“आलाकमान से मिलना आसान नहीं..” इस कांग्रेस नेता ने मिलाया पूर्व केंद्रीय मंत्री शकील अहमद के सुर में सुर

राहुल गांधी पार्टी छोड़ने के बाद नेतृत्व की कार्यप्रणाली पर आलोचना करने वाले शकील अहमद के साथ मिले। कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने रविवार को कहा, 'शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच की सीमितता पार्टी में कम्युनिकेशन की गहरी दीवार बना दी है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि आलाकमान से मिलना आसान नहीं है।'

अल्वी ने कहा, 'मैं शकील अहमद का बयान नहीं देखा है, लेकिन पार्टी में ऐसा कोई मंच नहीं है जहां हमारी बातचीत हो सके। अगर किसी को अपनी चिंताएं व्यक्त करना चाहिए, तो कहां जाए? हर कोई सीडब्ल्यूसी के सदस्य नहीं है।'

पार्टी में शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच की कमी ने पार्टी के कार्यक्रमों और समुदायों में कमजोरियां उभरने का कारण बना। कार्यकर्ताओं को अपनी चिंताएं व्यक्त करने के लिए संवेदनशील मंच की आवश्यकता है।
 
बिल्कुल, यह तो बहुत दुखद है कि पार्टी में ऐसी कमजोरियां आई हैं। शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचने की जिंदगी में यह तो सिर्फ एक छोटा सा अंतर है, लेकिन कार्यकर्ताओं के लिए यह बहुत बड़ा अंतर है। मैंने कभी नहीं सोचा था कि मेरी बातचीत पार्टी के नेताओं तक पहुंचने के लिए सीवीटीयू पर ही सीमित रहेगी। इसके बजाय, मुझे लगता है कि हमें पार्टी के अंदर एक अलग तरीका ढूंढना चाहिए, जैसे कि ऑनलाइन फॉर्म भरना या ऐसे समूह बनाने जो अपनी बातचीत कर सकें।
 
मैंने हाल ही में एक पार्टी समारोह में राशिद अल्वी जी से मुलाकात की थी, वो बहुत निराश लग रहे थे, उन्होंने मुझे बताया कि कांग्रेस की पार्टी में शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच कम होने से कई समस्याएं आ गई हैं... 🤔 और यहीं तो सबसे बड़ी समस्या है कि हमारी बातचीत नहीं हो पाई, लेकिन मुझे लगता है कि शीर्ष नेतृत्व से जुड़े लोग अक्सर अपने विचारों को संवेदनशील मंच पर दिखाने में असमर्थ होते हैं...

मेरी पत्नी ने भी खुद कुछ ऐसा कहा था, वो बोलती रही कि पार्टी में कार्यकर्ताओं से जुड़े लोग अक्सर शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच करने की उम्मीद नहीं करते हैं... 🤷‍♀️ लेकिन अगर हमारे पास संवेदनशील मंच होता, तो शायद कुछ अलग होता...

अब जब राहुल गांधी ने पार्टी छोड़ दी है, तो यह एक बड़ा बदलाव आ गया है... 🤯 मुझे लगता है कि शीर्ष नेतृत्व की कमी से पार्टी के कार्यक्रमों और समुदायों में कमजोरियां उभरने लगी हैं...
 
राहुल गांधी पार्टी छोड़ने के बाद नेतृत्व की कार्यप्रणाली पर आलोचना करने वाले शकील अहमद के साथ मिले। तो यह समझ आता है कि कांग्रेस में ऐसी कई कमजोरियां हैं जिन्होंने पार्टी को इस तरह गिरा दिया है। सरकार की सीमितताओं ने भी पार्टी को धिक्कार दिया है, जैसा कि राशिद अल्वी जी ने कहा। लेकिन यह सवाल उठता है कि अगर किसी को अपनी चिंताएं व्यक्त करना चाहिए, तो कहां जाए? सीडब्ल्यूसी के सदस्य नहीं होना एक बुरा नाम नहीं है, लेकिन ऐसे मंचों की आवश्यकता है।
 
