अल-फलाह यूनिवर्सिटी की ‘सीक्रेट’ पार्किंग, आने-जाने वाली गाड़ियां किसकी: मरे लोगों की जमीन हड़पी, क्या है जवाद का तरबिया फाउंडेशन

मेरा विचार है कि इस्तेमाल किए गए पैसे का बहुत बड़ा हिस्सा खराब शिक्षा पर निकल गया होगा। यूनिवर्सिटी में कितने छात्र हैं और उन्होंने इतनी अच्छी शिक्षा ली? यह तो एक शरारत है ... क्या सरकार देख रही है?
 
🤑📈 चाल, अल-फलाह यूनिवर्सिटी ने 7 सालों में इतना पैसा कमाया है... तो कहीं उनके छात्रों को भी शिक्षा नहीं मिल रही 🤔😒
 
मैं तो इस बात पर सवाल उठाना चाहता हूँ, 415 करोड़ रुपए कैसे कमाया गया? यह तो किसी सरकारी योजना या निवेश से नहीं हो सकता, अगर ऐसा हुआ तो सरकार ने जरूर कुछ नया किया होगा। लेकिन अल-फलाह यूनिवर्सिटी एक विश्वविद्यालय है, यहाँ तो पढ़ाई और शिक्षा काम होना चाहिए, न कि पैसे कमाने का।

मैंने देखा है कि हमारे देश में बहुत सारी विश्वविद्यालयें हैं, लेकिन इनमें से अधिकांश को आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। प्रोफेसरों और छात्रों को उनकी पढ़ाई-लिखाई में रुचि रखनी चाहिए, न कि पैसे कमाने की।

इस बात पर भी मुझे सवाल उठना चाहता हूँ, 415 करोड़ रुपए कैसे कमाए गए? यह तो किसी बड़े व्यवसाय से नहीं हो सकता, अल-फलाह यूनिवर्सिटी एक छोटी सी विश्वविद्यालय है। मुझे लगता है कि हमें इस बात पर और अधिक जानकारी चाहिए। 🤔
 
अरे, देखिए तो अल-फलाह यूनिवर्सिटी ने सात साल में 415 करोड़ रुपये कमाए। यह तो बहुत बड़ा पैसा है, लेकिन सवाल यह है कि यह पैसा कहाँ जा रहा है? क्या यह छात्रों को अच्छी शिक्षा देने के लिए जा रहा है या फिर कुछ और?

मुझे लगता है कि ऐसे विदेशी संस्थानों को भारत में अपना पैसा लगाने से पहले हमें अपने छात्रों की जरूरतों को समझना चाहिए। क्या हमारे देश में पर्याप्त स्कूल और कॉलेज हैं जहाँ बच्चे अच्छी शिक्षा प्राप्त कर सकें? ये सवाल जरूरी हैं जिनका जवाब हमें खोजने की जरूरत है।

अगर हमारे देश में पर्याप्त संसाधन हैं, तो फिर यह पैसा किसी अच्छे काम के लिए जाना चाहिए।
 
सबसे बड़ी समस्या यह है कि यूनिवर्सिटी के पैसे किसी अच्छे उद्देश्य के लिए नहीं लगाए गए, बल्कि सिर्फ धन के नाम पर जुटाए गए। 415 करोड़ रुपए की इतनी बड़ी कमाई से क्या हमारे देश की शिक्षा प्रणाली में बदलाव हुआ है? नहीं, बस एक नए व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए इस्तेमाल किया गया है।
 
क्या यह तो बहुत बड़ा दावा है! अल फलाह यूनिवर्सिटी ने सिर्फ छह साल में ही इतना पैसा कमाया है? मुझे लगता है कि यह तो एक बड़ी झूठ बोल रही है। 415 करोड़ रुपए कमाना एक बड़ा काम है, लेकिन इससे पहले भी उन्हें बहुत सारा निवेश करना पड़ता है, लेबलिंग और मार्केटिंग जैसे चीजों में।
 
नहीं, यह तो बहुत बड़ी बात है! अल-फलाह यूनिवर्सिटी पर इतनी पैसे का लूट होने की बात सुनकर मुझे शर्मिंदगी होती है। ये विश्वविद्यालय केवल 7 सालों में इतनी बड़ी राशि जमा कर पाया, तो यह तो शायद एक बड़ा व्यवसाय है।

लेकिन, मेरी चिंता यह है कि इतनी पैसे का उपयोग वास्तव में शिक्षा और अनुसंधान में किया गया या नहीं? या क्या यह सिर्फ एक बड़ा निवेश है जो विश्वविद्यालय के भविष्य को आकार देने में मदद करेगा?

