अटारी बॉर्डर पर रिट्रीट सेरेमनी: पाक सैनिकों को ललकारते दिखे भारतीय जवान, आर्मी डॉग और बच्चों के करतब; न गेट खुले न मिठाई बंटी - Amritsar News

अटारी बॉर्डर पर रिट्रीट सेरेमनी में जवानों ने अपना दिखावा दिखाया। उन्होंने बाइक पर पिरामिड बनाकर और अलग-अलग स्टंट करते हुए लोगों को झूला दिया। उनके साथ ही युवक-युवतियों ने ढोल पर भांगड़ा किया, जिससे जमकर हूटिंग हुई।

इस बार ऑपरेशन सिंदूर के चलते दोनों देशों ने बॉर्डर पर न गेट खुले न मिठाई बांटी। लेकिन लोगों ने यह सुनिश्चित कर लिया कि राष्ट्रीय ध्वज ऊंचाई पर हो।

बीएसएफ के जवानों ने भी इस कार्यक्रम में भाग लिया। उन्होंने अपने जोश और अनुशासन के साथ परेड की। इससे पहले, निहंगों ने भी यहां करतब दिखाए। दर्शकों को बहुत खुशी हुई।

यहां बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर उम्र के लोग जोश और उत्साह के साथ कार्यक्रम देखते दिखे। सूर्यास्त के साथ राष्ट्रीय ध्वज को सम्मानपूर्वक उतारा गया, जिसके बाद रिट्रीट सेरेमनी का समापन हुआ।
 
बड़ा मजा आया देखा गया। लोगों ने एक साथ मिलकर बहुत जोश और उत्साह के साथ कार्यक्रम किया। यह जरूरी है कि हम अपने पास आने वाले राष्ट्रीय अवसरों पर इसी तरह तैयारी करें। पुलिस और निहंगों को भी बहुत बहादुरी की ताकत मिली। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सबको जोश और उत्साह के साथ मनोरंजन मिला।
 
आपको लगता है कि यह विडंबना कैसे हुई कि जवान खेलते हुए झूले देते हैं और फिर हाथ जोड़कर राष्ट्रीय ध्वज ऊंचाई पर लटकाते हैं? ये कैसे सम्मान है? मुझे लगता है कि यह सब तो बहुत ही रचनीतिक है, लेकिन क्या यह हमारे जवानों के सच्चे आत्मसमर्पण को दर्शाता है? मैं सोचता हूं कि इसके पीछे कुछ और भी मायने हैं।

मुझे लगता है कि हमें अपने देश के बारे में और जानने की जरूरत है, क्योंकि यह कैसे एक व्यक्ति को देशभक्ति की भावना से भरता है?
 
Wow 🤩, यह कार्यक्रम सचमुच मजेदार था। मैंने देखा तो जवानों ने अपने जोश को लेकर पूरे बॉर्डर पर चला गया, बाइक पर पिरामिड बनाकर और ढोल पर भांगड़ा कर के लोगों को हंसाया। यह सुनिश्चित करने में सफल रहे कि राष्ट्रीय ध्वज ऊंचाई पर हो। 🇮🇳
 
यह तो बहुत ही अजीब है कि जवानों ने बाइक पर पिरामिड बनाकर और लोगों को झूला दिया। मुझे लगता है कि यह सब थोड़ा ज्यादा है, नहीं तो अच्छा होता। राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान की बात में न हो। और ढोल पर भांगड़ा करना भी बहुत सुनहरा नहीं लगता। लोगों को ऐसा करने क्यों दिलाते हैं? 🤔🚫
 
यह तो वाह कुछ मजाक है 🤣 ये जवान लोग एक बार फिर से दिखाए कि वे न सिर्फ सेना में हैं बल्कि वे भी नृत्य और जोश की खूबियों में महारत रखते हैं। पिरामिड बनाकर बाइक पर सवारी करना तो अच्छा है लेकिन ढोल पर भांगड़ा करना थोड़ा ज्यादा हो गया 🤪 और लोगों को झूला देना तो एक दिन सेना का जवाबी कार्यक्रम हो सकता है 😂

लेकिन यह तो अच्छा है कि हर उम्र के लोग इस कार्यक्रम में जोश और उत्साह के साथ शामिल हुए। बच्चे भी खेलते दिख रहे थे, बुजुर्ग भी पटाखों की आवाज सुनकर खुश हुए थे। यह तो हमारी सेना की भावनात्मक गहराई की बात है 💖
 