राशिद अल्वी जी का बयान सुनकर मुझे लगता है कि पार्टी में कुछ ठीक होने की जरूरत है 🤔। आलाकमान से मिलना आसान नहीं हो सकता, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम अपनी चिंताएं व्यक्त करने के लिए पार्टी से दूर रहना चाहें। हमें एक संवेदनशील मंच की जरूरत है, जहां हम अपनी बातचीत कर सकें और अपनी चिंताओं को व्यक्त कर सकें। सीडब्ल्यूसी के सदस्य बनने की जरूरत नहीं है, हमारी जागरूकता और भावनाएं पर देखभाल करनी चाहिए। पार्टी में शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच की कमी से हमारे समुदायों में कमजोरियां उभरने का कारण बन सकती है, लेकिन अगर हम एक दूसरे को सुनने और समझने की कोशिश करें, तो हम अपनी पार्टी को मजबूत बना सकते हैं। 💪
 
मुझे लगता है कि पार्टी में शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच की कमी बहुत बड़ी बाधा बन गई है। जब भी कोई व्यक्ति अपनी चिंताएं व्यक्त करना चाहता है, तो उन्हें फिर से सीडब्ल्यूसी के सदस्य बनने या पार्टी में स्थानीय नेताओं से बातचीत करने के लिए मजबूर होना पड़ता है। यह बहुत परेशान कर रहा है और कई लोगों को अपनी आवाज़ सुनने के लिए मजबूर होने की जरूरत है।
 
राशिद अल्वी जी का बयान बहुत सच्चाई में भरपूर है 🤔। पार्टी में शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच की कमी से हमारे कार्यकर्ताओं और समुदायों को बहुत नुकसान हुआ है। जैसे ही, जैसे हमारी चिंताएं व्यक्त करने का एक उपयुक्त मंच नहीं है, वही हमें अपनी बात समझने का मौका भी नहीं दिया। पार्टी में संवेदनशीलता और सम्मान की जरूरत है 🙏
 
बात तो बहुत बड़ी है ना... पार्टी में शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच की कमी से सब कुछ खराब हो गया है। किसी की बात नहीं सुनने की वजह से कार्यकर्ताओं की खुशियां गिर गई हैं। तो शायद उन्हें अपनी चिंताएं कहीं व्यक्त करने का मौका देना चाहिए...
 
मेरी बात तो यह है कि पार्टी में शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच की कमी से पूरा प्रदेश ज्यादा परेशान होता दिख रहा है। लेकिन, मैंने पार्टी में बहुत से ऐसे लोगों से बात किया है जो हमेशा से आलाकमान से मिलना आसान था। तभी भी सोचता हूँ कि अगर शकील अहमद ने सच कहा है तो पार्टी में कोई अच्छा समन्वय नहीं होना चाहिए। लेकिन, जब तक हम अपनी बातें खुलकर कहे और आलाकमान से मिलें, तब तक हमारी चिंताएं दूर नहीं होंगी। 🤔
 
बिल्कुल यार, पार्टी की जिम्मेदारियों को समझने की जरूरत है 🤔। जैसे तुम्हें कोई राय देनी हो, तो पहले सोचो कि इस बात पर क्या विचार करें और फिर लिखो। प्लेस में एक स्पष्ट मंच नहीं होने से कुछ लोगों ने अपनी चिंताएं व्यक्त करने की जरूरत महसूस की है। शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच की कमी को दूर करने के लिए पार्टी को अपनी संरचना में बदलाव लाने की जरूरत है 📈
 
बस, पार्टी में नेतृत्व की गड़बड़ी को देखकर लगता है कि कुछ गलत हो रहा है। शीर्ष नेताओं तक पहुंचने की सीमितता और कमजोर समुदायों में बैठने की समस्या को समझना जरूरी है, लेकिन इसके लिए एक दूसरे के साथ खुलकर बात करने की आवश्यकता भी है। कार्यकर्ताओं की चिंताएं सुनने और उनके मंच प्रदान करने की जरूरत है, न कि बस इसलिए कह देना कि सभी शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच सकते हैं।
 
