‘औरतें कभी लीडर नहीं होंगी, शरिया लागू होगा’: हिफाजत-ए-इस्लाम के लीडर बोले- जमात इस्लामिक शासन नहीं लाई तो उससे भी लड़ेंगे

बांग्लादेश में हो रहे चुनावों में, एक बड़े इस्लामिक संगठन, हिफाजत-ए-इस्लाम के नेता, अजीज-उल-हक ने कहा है कि अगर बांग्लादेश में इस्लामिक शासन नहीं लाई जाती, तो हम उनके खिलाफ लड़ेंगे।

अजिज़-उल-हक ने बताया कि हिफाजत-ए-इस्लाम बांग्लादेश का सबसे बड़ा इस्लामिक संगठन है, जो देश में इस्लाम की शिक्षा देता है। पूरे देश में हिफाजत के मदरसे हैं।

बांग्लादेश की सरकार ने 2013 में महिलाओं की सैलरी में बढ़ोतरी करने की मांग पर विचार किया था। यह मांग हिफाजत-ए-इस्लाम की थी। इस साल बांग्लादेश में चुनाव होने हैं।

चुनावों में, बांग्लादेश को बांटने की कोशिश की जा रही है। यहीं पर हिफाजत-ए-इस्लाम की भूमिका क्या होगी, इस पर अजिज़-उल-हक ने बताया।

अजिज़-उल-हक ने कहा, 'हम देश को इस्लामिक शासन बनाने में मदद करने के लिए तैयार हैं।'

इस बीच, बांग्लादेश में चुनावों से पहले भारत सरकार की ओर से प्रेस विज्ञप्ति जारी किया गया है। इसमें कहा गया है कि भारत और बांग्लादेश के बीच हाल के घटनाक्रमों ने दोस्ती को कठिन बना दिया है, लेकिन भारत सरकार इस स्थिति को पनाह करने के लिए तैयार है।
 
मैंने पढ़ा है बांग्लादेश में चुनाव, और हिफाजत-ए-इस्लाम का बोल बोलने वाला अजिज़-उल-हक तो बहुत ही खतरनाक लग रहा है। 😱 वह कह रहा है अगर इस्लामिक शासन नहीं लिया जाता, तो वो लड़ेंगे। लड़ने के लिए? किस काम के? मुझे लगता है उन्हें सिखों की गलाटी पर घूमने निकलनी चाहिए।

मैं नहीं समझ सकता कि क्यों पूरा देश इस तरह फूट गया। 🤔 मेरे अनुसार, अगर बांग्लादेश विकसित होना चाहता है, तो उन्हें अपने आप में जिम्मेदारी लेनी चाहिए। और सरकार को अच्छी तरह से चलाना चाहिए।

मैं दोस्तों से पूछता हूँ, आपको लगता है कि बांग्लादेश में इसलामिक शासन की जरूरत है? या फिर विकसित देशों जैसा चलना चाहिए? 🤝
 
बांग्लादेश में ऐसी बातें कैसे कही जा सकती हैं? यह तो बहुत खतरनाक है! अजिज़-उल-हक जी से यह पूछना चाहिए कि अगर बांग्लादेश में इस्लामिक शासन नहीं लाई जाती, तो क्या उनकी सरकार खत्म कर देगी।

बच्चों को भी हिफाजत-ए-इस्लाम के मदरसों में पढ़ाया जाता है, इसीलिए यह बिल्कुल सही नहीं है। और अगर वे चुनावों में ऐसा कह रहे हैं तो उन्हें सोच लेना चाहिए कि इससे देश को क्या फायदा होगा।

बांग्लादेश सरकार ने महिलाओं की सैलरी में बढ़ोतरी करने की मांग पर विचार किया था, लेकिन अजिज़-उल-हक जी कह रहे हैं कि अगर इस्लामिक शासन नहीं लाई जाती, तो वे लड़ेंगे। यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है।

आजकल युवाओं को जागरूक करना चाहिए, उन्हें सोच लेना चाहिए कि अपने भविष्य कैसे बनाएंगे। यह तो हमारी जिम्मेदारी है।
 
अगर बांग्लादेश में इस्लामिक शासन लाई जाती, तो यह देश की तरक्की पर कितना नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, इस बात को अजिज़-उल-हक ने नहीं बताया। उनकी बात सुनकर लगता है कि अगर उन्हें अपना तरीका चलाने का मौका मिल जाए, तो वे देश को पूरी तरह से इस्लामिक बना देंगे। यह बहुत चिंताजनक है।
 
अरे, ये बात बहुत चिंताजनक है! 🤔 बांग्लादेश में ऐसा देखकर लगता है कि देश की Zukunft बहुत अस्थिर हो रही है।

हिफाजत-ए-इस्लाम जैसे संगठनों की भूमिका पर विचार करना जरूरी है, लेकिन यह नहीं कहा जा सकता कि ये संगठन देश की समस्याओं का समाधान करेंगे।

चुनावों में ऐसा माहौल बनाया जा रहा है जैसे कि देश को बांटा जा रहा है। यह बहुत खतरनाक है, हमें सोच-समझकर अपनी सरकार बनानी चाहिए।

हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि वोट मारने, डराने की और बातों की पोल ना खेलनी चाहिए।

देश को एक सामाजिक समृद्धि की दिशा में बढ़ने की जरूरत है, जैसे कि महिलाओं के लिए न्याय, शिक्षा, स्वास्थ्य के विकल्प बढ़ाने।

हमें अपने देश को एक साथ बांधने का प्रयास करना चाहिए।
 
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