अयोध्या हनुमानगढ़ी के संत को जिंदा जलाने की कोशिश: महेश दास बोले- आधी रात बिस्तर पर जलती आग फेंकी - Ayodhya News

अयोध्या में हनुमान गढ़ी के संत महेश दास पर जिंदा जलाने की कोशिश हुई थी, लेकिन उनकी मदद से उन्होंने आग से बचा लिया। संत महेश दास ने बताया, "रात 2:45 बजे, जब मैं अपने कमरे में बिस्तर पर सो रहा था, तो अज्ञात लोगों ने आश्रम की जाली काटकर ज्वलनशील पदार्थ फेंक दिया और भाग गए।"

संत महेश दास ने बताया कि जब आग लग गई, तो वह जमीन पर ही सो रहे थे, लेकिन जब उन्हें पता चला कि आग लग गई है, तो वे भागकर अपनी जान बचाने की कोशिश करते हुए शोर मचाया। उनके शिष्यों ने जल्द ही आग बुझा दी, लेकिन तब तक कमरे में रखे सारे सामान जलकर राख हो गए थे।

उन्होंने बताया, "आग लगने के बाद, जब पुलिस को फोन किया गया, तो उन्होंने आग बुझाने की मेरी मदद की, और मैंने भी अपने आश्रम में आग लगने के मामले की जानकारी दी।"

संत महेश दास ने आरोप लगाया है कि बसंतिया पट्टी के महंत रामचरण दास उनके खिलाफ साजिश रच रहे हैं। उन्होंने बताया, "उनकी सह पर हनुमानगढ़ी से निष्कासित संत लड्डू दास, मन्नू दास, मणिराम दास, ममता देवी, नीतू देवी, खुशबू और शिवानी मेरे खिलाफ आए दिन षड्यंत्र करते रहते हैं। यहां तक कि दुष्कर्म जैसे अपराध में भी मुझे फंसाने की साजिश पहले रच चुके हैं।"

उन्होंने बताया, "बसंतिया पट्टी के महंत ने दो साल से हनुमानगढ़ी से मिलने वाली सभी सहायता बंद कर दी है। यहां तक कि दान पात्र में मिले रुपए भी ले लिए हैं, जिसमें करीब दो करोड़ रुपए की धांधली की गई है।"

संत महेश दास ने बताया, "आश्रम की संपत्ति पर कब्जाने के मुझे मारने की साजिश की जा रही है।"

उन्होंने बताया, "मैंने 1661 घंटों में एक करोड़ 51 लाख बार कपालभाति प्राणायाम के स्ट्रोक लगाए हैं। यह रिकॉर्ड गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज है।"

संत महेश दास ने बताया, "महेश योगी का गद्दी को लेकर आश्रम के कुछ लोगों से विवाद चल रहा है। आशंका है कि यह आग उन्हीं लोगों ने लगाई है।"

पुलिस ने बताया, "घटना की जांच की जा रही है, और जल्द ही आग लगने के कारणों का पता लगा लिया जाएगा। जो कोई भी इसके लिए जिम्मेदार होगा, उसे पकड़ा जाएगा।"
 
अगर ये सच है तो बसंतिया पट्टी के महंत रामचरण दास ने संत महेश दास पर ऐसी साजिश कैसे रची? क्या उन्हें कोई राजनीतिक दबाव नहीं है? आपने कभी नहीं सोचा था कि जिंदा जलाने की कोशिश करना बार-बार ऐसा हो सकता है? यह तो बहुत खतरनाक है, तो क्या पुलिस ने अपनी जिम्मेदारियों को भूल गए हैं?

क्या संत महेश दास की बात मानने की जरूरत नहीं है? उन्हें आरोप लगाने से पहले खुद को सावधान रखना चाहिए था। अगर उनके शिष्यों ने जल्द ही आग बुझा दी, तो यह कैसे हुआ? और क्या पुलिस को इसकी जानकारी नहीं आई थी?

आश्रम की संपत्ति पर कब्जाने की साजिश में कौन शामिल था? और क्या महेश योगी की गद्दी को लेकर विवाद कोई नई बात है? यह तो बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है, तो क्या हमारे पास न्याय की सुनवाई की सुविधा नहीं है?

