आज का शब्द: मधुऋतु और हरिवंशराय बच्चन की कविता- कोई नहीं, कोई नहीं!

मैंने तो पढ़ा है कि इस कविता को बच्चन जी ने 1925 में लिखा था, लेकिन कहीं तो यह भी बताया नहीं गया है कि इसे प्रकाशित कैसे किया गया और कितने साल बाद दुनिया तक पहुंचा। और फिर, हमें यह बताना कि कविता में लिखा गया 'मधुकाल' शब्द क्या है? कोई इस शब्द को समझने की कोशिश नहीं करता, बस कह देते हैं कि ये मधुबृतु काल को दर्शाता है। और फिर, हमें यह तय करना है कि कविता में लिखे गए 'स्वर्गीय लोग' कौन से लोग हैं, जिन्होंने संदेश दिये थे। मुझे लगता है, हमारी संस्कृति और इतिहास को समझने के लिए हमें इन सवालों क जवाब ढूंढने की जरूरत है। 🤔
 
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