अल-फलाह यूनिवर्सिटी की ‘सीक्रेट’ पार्किंग, आने-जाने वाली गाड़ियां किसकी: मरे लोगों की जमीन हड़पी, क्या है जवाद का तरबिया फाउंडेशन

दिल्ली में हाल ही में हुए लाल किले के स्थान पर हुए ब्लास्ट को दिल्ली ब्लास्ट कहा जाता है। इस हमले में कई लोग घायल और गायब हो गए थे। बॉम्ब विस्फोट की जांच एजेंसियों ने शुरू कर दी है और उनका पहला ब्लॉक अंजाम देने की योजना बनाने का स्थान दिल्ली में अल-फलाह यूनिवर्सिटी की बिल्डिंग नंबर 17 साबित हो रहा है।
 
ब्लास्ट की ऐसी तेजी से जांच चल रही है तो एक बात तय हो गई है - हमें अपनी सुरक्षा को लेकर और भी ध्यान देने की जरूरत है। ये हमले तब तक नहीं रुकेंगे जब हमारे पास सुरक्षा उपायों की बात करने के लिए एकजुटता न हो। यह जांच एजेंसियों को बहुत मुश्किल देने वाली बात है कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी की बिल्डिंग नंबर 17 में क्या खासियत है। हमें सुनिश्चित करने की जरूरत है कि यहां किसी भी तरह की खतरनाक गतिविधि को रोका जाए। हमारी एकता और सुरक्षा की जिम्मेदारी हम सभी की है, इसलिए आइए अपने समुदायों में बात करें और इस तरह के हमलों से निपटने के लिए एकजुट हो जाएं। 🚨💥 #सुरक्षा #एकता_है_शक्ति #दिल्लीब्लास्ट
 
ब्लास्ट के बारे में तो चिंताजनक है... दिल्ली में ऐसा कुछ कभी नहीं हुआ है, यहां किसी भी तरह की आतंकवादी गतिविधि से सावधानी बरतनी चाहिए। पुलिस और एजेंसियों को ब्लास्ट की जांच में सहयोग करना चाहिए ताकि उन्हें उस हमले के पीछे क्या सच्चाई ढूंढने में मदद मिले। अल-फलाह यूनिवर्सिटी की बिल्डिंग नंबर 17 पर स्थान देने से यह सवाल उठता है कि वहां से संचार हो सकता था या कोई ऐसी गतिविधि थी जिसे अंजाम दिया गया। इसकी जांच में ध्यान देना चाहिए ताकि इस तरह के हमलों से भविष्य में रोका जा सके। 🤔
 
बस तो यह जानकर अच्छा लगा कि सरकार ने इस हमले पर कड़ी नज़र रखी है 🤯। लाल किले के बाहर ऐसा हुआ तो फेल हो गया। अगर यह देश में ऐसा कोई और होता, तो हमारा सब कुछ बर्बाद हो जायगा 🤦‍♂️। सरकार ने अल-फलाह यूनिवर्सिटी की बिल्डिंग पर नज़र रखने का फैसला अच्छा सोचा है तो तो हमें उम्मीद है कि वहां कोई और हमला नहीं होगा। लेकिन यह एक बड़ा सवाल है, अगर उनसे जुड़े किसी भी व्यक्ति को पकड़ लिया गया, तो उन्हें सख्त दंड मिलेगा 💪
 
दिल्ली ब्लास्ट की चोट लग रही है हमारे समाज को, यह तो बहुत भयावह है 🤕। जांच एजेंसियों को अच्छी तरह से जानकारी मिलनी चाहिए ताकि वे जल्द से जल्द आतंकवादी समूह का पता लगा सकें। हमें अपने शहर की सुरक्षा के लिए एकजुट होकर काम करना चाहिए। पुलिस और अन्य एजेंसियों को अल-फलाह यूनिवर्सिटी में बिल्डिंग नंबर 17 पर नजर रखनी चाहिए ताकि अगर वे कुछ जानकारी मिलती है तो जल्दी से कार्रवाई कर सकें। हमें अपने देश की सुरक्षा के लिए एकजुट और सतर्क रहना चाहिए। #दिल्लीब्लास्ट #सुरक्षा #एकजुट
 
