अपने पैसे को 50-30-20 रूल से बचाएं, फंड बनाएं। अगर आपका महीने में आता है कि हर दिन अच्छा और बुरा समय आता है, तो आपकी नौकरी में भी ऐसा ही होता है। अगर आपके पास सैलरी एकाउंट में आने के 10 दिन के भीतर ही खर्च हो जाती है, तो आपका हर महीना खत्म हो जाती है।
गौरव तिवारी, फाइनेंशियल एक्सपर्ट कहते हैं कि अगर खर्च का ढांचा तय नहीं किया गया है तो कभी भी सेविंग नहीं कर पाएंगे। इसके लिए 50-30-20 रूल बात करना सही है। यह कोई नियम नहीं है, बल्कि एक ऐसा तरीका है जिससे आप अपने पैसों को पहले से ही सही दिशा दे सकते हैं।
सवाल: 50-30-20 रूल क्या है?
जवाब: 50-30-20 रूल में आपकी इनकम को तीन हिस्सों में बांट लीजिए।
50%- जरूरतें
यह वह हिस्सा है जिसे आप आवश्यक खर्च कर सकते हैं, जैसे घर का किराया, बच्चों की स्कूल फीस, राशन, बिजली-पानी, ट्रांसपोर्ट और जरूरी इंश्योरेंस।
30%- चाहतें
यह वह हिस्सा है जो आपकी पसंद पर निर्भर करता है, जैसे कि रेस्तरां में खाना, ऑनलाइन शॉपिंग, OTT सब्सक्रिप्शन, घूमना-फिरना, महंगे गैजेट्स।
20%- सेविंग और निवेश
यह वह हिस्सा है जो आपको भविष्य की जरूरतों को पूरा करने में मदद करता है, जैसे SIP, RD, PPF, इमरजेंसी फंड।
अगर आपकी इनकम कम है तो जरूरतों का हिस्सा 60-70% तक हो सकता है और सेविंग 20 की जगह 5-10% से शुरू करें। अगर फैमिली है और जिम्मेदारियां ज्यादा हैं तो वांट्स का बजट सीमित रखें।
कम सैलरी में सेविंग कैसे करें? ये सबसे बड़ा भ्रम है कि कम सैलरी में सेविंग संभव नहीं है। लोग सेविंग्स के लिए सैलरी बढ़ने का इंतजार करते रहते हैं और उसके साथ उनके खर्च भी बढ़ते रहते हैं। इसलिए, सेविंग लायक सैलरी वाला दिन कभी आता ही नहीं है। सेविंग की शुरुआत हमेशा छोटी रकम से होती है, जैसे 500 रुपए महीने से शुरुआत करें और फिर हर महीने अलग रखें।
गौरव तिवारी, फाइनेंशियल एक्सपर्ट कहते हैं कि अगर खर्च का ढांचा तय नहीं किया गया है तो कभी भी सेविंग नहीं कर पाएंगे। इसके लिए 50-30-20 रूल बात करना सही है। यह कोई नियम नहीं है, बल्कि एक ऐसा तरीका है जिससे आप अपने पैसों को पहले से ही सही दिशा दे सकते हैं।
सवाल: 50-30-20 रूल क्या है?
जवाब: 50-30-20 रूल में आपकी इनकम को तीन हिस्सों में बांट लीजिए।
50%- जरूरतें
यह वह हिस्सा है जिसे आप आवश्यक खर्च कर सकते हैं, जैसे घर का किराया, बच्चों की स्कूल फीस, राशन, बिजली-पानी, ट्रांसपोर्ट और जरूरी इंश्योरेंस।
30%- चाहतें
यह वह हिस्सा है जो आपकी पसंद पर निर्भर करता है, जैसे कि रेस्तरां में खाना, ऑनलाइन शॉपिंग, OTT सब्सक्रिप्शन, घूमना-फिरना, महंगे गैजेट्स।
20%- सेविंग और निवेश
यह वह हिस्सा है जो आपको भविष्य की जरूरतों को पूरा करने में मदद करता है, जैसे SIP, RD, PPF, इमरजेंसी फंड।
अगर आपकी इनकम कम है तो जरूरतों का हिस्सा 60-70% तक हो सकता है और सेविंग 20 की जगह 5-10% से शुरू करें। अगर फैमिली है और जिम्मेदारियां ज्यादा हैं तो वांट्स का बजट सीमित रखें।
कम सैलरी में सेविंग कैसे करें? ये सबसे बड़ा भ्रम है कि कम सैलरी में सेविंग संभव नहीं है। लोग सेविंग्स के लिए सैलरी बढ़ने का इंतजार करते रहते हैं और उसके साथ उनके खर्च भी बढ़ते रहते हैं। इसलिए, सेविंग लायक सैलरी वाला दिन कभी आता ही नहीं है। सेविंग की शुरुआत हमेशा छोटी रकम से होती है, जैसे 500 रुपए महीने से शुरुआत करें और फिर हर महीने अलग रखें।