Ajit Pawar Last Rites Live: पंचतत्व में विलीन हुए अजित पवार, बेटों ने दी मुखाग्नि; उमड़ा जनसैलाब

अजीत पवार की लंबी लंबी लयांची याद...

अजित पवार, जिन्हें हम ‘दादा’ के नाम से भी जानते थे, हाल ही में बारामती में उनके अंतिम संस्कार का समारोह सम्पन्न हुआ। ये समारोह इतना राजकीय था कि इसमें आम जनता को भी जगह मिली।

अजित पवार, जिन्होंने महाराष्ट्र की राजनीति में अपना एक अलग स्थान बनाया है, उनके अंतिम संस्कार में कई नेता और राज्य के वरिष्ठ नागरिक उपस्थित रहे। उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए, महाराष्ट्र की मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, “अजित पवार हमेशा सबको साथ लेकर काम करते थे।”

अजीत पवार की मृत्यु के बाद कई नेताओं ने उनकी श्रद्धांजलि अर्पित की। महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा, “अजित दादा के पास महाराष्ट्र के विकास के लिए एक बेहतरीन विजन था। उनके पास शासन एवं प्रशासन की हर समस्या का समाधान मौजूद रहता था।”

सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने अपने बयान में कहा, “यह एक अत्यंत दुखद घटना है। हमारी संवेदनाएं पवार परिवार के साथ हैं।” उन्होंने ईश्वर से परिवार को इस कठिन समय में शक्ति देने की प्रार्थना की।

अजित पवार के निधन पर शिवसेना (UBT) नेता अरविंद सावंत ने कहा, “शरद पवार ने स्पष्ट किया है कि इस विमान हादसे के पीछे कोई राजनीति नहीं है, लेकिन उन्होंने जांच कराने से इनकार नहीं किया है।” उन्होंने कहा, “हादसे की तह तक जाने के लिए जांच आवश्यक है।”

इस विमान हादसे पर बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बयान दिया था। उन्होंने कहा, “यदि श्रद्धांजलि अर्पित करनी है तो हमें उसी की श्रद्धांजलि अर्पित करनी चाहिए।”

अजित पवार के अंतिम संस्कार में कई नेता और राज्य के वरिष्ठ नागरिक उपस्थित रहे। उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, “अजित पवार एक बड़े नेता थे। हम उनकी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।”

अजित पवार के अंतिम संस्कार में दो बेटे और कई राजनीतिक नेता उपस्थित रहे। उनके भाई भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता संजय जायसवाल ने कहा, “अजित पवार एक बड़े नेता थे। हम उनकी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।”

इस तरह, अजीत पवार का अंतिम संस्कार सम्पन्न हुआ। यह व्यापक रूप से तड़कती घटना को दर्शाता है कि आज भी हमें अपने नेताओं और शासकों के प्रति सम्मान और आदर की आवश्यकता है।
 
अजित पवार चालाकी से खेलते थे... 🤔 उनके अंतिम संस्कार में कई नेता उपस्थित रहे, लेकिन क्या वास्तव में वे उनकी श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे थे या फिर अपने राजनीतिक हितों को बढ़ावा देने के लिए? शरद पवार ने कहा है कि इस विमान हादसे में राजनीति नहीं है, लेकिन क्या हमें यह विश्वास करना चाहिए? 🤷‍♂️

अजित पवार की मृत्यु ने एक संदेश दिया है - हमें अपने नेताओं और शासकों के प्रति सम्मान और आदर की आवश्यकता है। लेकिन क्या हम इसे वास्तविकता बना सकते हैं? 🤔

इस तरह, अजीत पवार के अंतिम संस्कार ने हमें एक सवाल दिया - हम अपने नेताओं को कैसे पहचानें और उनकी श्रद्धांजलि अर्पित करें? 🙏
 
अजित पवार जी की लंबी लय आ गई तो मेरी मन में एक सवाल आया कि दादा पुरुषोत्तम गांधे हिन्दी साहित्य के लिए कहीं कितने महत्वपूर्ण? उनकी भूमिका को देखते हुए आजकल हमारे साहित्यकार और लेखक कितने आगे बढ़ गए? तो मुझे लगने लगा कि अजित पवार जी ने एक अच्छी बात कही थी - "राजनीति में सब कुछ याद रखना ही नहीं बल्कि सब कुछ सीखना ही चाहिए"।
 
मुझे लगता है कि आज भी हमें अपने नेताओं और शासकों के प्रति सम्मान और आदर की आवश्यकता है, जैसा कि अजीत पवार के अंतिम संस्कार में दिखाई दिया गया था।

[ASCII Art: एक मुख्यमंत्री की तस्वीर, उसके सामने एक नेता खड़ा]