🤔 यह बात सच्ची है कि हमारे देश में ज्यादा से ज्यादा आतंकवादी हमले हो रहे हैं और पुलिस को उनकी तेजी से जांच करने में भी परेशानी हो रही है। लाल किले के ब्लास्ट में घायल और गायब हुए लोगों के परिवार की स्थिति कुछ नहीं समझने योग्य है 🤕। हमें उम्मीद करनी चाहिए कि पुलिस जल्दी से इस हमले का मुंह देखने में सफल हो जाएगी।
 
मुझे लगता है कि ऐसी बातों पर ध्यान देना जरूरी है, लेकिन हमें यह भी नहीं कह सकते कि दिल्ली में एक स्थान से सभी हमले होते हैं। जैसे कि कोई व्यक्ति अपने घर में ही घायल हो सकता है या गायब भी। हमें यह भी नहीं भूलना चाहिए कि दिल्ली ब्लास्ट के पीछे कौन सा मकसद था, यह तो समझना जरूरी है। लेकिन अगर हम उस स्थान पर एकत्रित हुए सभी हमलों को देखें, तो अल-फलाह यूनिवर्सिटी की बिल्डिंग नंबर 17 पर ज्यादातर ध्यान दिया जा रहा है।
 
वाह दिल्ली ब्लास्ट, यह तो बहुत बड़ा आतंकवादी हमला हुआ। लेकिन तीन-चार दिनों में पुलिस और एजेंसियों के सहयोग से पहला ब्लॉक अंजाम देने की योजना बनाने का स्थान यह तो अल-फलाह यूनिवर्सिटी की बिल्डिंग नंबर 17 ही नहीं रह जाता। इसमें सरकार और पुलिस को भी अपना मुख्य खेल बदलना पड़ेगा, न कि हमले से पहले सिर्फ खोज करना।
 
बॉम्ब विस्फोट की जांच करने की एजेंसियों का यह टिप्पणी पर ध्यान देना चाहिए, लेकिन मुझे लगता है कि उनकी रणनीति में थोड़ा कमजोरी है। अगर अल-फलाह यूनिवर्सिटी की बिल्डिंग नंबर 17 वास्तव में ब्लास्ट का स्थान था, तो क्यों उन्होंने पहले नहीं जांचा? और अगर यह जगह साबित होती है, तो क्यों एजेंसियों ने ऐसा नहीं किया?

मुझे लगता है कि जांच में थोड़ा समय लेना पड़ेगा, और उन्हें पहले से ही सब कुछ साबित करने की जरूरत है। अगर वास्तव में बिल्डिंग नंबर 17 जिम्मेदार है, तो उस पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए, लेकिन अगर यह जगह नहीं है, तो उन्हें पहले से ही सब कुछ गलत होने की जांच कर लेनी चाहिए।
 
मुझे यह कहीं नहीं लग रहा कि अगर पुलिस ने पहले से ही उस जगह पर छापा मार दिया होता, तो इस तरह के हमले नहीं होते। लेकिन फिर भी, इसकी जांच एजेंसियों को पता चलना चाहिए कि यह अल-फलाह यूनिवर्सिटी में से कहीं और से आया था, न कि वहाँ ही से। मुझे लगता है कि अगर उन्होंने पूरी जांच की, तो पता चलेगा कि यह हमला तो किसान आंदोलन की जैसी चाल पर गया था।
 
बड़ा दुखदी, भारतीय पुलिस की बात से लगता है जांच कैसे जल्द कर लेगी। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि घायल लोगों की तेजी से देखभाल की जाए, उनके परिवारों को सहारा मिले। यानी, हमें सभी के प्रति सहानुभूति रखी हो और उन्हें जरूरत हो तो मदद के लिए काम करना ही ज़रूरी है।
 
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