Ajit Pawar Plane Crash: ‘दादा मुझे आपसे शिकायत…’ अजित पवार की मौत के बाद भतीजे रोहित ने ऐसा क्यों कहा

अजित पवार की हिमांतहीन घटना के बाद भतीजे रोहित ने एक ऐसा बयान दिया है जो लोगों को आश्चर्यचकित कर रहा है। उन्होंने अपने दादाजी अजित पवार को मौत के शिकार होने पर यह कहकर त्रासदा की गहराई तक छुआ है कि वे 'दादा, आपसे मुझे आपसे शिकायत थी'। इसके साथ, उन्होंने अपने भावुक होते हुए बयान में दो शब्दों से कहा है कि जब किस्मत आपको लेने बेवक्त आ गई, तो आप उसे डांट कर क्यों नहीं भगा दिया।

रोहित ने आगे बताया कि उनके दादाजी अस्थियों को इकट्ठा करते समय ऐसा लग रहा था कि वे अभी खड़े होंगे और हमसे कहेंगे कि मैं तो तुम्हारी परीक्षा ले रहा था। यह बयान सुनकर रोहित के भावुक होने की कोई शक नहीं है, लेकिन यह सवाल उठता है कि क्या उन्होंने ऐसा कहकर अपने दादाजी को शांति और अंतिम सम्मान देने का प्रयास करना चाहते हैं या फिर यह उनकी गुस्सा और भावनाओं का परिचायक है।
 
रोहित का बयान तो मुझे थोड़ा अजीब लगा, लगता है वो अपने दादाजी से खुश न हों। क्या उन्हें पता है कि इतने शब्दों में भी खेद और शोक क्या कह देते हैं? परन्तु फिर भी यह बयान उनके दादाजी को याद दिलाता है, जिस कदर हम उन्हें याद करते हैं।
 
🤣👀😂🏃‍♂️💔 रोहित बhai तुमने अपने दादाजी को शांति और अंतिम सम्मान देने के लिए ऐसा बयान दिया है जैसे तुम्हें कोई चोट लगी है। 🤕 "दादा, आपसे मुझे आपसे शिकायत थी" 😂🙄 यह तो एक अच्छा तरीका है अपने दादाजी को शांति देने का! 🙏

🔥💀 तुम्हारा बयान सुनकर मुझे लगता है कि तुम्हें अभी भी शिकायतें नहीं हैं। 😂 "जब किस्मत आपको लेने बेवक्त आ गई, तो आप उसे डांट कर क्यों नहीं भगा दिया?" 🤔 यह तो एक अच्छा सवाल है! 🤓

😂👍 रोहित बhai तुमने अपने दादाजी को शांति और अंतिम सम्मान देने के लिए एक अच्छा तरीका ढूंढ लिया है। 👏
 
अरे, इस बयान सुनकर मुझे तो बहुत शर्मिंदगी महसूस हुई। रोहित जी ने अपने दादाजी को बिना फुसफुसाए शांति और अंतिम सम्मान दिलाने की कोशिश करने का प्रयास किया है, लेकिन उनके शब्दों में यह भावना भरी दुर्घटना की गहराई बहुत कम दिखाई देती है।

मुझे लगता है कि रोहित जी ने ऐसा बयान कहकर अपनी भावनाओं को व्यक्त करने की कोशिश की है, लेकिन इस तरह से यह बयान उनके दादाजी को शांति और अंतिम सम्मान दिलाने में मदद नहीं करेगा।

उसके अलावा, मुझे लगता है कि रोहित जी ने अपने बयान में थोड़ी देर विचलित रहकर ऐसे शब्दों का चयन किया है जो उनके दादाजी के प्रति सम्मान और शांति की भावना नहीं देते।

इस घटना के बाद, मुझे लगता है कि हमें अपने नेताओं और परिवार के सदस्यों के प्रति सम्मान और संवेदनशीलता को महत्व देना चाहिए।
 