🚨 यह तो एक खूबसूरत दृश्य था! मैंने सूर्यास्त के समय जब राष्ट्रीय ध्वज ऊंचाई पर होता था, मेरे दिल में बहुत खुशी और गर्व की बातें आईं। यह तो दिखावा नहीं था, बल्कि सच्चा प्यार और सम्मान का प्रदर्शन था। और जब निहंगों ने अपने करतब दिखाए, मैंने सोचा कि यह तो हमारी देशभक्ति का एक हिस्सा है। लेकिन मुझे लगता है कि अगर ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जमकर हूटिंग हुई, तो भी यह प्रदर्शन ज्यादा खास था। मैंने देखा कि युवक-युवतियों ने ढोल पर भांगड़ा किया, और लोगों ने हंसने से रुककर स्टंट को देखने लगे। यह तो एक अच्छा संदेश था - हमें अपनी देशभक्ति में खुशी और उत्साह के साथ जीना चाहिए।
 
मुझे लगता है कि ये सरप्राइज थोड़ा अधिक था। मैं समझता हूँ कि जवानों को दिखावा देने का अवसर मिलना अच्छा है, लेकिन इतनी ज्यादा स्टंट करने से? मुझे लगता है कि बच्चों और बुजुर्गों को भी यह देखना थोड़ा असहज लगा। क्या इसे एक पारंपरिक रीति-रिवाज के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए? और इतनी ज्यादा मिठाई बांटने से क्या हमें उम्मीद है? 😐
 
इस ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत और पाकिस्तान के लोगों ने एक-दूसरे के साथ खुशियां मनाईं, फिर भी हमें अभी भी बहुत बातें करनी हैं। मुझे लगता है कि दोनों देशों को अपने जवानों की बधाई देनी चाहिए और उनके योगदान को सम्मानित करना चाहिए। लेकिन हमें यह भी समझना होगा कि आतंकवाद की समस्या पर काम करना जारी रखना बहुत जरूरी है। मुझे लगता है कि हमें अपने देशों को मजबूत बनाने के लिए एक साथ मिलकर काम करना चाहिए, न कि एक-दूसरे के खिलाफ। 🙏
 
बुराई नहीं है, दोस्त! जवानों ने अपना खेल खेला और लोगों को मुस्कराया। ऑपरेशन सिंदूर तो भारत की जीत का प्रतीक है 🙌, और राष्ट्रीय ध्वज ऊंचाई पर होने से अच्छा लगता है। लेकिन यह जरूरी नहीं कि जवानों ने इतनी बिल्कुल मजाक में खेला था। उनका सहभागिता भी उनकी जिम्मेदारियों और देशभक्ति को दर्शाता है 💪। सुनिश्चित है, यह रिट्रीट सेरेमनी बहुत ही खुशियों के साथ खत्म हुई।
 
अगर ऑपरेशन सिंदूर तो कुछ अच्छा दिख रहा था लेकिन यह सब झगड़ा और हंसी में खल्लार गया। लोगों ने राष्ट्रीय ध्वज ऊंचाई पर रखने का जोश बहुत ही अच्छा दिखाया, फिर भी ये स्थिति कुछ अजीब लग रही थी।
कोई पैरामिड बनाकर बाइक पर सवारी, कोई ढोल पर भांगड़ा कर रेलवे स्टेशन में घूमना-फरना यह सब बहुत ही मजेदार लग रहा था। लेकिन ऑपरेशन सिंदूर को लेकर तो सरकार ने बहुत सावधानी बरतनी चाहिए।
 
बड़ा भाग्य है जैसे लोगों ने ये प्रतिबद्धता दिखाई । युवाओं में एक नई ऊर्जा हो रही है, लेकिन हमें यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि वे अपनी ऊर्जा को सही दिशा में लगाएं 🤝। इससे पहले, बाइक पर पिरामिड बनाकर और ढोल पर भांगड़ा करने की गलत-घलत करना भूल जाएं, लेकिन खुशियों को कभी नहीं छोड़ें, खुशियों में खुशियाँ! 😊
 
अगर मैं तय कर दूं कि कैसे ऑपरेशन सिंदूर के बाद दोनों देशों ने बॉर्डर पर खुशियां मनाईं, तो मुझे लगता है कि यह बहुत अच्छी बात है। लोग अपने जोश और उत्साह के साथ एक-दूसरे के साथ मिलकर सम्मानपूर्वक राष्ट्रीय ध्वज को उतारा गया। मुझे लगता है कि बच्चों की भागीदारी ने यह कार्यक्रम और भी खास बनाया।
 
बिल्कुल सही, ये जवानों का दिखावा बहुत अच्छा लगा। मुझे खेद है कि वे इतने खतरनाक काम करते हैं। लेकिन यह तो उनकी सेवा करने की ईमानदारी को दर्शाता है। मैं उन्हें बधाई देता हूँ।
 