हमें ऐसे नेताओं को याद रखना चाहिए जिन्होंने समाज के लिए कुछ योगदान दिया है।

[ASCII Art: एक फोटो की तस्वीर, उसमें एक बच्चा खेल रहा है, और उसके पीछे एक वृद्ध नेता खड़ा]

आज भी हमारे समाज में ऐसे लोग हैं जो शिक्षा, स्वास्थ्य, और आर्थिक विकास पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

[ASCII Art: एक गणितीय चित्र, जिसमें कई गोलियां लगी हुई हैं, और उनके बीच एक सुंदर पैटर्न बना हुआ है]

लेकिन फिर भी, हमें अपने नेताओं को आलोचित करने के लिए तैयार रहना चाहिए, और उन्हें बदलने की आवश्यकता है।

[ASCII Art: एक विमान हादसे की तस्वीर, जिसमें कई लोग घायल हुए हैं]

आज भी हमारे समाज में ऐसे मुद्दे हैं जिन्हें हल करने की आवश्यकता है, जैसे कि विकास, स्वच्छता, और शिक्षा।

[ASCII Art: एक फोटो की तस्वीर, उसमें एक बच्चा पढ़ रहा है, और उसके पास एक अच्छी स्कूल की तस्वीर है]

हमें इन मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है, और अपने नेताओं को उन्हें हल करने में मदद करने की आवश्यकता है।

[ASCII Art: एक समूह की तस्वीर, जिसमें कई लोग मिलकर काम कर रहे हैं]
 
मुझे याद है जब अजीत पवार जी ने बारामती में उनके अंतिम संस्कार का समारोह आयोजित किया था, हम सभी ने देखा था कि इतने बड़े नेता का अंतिम संस्कार राजकीय स्तर पर आयोजित किया गया था। यह सब बहुत ही दुखद है, मुझे लगता है कि हमें अपने नेताओं और शासकों के प्रति सम्मान और आदर की आवश्यकता है। आज भी जब तक हम अपने नेताओं और सामाजिक व्यक्तियों को इस तरह मानने लगें, तब तक हमारे समाज में बदलाव नहीं आयेगा। यह एक बहुत बड़ा सबक है जिसे हमें सीखना होगा, कि कैसे हम अपने नेताओं की बात मानते हैं और उनका सम्मान करते हैं।
 
अजित पवार की लंबी लयांची याद करायला असमभाव्य आहे. तो बारामती में त्यांना अंतिम संस्कार केले जाणे, आम जनतेची भागीदारी होतीच, नेहमीच राजकीय समारोहात दखल घेतली पाहिजे. पवार ने महाराष्ट्रच्या विकासाच्या लहान मुलेनुसार काम केले, आणि तो नेता आहे ज्याचा शासन केल्यात संवाद होता.
 
अजित पवार की मृत्यु के बाद तो तो एकदम से सब विपरीत दिशा में चल पड़ा। लेकिन मैं यह कह सकता हूँ कि उनकी मृत्यु ने हमें अपने नेताओं और सरकारों पर ध्यान देने की आवश्यकता दिखाई है। यह एक अच्छा अवसर है कि हम अपने नेताओं की विश्वसनीयता और प्रतिबद्धता पर रोक-टोक करें। लेकिन मुझे लगता है कि हमें इसके लिए आगे बढ़ने की जरूरत है, ताकि हमें अपने नेताओं को ऐसे न चुनना पड़े।
 
अजीत पवार चालू आहेत, जीवन से बहुत कम घनटा, परंतु समाजात्त्वाला 🤗. हमें विशेषतः आपल्या नागरिकांच्या मनावर एक गणितग्य श्रद्धांजलि देणे, त्यापेक्षेच त्याचे प्रयत्न आणि सेवा काहीही चुकवू शकत नाहीत.
 
अजित पवार की याद में तो हम सब आहिल बोलते आ रहे हैं... उनकी लंबी लयांची विरासत म्हणजे त्याच्या देशभक्ती, समर्पण, और नेतृत्व म्हणजे त्याचा सतत प्रयोग. आज भी हमारे समाजात बहुत से लोग हैं जो उनकी शिक्षा, उनके आदर्शों को अपने जीवन में शामिल करते हुए आगे बढ़ रहे हैं।

हमारे देश के नेताओं को हमें हमेशा प्रेरित कर सकते हैं और उन्हें सशक्त बना सकते हैं, लेकिन उनकी भूमिका में स्वीकृति और सम्मान भी बहुत जरूरी है। आज अजीत पवार की याद में हम सब एकजुट हो कर उनके जीवन और कार्यों से प्रेरित होते आ रहे हैं। 🙏💕
 
माझ्या मनात जाए की, याचना को व्यवस्थित रीतीने केले तर, अशा मृत्यु न होती. मी तितकीच बोलताच, माझा विश्वास आहे की अजित पवारच्या निधनावर इतर प्रकारच्या खोटे खेळ आहेत. कोणाला याचना करावी जेव्हा प्राधिकृतांची श्रद्धांजलि करत असतात, तेव्हा काहीच होत नाही. तरी, माझ्या विचारानुसार, याचना म्हणजे तुमच्या राजनीतिक रिश्तेदार आणि लोकप्रियांवर खोटे घेतलेले प्रतिबंध आहे.
 