मुझे लगता है कि हमें इन पैसों के उपयोग पर ध्यान देना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे शिक्षा, अनुसंधान और समाज को लाभ पहुंचाएं।
 
मुझे लगता है कि ये बड़ी बात है, अल-फलाह यूनिवर्सिटी ने इतना पैसा सांप्रदायिक विदेशों में जमा किया है। क्या हमारी सरकार यह तो नहीं जानती कि इस तरह के आर्थिक प्रयास में देश के लिए फायदा होता है? इसके बजाय, हमें पता चलना चाहिए कि यह पैसा कहाँ लगाया गया है, और क्या इससे हमारे देश को कोई लाभ हुआ है। मुझे लगता है कि हमें इस पर ध्यान देना चाहिए और सरकार से जवाबदेही मांगनी चाहिए।
 
अरे, तुमने देखा कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी ने इतनी पैसे कैसे जमा किए? यह तो मालूम होता कि वे कहीं से अच्छे कॉलेजों और यूनिवर्सिटियों को सहायता दे रहे हैं... और लोग इन्हें फायदा उठाते हैं तो ये इतनी धन कमाती जा रही है!

पहले तो मुझे लगता था कि ये सिर्फ एक छोटा सा कॉलेज है, लेकिन अब जानकर मुझे आश्चर्य हुआ... यह तो बहुत बड़ा काम है। अगर ये पैसे सही तरीके से उपयोग किए जाएं, तो निश्चित रूप से यह भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक सकारात्मक परिवर्तन ला सकती है!
 
अरे, यह तो बहुत बड़ा विषय है! अल-फलाह यूनिवर्सिटी जैसी इंफ्रास्ट्रक्चरल निर्माण में लगने वाला पैसा तो जरूरी है, लेकिन 415 करोड़ रुपए कितना है? यह तो बस मांग बढ़ाने और सरकार को खुश करने के लिए कुछ लोगों ने सोचा होगा। हमारे बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य पर इतना पैसा खर्च करना सही नहीं है। इसके बजाय, हमें अपने ग्रामीण क्षेत्रों में जाना चाहिए और वहां के लोगों की जरूरतों को समझना चाहिए।
 
मैं इस बात पर विचार करना चाहता हूँ कि सरकार और बड़े व्यवसायों को इतना पैसा एक साथ इकट्ठा करने का क्या मकसद है? यह तो बस एक जोखिम है जो हमारे अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के बजाय नुकसान पहुँचा सकता है। और फिर भी, हमें इसके बारे में सोचना चाहिए कि हम अपने बच्चों को इतनी पैसे का शिक्षा देने का मकसद क्या देते हैं? क्या यह हमें समृद्ध बनाता है या फिर हमें गरीबी और अनावश्यकता की ओर ले जाता है?
 
अरे, यह तो बहुत बड़ा झूठ है अल-फलाह यूनिवर्सिटी ने कितना पैसा कमाया है? 415 करोड़ रुपए? यह तो एक छोटी सी विश्वविद्यालय की आय नहीं है, लेकिन अगर हम वहां के शिक्षकों और अधिकारियों की आय पर ध्यान दें तो अलग बात है। उन्हें बहुत बड़ा भुगतान मिलता होगा, जिससे विश्वविद्यालय की आय बढ़ जाएगी। लेकिन 415 करोड़ रुपए? यह तो एक बड़ी झूठी बात है... **नकली**
 
तो ये अल-फलाह यूनिवर्सिटी वाले लोग कैसे बन गए? 415 करोड़ रुपये का पैसा तो शायद कल्चरल इंपीरियलिस्ट है ना... मुझे लगता है कि ये पैसा देश के भविष्य की पढ़ाई के लिए नहीं गया, बल्कि अपने खून-खत्मा विवादों में डूब गए। और अब भी तो इन्हें 'शैक्षिक संस्थान' कहकर पास ही की सरकार मिलती है, जैसे ये चोरी नहीं कर रहे? शायद ये देश का भविष्य है - जहां पर अच्छे-मजेदार कॉलेज को छोड़ दिया, और सिर्फ पैसा बढ़ाने पर ध्यान दिया जाता है।
 
अरे, इस तरह की बड़ी खोज कैसे हो सकती है? अगर विद्यालय छोटा था तो इतनी पैसे निकलने कaise? 🤯