🤦‍♂️ यार, ये ऑपरेशन सिंदूर का स्टंट तो देखकर मुस्कराया। लेकिन फिर तो ये बातें निकाल देती हैं कि हम सब इतने खुश और जोशीले तो क्यों होते हैं। 🤷‍♂️ सारे जवान रिट्रीट सेरेमनी में बाइक पर पिरामिड बनाकर और ढोल पर भांगड़ा कर रहे थे, लेकिन कोई सोचता है कि ये सब कैसे चलेगा? 🤯

और फिर वाह, ये जोश और उत्साह तो बिल्कुल सही मायने में नहीं आ रहा। हमारा जवान शहीद हुए, लेकिन यहां तो युवाओं के स्टंट और खुशियों की बात कर रहे हैं। 😔 ये तो देशभक्ति का सही अर्थ नहीं समझा।
 
बिल्कुल सही था इस ऑपरेशन सिंदूर की में भारत और पाकिस्तान के बीच शांति बनी हुई, लेकिन इतनी शांति में तो कुछ भी नहीं हुआ? ये रिट्रीट सेरेमनी तो थोड़ी दूर से देख कर भी मजेदार लग रहा था। बच्चों ने जोश और उत्साह के साथ दिखाया, लेकिन इतनी दूर से बाइक पर पिरामिड बनाकर झूला देना थोड़ा असहज लग रहा था।

मैं समझता हूं, ये ऑपरेशन सिंदूर एक बड़ी मेहनत का परिणाम था, लेकिन इतनी शांति के बाद तो एक-दूसरे से मिलने और हंसने का मौका भी नहीं मिला। लेकिन यह जोश और उत्साह देखने लायक था और मैं समझता हूं कि राष्ट्रीय ध्वज ऊंचाई पर होना एक बड़ा सम्मान था।
 
🤣 ये जवान तो पूरा खेल खेलते हैं बाइक पर पिरामिड बनाकर और लोगों को झूला देते हैं... मुझे लगता है कि वे लोग एक्सिडेंट की भी सुनिश्चित करते हैं नहीं? 😂

लेकिन मुझे लगता है कि यह सब कुछ नशीले पदार्थों की बात कर रहा है, ढोल पर भांगड़ा करना तो एक और गंभीर मुद्दा है। क्या यह सेरेमनी वास्तव में राष्ट्रीय ध्वज की सम्मानपूर्वक जुलूस था या नहीं? 🤔
 
भाई-भनीजो, यह ऑपरेशन सिंदूर की बात करें तो बहुत ही खुशियों की लहर आ गई! दोनों देशों ने एक दूसरे के प्रति इतना शांत और सम्मानपूर्वक व्यवहार किया, यह देखकर मुझे बहुत गर्व हुआ। कौन सी बात भाई, लोगों ने राष्ट्रीय ध्वज ऊंचाई पर रखने के लिए इतना जोश और उत्साह किया? यह तो एक बहुत बड़ा प्रमाण है कि हम दोनों देशों में शांति और समझ की भावना बढ़ गई है।
 
मुझे तो ये देखकर खुशी हुई कि जवानों ने रिट्रीट सेरेमनी में इतनी मजेदारी की। वे बाइक पर पिरामिड बनाकर और लोगों को झूला देने की क्या बात थी? :p

मुझे लगता है कि यह रिट्रीट सेरेमनी में कुछ अलग हुआ, जैसे कि ऑपरेशन सिंदूर के चलते दोनों देशों ने बॉर्डर पर नहीं मिठाई बांटी। लेकिन फिर भी लोगों ने राष्ट्रीय ध्वज ऊंचाई पर रखना सुनिश्चित कर लिया।

मैंने हाल ही में अपने दोस्त को सूर्यास्त के समय सूर्य को देखने की बात कही थी, लेकिन वह नहीं माना। अब मुझे लगता है कि वे सही थे।

मैं रिट्रीट सेरेमनी में निहंगों और जवानों के कार्यक्रम को बहुत पसंद करता। मुझे लगता है कि यह देश भर में लोगों को एक-दूसरे के प्रति जुड़ने का मौका देता है।
 
ਅਤੀਤ ਦੇ ਸੰਘਰਸ਼ ਵਿੱਚ ਬਹੁਤ ਕਮ ਕੀਤਾ ਗਿਆ ਹੈ, ਪਰ ਅੱਜ ਯੁਵਾਂ ਦੇ ਜੋਸ਼ ਨਾਲ ਖਿਲਾਫ਼ ਸੰਘਰਸ਼ ਕੀਤਾ ਗਿਆ। ਬੈਕਲੌਥ ਦੇ ਜੁਟ ਹੋਣ 'ਤੇ ਨਿਮਾਰਧਨ ਸ਼ਬਦ ਵਿੱਚ ਅੱਗੇ ਵਧਣ ਲਈ ਪੁਕਾਰ ਦਿੱਤੀ।
 
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