मेरे लिए यह बहुत दुखद है जब हमारे व्यापक रूप से प्रिय “दादा” अजित पवार जी का अंतिम संस्कार सम्पन्न हुआ। मैं उनकी याद में श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ। मुझे लगता है कि आज भी हमें अपने नेताओं और शासकों के प्रति सम्मान और आदर की आवश्यकता है, जैसा कि उन्होंने हमेशा हमारे लिए किया। उनकी विचारधारा और दिशा मुझे बहुत प्रभावित करती थी। मैं उनके अंतिम संस्कार सम्पन्न होने पर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करना चाहता हूँ।
 
अजीत पवार की मृत्यु से हमें यह याद dilate karta hai ki हमारे नेताओं को भी एक दिन अपना अंत बीतना ही पर्याप्त है। शायद लोग जानते nahi hain, parantu मैं aapko yah samajhna chahta hoon ki श्रद्धांजलि अर्पित karte samay humein ek baar फिर सोचना chahiye ki हम कैसे apne नेताओं की याद dilatiye. Kya humein yah padta hai ki उनकी बेटियाँ aur beparwiyon ko देखkar hi unki श्रद्धांजलि arpyi ja sakti hain? Mera khayal hai, हमारे नेताओं को सम्मान dene ke liye humein apne sansar mein parivartan laana chahiye.
 
मुझे लगता है कि इस विमान हादसे पर सरकार ने बहुत जल्दी बातचीत करनी चाहिए। दुखद घटना को मौनपूर्ण बनाए रखने से लोगों का भरोसा टूट सकता है। हमें यह जानने की जरूरत है कि विमान दुर्घटना के पीछे क्या कारण था।

कुछ लोग कहते हैं कि इस घटना से हमारी राजनीतिक प्रकृति भी प्रभावित हो सकती है। मुझे लगता है कि हमें अपने नेताओं और शासकों के प्रति सम्मान और आदर की आवश्यकता है, लेकिन हमें उन्हें जिम्मेदारी समझनी चाहिए।

अगर हम सच्चाई खोजने में विफल रहते हैं, तो यह देश के लिए हानिकारक होगा। हमें अपने नेताओं और शासकों से सवाल पूछने की जरूरत है, लेकिन उनसे जुड़ी विवादित बातचीत करने से बचना चाहिए।
 
अजित पवार की विरासत हिंदुस्तानी समाज को एक नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही, हमें याद रखना चाहिए कि नेताओं के जैसे ही उनकी मृत्यु, हमारे लिए संघर्ष और समर्थन के लिए नए नेता खोजते रहना एक गंभीर जिम्मेदारी बन जाती है **।
 
अजित पवार जी की लंबी लयांची याद मुझे खेद आहे, तो काही नाही, कारण त्यांना वाचलेला श्रोत्याने काही नव्हते. त्यांनी महाराष्ट्र राज्यात पूर्वी काळचा विकास पाहिलेला, पण तो हा काळ सुरू झाल्यावर त्यांनाच जाणून न लागला.
 
अजित पवार की मृत्यु का यह तरीका देखकर लगता है कि उनकी लंबी लयें और साथ में काम करने की आदत आज भी हमें सबक सिखाती है। लेकिन इस समारोह में शामिल नेताओं को यह सवाल उठना चाहिए कि आगे उनके विरोधियों के प्रति उनकी राजनीति और नेतृत्व की दिशा कैसे चलेगी। और यह भी तो एक सामान्य सवाल है कि आज मुख्यमंत्री बोलते समय क्या सुनिश्चित करते हैं? कि हमारे राज्य के नागरिकों की जरूरतें कहीं नहीं छूट रही हैं।
 
मेरी यादें अजीत पवार से जुड़ी हैं... मैंने उनके साथ मुंबई में एक दिन बैठकर संगीत सुनाया था, वाह! वह लंबी लयांची मुझे तो आज तक चपलता देती आहे. मेरा मन भी उस लयांची साथ डोलता है, और मैं उसकी याद दिलाता फिर.
 
अजीत पवार के अंतिम संस्कार में तो बहुत लोग जमा हुए, लेकिन जीवन में हमें खुद पर ध्यान देना चाहिए कि शायद एक दिन हम भी उनके स्थान पर बैठेंगे। हमें अपने जीवन में पवार जैसा नेतृत्व बनाने का प्रयास करना चाहिए, लेकिन अगर हम अपने देश और समाज को खुद छोड़कर तंग आबादी में फंसते हैं, तो यही हमारी कमजोरी होगी।
 
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