क्या इस घटना में किसी भी राजनीतिक दल या व्यक्ति की शामिलता नहीं है? क्योंकि अगर ऐसा था तो यह और भी खतरनाक होगा।
 
🙏 मुझे यह घटना बहुत दुखद लगी। संत महेश दास की सुरक्षा के लिए तुरंत पुलिस और अन्य संगठनों की मदद चाहिए। इसके पीछे के कारणों को समझने की जरूरत है और जिम्मेदार लोगों को बिना भेदभाव किया जाना चाहिए। जल्द ही आग लगने के परिस्थितियों का पता चलेगा और सजा मिलनी चाहिए। हमें अपने सामाजिक नेटवर्क में इस घटना के बारे में जागरूकता फैलानी चाहिए। 🌟
 
अरे, यह तो बहुत ही दुखद बात है जो हुआ। लेकिन मैं आशा से भरा महसूस करता हूं कि जैसे-जैसे आग लगने का मामला सामने आ रहा है, उस पर पूरी तरह से शोध किया जाएगा। और अगर कोई ऐसी गिरोह का हिस्सा है जो इस तरह की धमकी लगा रहा है, तो वे जल्द ही पकड़े जाएंगे।

मैं संत महेश दास की बात समझता हूं। उनके पास बहुत अच्छा अनुभव है, और उन्हें आश्रम में आग लगने की यह घटना ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचाई है। उन्होंने जल्द ही अपने शिष्यों की मदद से आग बुझा दी, और पुलिस ने भी उनकी मदद की।

लेकिन मैं यही कहूंगा कि हमें इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए एक साथ मिलकर काम करना होगा। हमें आश्रम, बसंतिया पट्टी और इसके बादशाहों जैसी जगहों पर कानून का पालन करने की जरूरत है। और अगर ऐसा हुआ तो जल्द ही सजा भी मिलेगी।

उम्मीद है, आग लगने का मामला जल्द ही हल हो जाएगा, और संत महेश दास के आश्रम में शांति फिर से आ जाएगी। 💫
 
अगर व्यक्ति दूसरों पर छुरा फेरता है तो वह कैसा स्वस्थ मानसिक स्थिति में रहेगा? 🤔 सबसे बड़ी समस्या यही है कि आग लगने के बाद पुलिस ने पहले इसके जिम्मेदार को पकड़ लिया तो फिर वास्तविकता पर ध्यान नहीं दिया। बसंतिया पट्टी से महंत रामचरण दास और उनके सहयोगियों पर आरोप लगाते समय, याद रखना चाहिए कि हर किसी को अपना खुद का समाधान ढूंढने का मौका मिलना चाहिए। 🔥
 
यह घटना बहुत गंभीर है और मुझे लगता है कि यह शायद आरोपों के आधार पर नहीं बल्कि सच्चाई से हो रही है। अगर सचमुच बसंतिया पट्टी के महंत रामचरण दास ने संत महेश दास के खिलाफ साजिश रच रहे हैं तो यह बहुत बड़ा अपराध होगा।

ज़रूर, हमें आगे जांच करनी चाहिए और पुलिस को सहायता देनी चाहिए। मुझे लगता है कि अगर आपने अपने आश्रम की संपत्ति पर कब्जाने की धमकी दी है तो यह बहुत बड़ा अपराध होगा।

बसंतिया पट्टी के महंत ने दो साल से हनुमानगढ़ी से मिलने वाली सभी सहायता बंद कर दी है, जिससे उनका आश्रम ख़राब हो रहा है। यह बहुत बड़ा अपराध होगा।

मैं संत महेश दास की गद्दी पर कुछ भी आरोप नहीं लगा सकता, लेकिन यह सच है कि उन्होंने बेहद कठिन प्राणायाम कराए हैं और इन्हें गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज करने में बहुत संघर्ष किया होगा।

आग लगने की जांच ज़रूर करें। अगर शायद आरोपों के आधार पर नहीं बल्कि सच्चाई से हो रही है तो पुलिस को अपनी सहायता देनी चाहिए।
 
ये तो मुश्किल किसी भी तरह की साजिश होने से भी नहीं बचा पाया। ऐसा लग रहा है कि लोग अपने व्यक्तिगत राजनीतिक बेचैनी के लिए एक दूसरे को जलाना चाहते हैं। बसंतिया पट्टी के महंत ने तो संत महेश दास को पहले से ही सब्जी बना लिया था, और अब आग लगने की बात करने के लिए। यह तो एक बड़ा खेल है, जहां सभी को अपने राजनीतिक बेचैनी में फंसाने की कोशिश करते रहते हैं।
 
आग लगने के बाद जब संत महेश दास ने आग बुझाने की मदद मांगी, तो क्या उन्हें पता था कि वे आश्रम के पीछे एक बड़े खेल के हिस्से में हैं? यह तो बस एक छोटी सी आग, लेकिन उसके पीछे एक बहुत बड़ा राजनीतिक खेल।
 
Back
Top