मुझे लगता है कि सबसे बड़ी समस्या यही है कि लोग अपनी सैलरी को प्रभावी ढंग से प्लान नहीं करते। अगर तुम्हारी सैलरी को 50-30-20 रूल में बांट लीजो, तो आसान है कि खर्च और बचत का अंतर साफ़ हो जाएगा। लेकिन अगर तुम अपने पैसों को नहीं ट्रैक करते, तो कभी भी सेविंग करने की बात सुनिश्चित नहीं होती।
तो मेरी सलाह है, हर महीने पहले से ही अपनी सैलरी का एक निर्धारित हिस्सा बचाएं। इसमें सबसे पहले जरूरी खर्चों को शामिल करें, फिर वांट्स, और अंत में सेविंग और निवेश। यह रूल सभी के लिए है, लेकिन आपकी सैलरी और जिम्मेदारियाँ आपको अलग-अलग तरीके से प्रभावित कर सकती हैं।
अगर आपकी इनकम कम है तो सबसे पहले जरूरतों का हिस्सा बढ़ाएं, फिर वांट्स को सीमित रखें, और अंत में सेविंग शुरू करें। और अगर आपकी इनकम अच्छी है, तो चाहतों का बजट बढ़ाने की बजाय सेविंग और निवेश पर ध्यान दें।