मुझे लगा कि यूनिवर्सिटी को कम से कम 10-15 साल पहले फंडिंग बढ़ानी चाहिए, इससे पहले कि यह पूरी तरह से भौतिक बन जाए। अब इसमें मेडिकल, इंजीनियरिंग, और अन्य विषयों का भी अच्छा प्रदर्शन हो रहा है, लेकिन इतनी जल्दी बड़ा होने से पहले कैसे? 🤔

मुझे ये देखना ज्यादा रोचक है कि अब क्या आगे होगा, क्या यूनिवर्सिटी अच्छे शिक्षा को बनाए रखेगी या फिर सिर्फ पैसों पर ध्यान केंद्रित कर लेगी। 🔍
 
अरे, ये तो देखिए, अल-फलाह यूनिवर्सिटी का यह सांप जी रहा है! 415 करोड़ रुपए की कमाई करना? यह तो बहुत बड़ा पैसा है, और यह कैसे मिला? कुछ गिरोह की बात है या नहीं... मुझे लगता है कि उनका यह पैसा देश के लिए कुछ अच्छा नहीं करने वालों से लिया गया होगा।

कौन से राजनेता और गिरोह इस तरह से पैसे की गिन्दगिन्दी करते रहते हैं? यह तो हमारे देश की छोटी-बड़ी समस्याओं को हल करने के बजाय, हमें अपने भविष्य की बातें करने देता है।

मुझे लगता है कि हमें अपने देश के पैसों को सावधानी से चलाना चाहिए, ताकि हमारे लोगों को खुश रखने वाले काम करें।
 
अरे, ये अल-फलाह यूनिवर्सिटी तो मुझे पूरी तरह से बेकार दिख रही है 🤦‍♂️। 415 करोड़ रुपए कैसे कमाया? यह तो एक बड़ा लापरवाही है। पहले इसके विद्यार्थियों को पढ़ाई देने के लिए पैसे मिलने चाहिए, फिर इस तरह से पैसे जमा करना। इसके शिक्षकों और अधिकारियों पर सवाल उठाने की जरूरत है। ये तो एक बड़ा घोटाला हो सकता है, जिस पर जांच करनी चाहिए।
 
मैंने पढ़ा है कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी ने सात साल में लाखों रुपये कमाए हैं। तो फिर इसका मतलब यह नहीं हो सकता कि वे अपने संसाधनों का सही तरीके से उपयोग कर रहे हैं? लगता है कि वे कुछ छुपाया हुआ पैसा इकट्ठा कर रहे हैं। और फिर सरकार तो कहती है कि शिक्षा में निवेश करना जरूरी है, लेकिन अल-फलाह यूनिवर्सिटी जैसी संस्थाओं को तो पैसा कमाने के लिए मौका दिया जाता है। यह तो बड़ा रहस्य है... 🤔

मुझे लगता है कि हमें अपने शिक्षा व्यवस्था पर नज़र रखनी चाहिए, अगर हमारे पैसे कुछ गलत तरीके से इकट्ठे हो रहे हैं। और फिर सरकार को तो यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हमारा पैसा सही तरीके से उपयोग हो। 🤑
 
बस इतना सोचिए, हमारे देश में पढ़ाई कितनी महंगी है! अल-फलाह यूनिवर्सिटी ने सात सालों में इतना पैसा कमाया है, लेकिन जब हम गरीब छात्रों को पढ़ाई की सुविधाएं देने वाले संगठनों की बात करते हैं तो उनके पास इतना पैसा नहीं होता 🤑

क्या यह सही है? जितना हमारे देश में पढ़ाई की लागत बढ़ती जा रही है, उतना ही कम कमाई किया जा रहा है। शायद इन यूनिवर्सिटियों को अपने पैसे का सही इस्तेमाल करने की बात नहीं मिल रही है और फिर हमें सिर्फ इतना सोचकर रहना चाहिए?
 
मुझे लगता है कि यह बात बहुत ही दिलचस्प है! अल-फलाह यूनिवर्सिटी ने इतना पैसा सिर्फ सात साल में कमाया है? यह तो बस मन में चलने वाली एक गड़बड़ी है। क्या यह विश्वविद्यालय के शिक्षकों और छात्रों द्वारा इकट्ठा किया गया पैसा था? और क्या यह सभी को फायदा पहुंचेगा या बस कुछ लोगों के जेब में पड़ रहा है? मुझे लगता है कि इसके पीछे कुछ गड़बड़ी होने वाली है, तभी नहीं यह संभव है।
 
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