मैंने देखा की पार्टी में शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच की कमी हुई, तो क्यों? 🤔

यदि कोई व्यक्ति चिंताएं दिखाता है, तो संवेदनशील मंच की जरूरत है। लेकिन अगर ऐसा मंच नहीं है, तो कैसे बोल सकते? 🗣️

मैंने एक diagram बनाया है:

+-----------------------+
| शीर्ष नेतृत्व तक |
| पहुंच की कमी |
+-----------------------+
|
| संवेदनशील मंच
v
+-----------------------+
| चिंताएं व्यक्त करने |
| के लिए सुरक्षित स्थान|
+-----------------------+

मुझे लगता है की हमें पार्टी को बदलने की जरूरत है, ताकि हर कोई अपनी चिंताएं व्यक्त कर सके। 🤝
 
बस, पार्टी में नेतृत्व की जगह, दोस्तों की बात पर ध्यान देना चाहिए 🤗। क्या हमारी आवाज़ सुनने वाले लोग नहीं हैं? राशिद अलवी जी को लगता है कि पार्टी में कम्युनिकेशन बहुत गहरी दीवार बन गई है। और शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच की सीमितता के कारण, हमारी चिंताएं व्यक्त करना आसान नहीं होता 🤔
 
मुझे लगता है कि पार्टी में शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच की कमी को दूर करने के लिए हमें एक अलग तरीके से सोचने की जरूरत है। अगर हमारे कार्यक्रमों और समुदायों में सुधार करना चाहते हैं तो हमें अपने कार्यकर्ताओं को महत्वपूर्ण भूमिका निभाने देनी चाहिए। शायद हमें एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बनाने की जरूरत है जहां हमारे कार्यकर्ताओं और सदस्य अपनी चिंताएं व्यक्त कर सकें। यह सुनिश्चित करेगा कि सभी को अपनी आवाज़ सुनने का मौका मिले।
 
मुझे लगता है कि पार्टी में शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच की कमी तो एक अच्छा काम है, जिससे आमजनित विचार भी सामने आ सकें। अगर सभी लोगों को अपनी चिंताएं कहीं भी बताई जा सकती हैं तो पार्टी में निर्णय लेने में स्पष्टता आएगी।
 
बातों बात, पार्टी में जो दीवार लग गई है, वह खुलकर बोलने और चिंताओं को साझा करने की जगह पर बाधक हो रही है 🤔। राशिद अल्वी का बयान सुनकर लगता है कि पार्टी में कम्युनिकेशन की गहरी दीवार बन गई है, लेकिन शायद यही दीवार हमें मजबूत बनाएगी।

मुझे लगता है कि पार्टी में नेतृत्व तक पहुंचने की सीमितता और कमजोरियां उभरने का एकमात्र समाधान है - खुलकर बातचीत और शीर्ष नेतृत्व को चुनौती देने के लिए मंच। पार्टी के कार्यक्रमों और समुदायों में कमजोरियां उभरने से हमें सीखने और मजबूत होने का एकमात्र मौका मिल सकता है।
 
वाह दोस्तो! 😮 यह तो बहुत बड़ी समस्या है पार्टी में शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच की कमी। क्या यही वजह है कि कांग्रेस के लिए चुनावों में जीत संभव नहीं है? 🤔 कार्यक्रमों और समुदायों में कमजोरियां उभरने की बात तो सच है, लेकिन इसका समाधान कहाँ होगा? पार्टी में हमेशा आलोकमान से मिलना आसान नहीं था, लेकिन अब यह कठिन हो गया है। 🤷‍♂️
 
🤔 यह बात सच्ची है कि पार्टी में शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच कमी हो गई है, तो भी इसका अर्थ यह नहीं है कि हमें राहुल जी जैसे नेताओं को खोना चाहिए। लेकिन फिर भी, पार्टी में संवेदनशीलता और खुलापन कम हुआ है। जब तक हम अपनी बातचीत नहीं कर सकते, तब तक हमारी चिंताएं निरस्त नहीं होंगी। 🤗
 
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