हाला शब्द की महानता को हरिवंशराय बच्चन ने अपनी कविता 'मधुशाला' में चित्रित किया है। इस शब्द की जड़ें प्राचीन भारतीय संस्कृति में हैं, जहां इसका अर्थ मद्य या शराब था। लेकिन बच्चन ने यह शब्द एक नए अर्थ में लाया है, जो समाज में विभाजन और भेदभाव की समस्याओं से जुड़ा है।
कविता में मधु की भट्ठी की ज्वाला का वर्णन किया गया है, जिसमें ऋषि ध्यान लगा बैठे हुए मदिरा पीते हैं। इसके साथ ही, मुनि कन्याओं से मधुघट लेकर निकलती हैं, जो वेदों के ठेकेदारों की तरह हैं। यहाँ पर बच्चन ने श्रम, संकट और संताप की समस्याओं को भूल गया है, जिससे मानवता को मधुशाला में डूबने की चेतावनी दी गई है।
कविता के विभिन्न पाठों में विभिन्न समुदायों और धर्मों के लोगों को एक साथ बैठाकर पीते हुए दिखाया गया है, जिससे यहाँ पर सभी का स्वागत किया जाता है। इसके अलावा, बच्चन ने महसूस किया है कि रंक-राव में भेद हुआ है, और साम्यवाद की प्रथम प्रचारक होने का दावा किया गया है।
इस कविता से यह बात साफ़ चलती है कि हाला शब्द का अर्थ ज्यादा गहरा है। इसका निर्धारण किसी एक धर्म या समुदाय से नहीं होता, बल्कि यह सभी को मिलाकर पीते हुए दिखाया गया है। इसलिए, बच्चन की कविता में हाला शब्द की महत्ता इस प्रकार स्पष्ट होती है कि यह समाज में विभाजन और भेदभाव को दूर करने के लिए एक संदेश है।
कविता में मधु की भट्ठी की ज्वाला का वर्णन किया गया है, जिसमें ऋषि ध्यान लगा बैठे हुए मदिरा पीते हैं। इसके साथ ही, मुनि कन्याओं से मधुघट लेकर निकलती हैं, जो वेदों के ठेकेदारों की तरह हैं। यहाँ पर बच्चन ने श्रम, संकट और संताप की समस्याओं को भूल गया है, जिससे मानवता को मधुशाला में डूबने की चेतावनी दी गई है।
कविता के विभिन्न पाठों में विभिन्न समुदायों और धर्मों के लोगों को एक साथ बैठाकर पीते हुए दिखाया गया है, जिससे यहाँ पर सभी का स्वागत किया जाता है। इसके अलावा, बच्चन ने महसूस किया है कि रंक-राव में भेद हुआ है, और साम्यवाद की प्रथम प्रचारक होने का दावा किया गया है।
इस कविता से यह बात साफ़ चलती है कि हाला शब्द का अर्थ ज्यादा गहरा है। इसका निर्धारण किसी एक धर्म या समुदाय से नहीं होता, बल्कि यह सभी को मिलाकर पीते हुए दिखाया गया है। इसलिए, बच्चन की कविता में हाला शब्द की महत्ता इस प्रकार स्पष्ट होती है कि यह समाज में विभाजन और भेदभाव को दूर करने के लिए एक संदेश है।