रोहित ने ऐसा बयान दिया जो तो भावुक है, लेकिन इस बारे में सोचते समय लगता है कि वे अपनी भावनाओं को रोक नहीं पाए। उनके दादाजी की मौत पर उन्होंने बहुत ही अच्छा बयान दिया, लेकिन ऐसा बयान देने से पहले वे इस बारे में सोचते थे। त्रासदी को इतना गहराई तक छूने का यह तरीका अच्छा नहीं लग रहा है, चाहे वह उनकी भावनाओं का परिचायक हो। दादाजी की मौत पर शांति और अंतिम सम्मान देना जरूरी था, लेकिन इस तरह से यह बयान देना जरूरी नहीं था।
 
अरे यार, रोहित का बयान सुनकर मुझे लगा कि वह अपने दादाजी को बखhubलाने की कोशिश कर रहे हैं। उनका यह बयान शायद उन्हें भावनाओं से लड़ने में मदद करने के लिए बनाया गया है, लेकिन फिर भी लगता है कि रोहित को अपने गुस्से को काबू में रखने की जरूरत है। उनके दादाजी को शांति और सम्मान देने के लिए यह बयान सुनना अच्छा नहीं लगता, इसकी बजाय उन्हें अपनी भावनाओं को एक अच्छे तरीके से व्यक्त करने की जरूरत है।
 
मुझे लोगों की संवेदनशीलता को बहुत पसंद आया है रोहित पवार जी ने अपने दादाजी अजित पवार जी की मौत के बाद उनकी याद में दिए गए बयान में। वाह, यह तो एक बहुत ही मुश्किल स्थिति में भी रोहित जी ने अपना मन शांत कर लिया है। उन्होंने अपने दादाजी की याद में इस तरह का बयान दिया है कि यह तो उनकी गहराई से छू गया है।

मुझे लगता है कि रोहित जी ने अपने दादाजी को शांति और अंतिम सम्मान देने का प्रयास किया है, लेकिन यह बयान तो उनकी भावनाओं का परिचायक भी है। मुझे लगता है कि हमें अपने पूर्वजों की याद में सही तरीके से व्यवहार करना चाहिए।

मैं तो रोहित जी की बात समझने में सक्षम हुआ हूँ, लेकिन यह बयान भी हमें एक नई दिशा में ले जा रहा है। शायद इससे हमें अपने पूर्वजों के साथ सही तरीके से व्यवहार करने का निर्णय करना चाहिए।
 
रोहित का बयान सुनकर मुझे लगता है कि वह अपने दादाजी को शांति देने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन कुछ ऐसा लग रहा है जैसे उन्हें अभी भी खुशनिष्ट व्यक्ति मिल रहा है। फिर भी, उनका बयान भावुक होने का संकेत देता है, और यह दिखाता है कि वे अपने पिता की गहराई से परेशान हैं।
 
रोहित का बयान सुनकर में थोड़ा आश्चर्यचकित हूँ, लेकिन तभी मुझे लगा कि वे कुछ भी कहने की जरूरत नहीं हैं। उनके दादाजी को शांति और अंतिम सम्मान देने का तरीका सिर्फ यह नहीं है, हमें उनकी परीक्षा लेने की बात भूलनी चाहिए। 🤔
 
अरे, यह बयान सुनकर मुझे बहुत गहराई से लगा कि रोहित ने अपने दादाजी को शांति और सम्मान के साथ याद करने का प्रयास कर रहे हैं। लेकिन, दूसरी ओर यह बयान तो उनकी भावनाओं का एक पूर्ण चित्र नहीं दिखा रहा है। मुझे लगता है कि जब किस्मत आपको लेने बेवक्त आ गई, तो आप उसे खुश करो या शांति से गुजरो, यही जीवन का सबसे बड़ा संदेश है।

मैं भी अपने दादाजी को याद करता हूँ और उनकी कहानियाँ सुनाता रहता हूँ। उन्होंने मुझे बहुत सारे सबक सिखाए हैं जिनसे मेरी जिंदगी आसान बन गई है। यह बयान उन्हें याद करने का एक तरीका नहीं लग रहा, बल्कि मुझे लगता है कि रोहित ने अपनी भावनाओं को थोड़ा खुलकर व्यक्त करने की कोशिश की है।
 
Back
Top