आप से पूछना चाहिए कि हमारी आर्थिक स्थिति अच्छी है या नहीं। अगर हमारी आर्थिक स्थिति अच्छी है, तो हमें अपने हिस्से का पैसा खर्च करने में कोई समस्या नहीं होनी चाहिए। लेकिन, अगर हमारी आर्थिक स्थिति खराब है, तो हमें अपने आप से कहीं और ढूंढने की जरूरत नहीं।

मुझे लगता है कि हमें अपनी आर्थिक स्थिति पर ध्यान देना चाहिए और अपने हिस्से का पैसा खर्च करने में हमारी क्षमता को समझना चाहिए। नाटो सहयोगियों को भी उनकी आर्थिक स्थिति को समझना चाहिए और अपने विकल्प चुनने में मदद करनी चाहिए।
 
😂🤣📈
नाटो पर डोनाल्ड ट्रम्प की बात सुनकर मैं सोचta hoon ki kya ye America ka President hai ya koi Bollywood Actor 🤔
अगर woh apne himself ke investment ko 1% se 5% mein badalna chahta hai toh suna hi ho jata 📊
लेकिन अगर wo 10-20 crore ko government ki cheezon mein invest karta hai toh suna hi nahi hota 🤑
यार ट्रम्प जी, apne investment ki baat karo, hum tere investment ke hisaab se sarkar ko kya bataen? 🤷‍♂️
 
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