बाबरी मस्जिद 'रेप्लिका' से 90KM दूर बन रहा राम मंदिर, बंगाली रूप में नजर आएंगे रामलला

पश्चिम बंगाल में बाबरी मस्जिद की घोषणा और फिर हुई राम मंदिर की नींव, यह दोनों कदम एक साथ बढ़ते हुए दिखाई दे रहे हैं। श्री कृत्तिबास राम मंदिर ट्रस्ट द्वारा बनने वाली बाबरी मस्जिद की रेप्लिका से लगभग 90 किलोमीटर दूर 15 बीघा भूमि पर नादिया जिले के शांतिपुर में अयोध्या की तर्ज पर राम मंदिर बनाया जाएगा, जहां पूर्व टीएमसी विधायक हुमायूं कबीर ने बाबरी मस्जिद की नींव रखी थी।

इस मामले में ट्रस्ट के अध्यक्ष अरिंदम भट्टाचार्य ने कहा कि यह कोई राजनीतिक कदम नहीं है, बल्कि एक धार्मिक और सांस्कृतिक पहल है जो 2017 में तब शुरू की गई थी जब वह शांतिपुर से विधायक थे। उन्होंने कहा, "बाबरी मस्जिद के ऐलान के बाद इस परियोजना को नई दिशा देना होगा। मंदिर की आधारशिला फरवरी में रखी जाएगी।"

इस राम मंदिर की प्रतिकृति अयोध्या के राम मंदिर की होगी, लेकिन इसमें भगवान राम की प्रतिमा रामायण में वर्णित प्रतिमा के समान होगी। भगवान राम का रंग हरा होगा और वे गर्भगृह में सीता, लक्ष्मण और हनुमान के साथ विराजमान होंगे।

इस परियोजना को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के देशभर यात्रा के बाद उठाया गया है। यह पहल मुख्यमंत्री के दिग्घ जिले में जगन्नाथ धाम का उद्घाटन करने और न्यू टाउन में दुर्गांगन और सिलीगुड़ी में महाकाल मंदिर की आधारशिला रखने के बाद उठाई गई है।
 
🤗 यह तो बहुत रोमांचक है! मुझे लगता है कि यह परियोजना न्यूनतम विवाद पैदा करेगी। शायद लोगों की धारणाओं और राजनीतिक दावों से ऊपर चलना चाहिए। अगर इसके पीछे एक स्थिर और सम्मानजनक मूड है, तो यह सब अच्छा हो सकता है।
 
अरे वाह, ये कैसा खेल हो रहा है... एक ही समय में दोनों ही मस्जिद और मंदिर बनाने की घोषणा, यह तो ज्यादा ही राजनीति है... शायद इस बार भी कोई साफ़ निकलेगा नहीं... 90 किलोमीटर दूर एक जगह पर बसे 15 बीघा जमीन पर राम मंदिर बनाने की योजना, यह तो पूरे देश को ज्यादा हंसाएगा... भगवान राम की प्रतिमा हरे रंग में रखी जाएगी, यह तो अच्छा है लेकिन सीता, लक्ष्मण और हनुमान का स्थान कहाँ?
 
🤔 मुझे लगता है कि ये सभी कदम एक बड़ा मिजाज था 😂, पहल तो यहां तक कि मस्जिद बनाने का विचार हुआ, फिर वहीं से राम मंदिर की नींव रख दी गई। अब यह तो बिल्कुल सही नहीं की जा रही है, क्या हमें ऐसी चीजों पर ध्यान केन्द्रित करना पड़ रहा है जहां लोगों के पास कुछ और जरूरी काम होने चाहिए? 😕
 
🤯 अरे, यह तो बहुत ही रोमांचक लग रहा है! मंदिर की नींव रखी जा रही है, और फिर राम मंदिर की प्रतिकृति बनाई जाएगी। यह सब एक साथ बढ़ते हुए दिखाई दे रहा है। लेकिन, मैं सवाल उठाता हूँ कि क्या यह परियोजना पूरे देश में सहज नहीं होगी? कुछ लोगों को यह परियोजना पसंद नहीं आएगी, और वे इसके खिलाफ भी बोल सकते हैं।

लेकिन, मैं एक फैन हूँ, और मैं इस परियोजना को देखने के लिए उत्साहित हूँ। मुझे लगता है कि यह परियोजना न केवल अयोध्या की तर्ज पर बनाई जाएगी, बल्कि यह भारत की समृद्ध संस्कृति और इतिहास को दर्शाएगी। भगवान राम की प्रतिमा रामायण में वर्णित प्रतिमा के समान होगी, और इसमें शीता, लक्ष्मण, और हनुमान भी विराजमान होंगे। यह तो बहुत ही सुंदर लगता है! 🙏

लेकिन, मैं एक सवाल उठाता हूँ कि यह परियोजना पूरे देश में सहज नहीं होगी, और क्या हम इस परियोजना के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे? क्या हम इसके लिए तैयार हैं? 🤔
 
मुझे लगता है कि यह सब बहुत ही रोचक है... 🤔 पूरा मामला तो बहुत जटिल है, और मैं समझ नहीं पाता कि क्या होना चाहिए और क्या नहीं। लेकिन अगर हम ध्यान से देखें तो यह एक रीति-रिवाजों की बात है। याद आ रहा है 1992 का विवाद, जब मस्जिद टूट गई थी। तब बहुत ही भावनात्मक और उतार-चढ़ाव भरी घटना घटी। अब यह तो एक नई दिशा में जा रहा है, लेकिन मुझे लगता है कि पीछे की कहानी और उस विवाद से सबक बहुत बड़ी महत्वपूर्ण है।
 
मुझे लगता है कि यह सब कुछ एक बड़े व्यवसाय है 🤑 जिसमें दोनों पक्ष अपने लिए एक बात कहते हैं और दूसरी पक्ष को मुंहतोड़ करते हैं।

कौन सी जगह शांतिपुर है, वह भी नहीं पता हूँ। क्या यह सिर्फ एक छोटी सी जगह है जहाँ पूर्व टीएमसी विधायक ने बाबरी मस्जिद की नींव रखी थी।

मंदिर और मस्जिद, ये दोनों तो एक ही चीज हैं - मन्दिर। यह हमारे देश में बहुत सारे जगह पर होता है और लोग अपने अपने तरीके से इसे बनाते हैं।

बाबरी मस्जिद की घोषणा और फिर राम मंदिर की नींव, यह दोनों तो एक बड़े व्यवसाय का हिस्सा हैं जिसमें हर कोई अपनी लाभ के लिए खेल रहा है।

क्या श्री अरिंदम भट्टाचार्य को पता है कि इस पूरे काम में कितनी राजनीति है? यह तो एक बड़ी धोखाधड़ी है जिसमें लोगों की निराशा बढ़ती जा रही है।

मुझे लगता है कि हमें अपने देश की समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए और राजनीतिक दलों से बात करनी चाहिए।
 
मुझे बहुत खेद है कि लोकल नेताओं को अपने देश के नाम पर कुछ ऐसा करने का साहस हो। अगर उनकी ताकत थी, तो उन्होंने स्थानीय लोगों की भलाई के लिए क्या कर सकते? 🤔

मंदिर या मस्जिद बनाने का मामला अलग है, लेकिन नेताओं को यह तय करना चाहिए कि उनकी पार्टी के द्वारा उठाई जाने वाली पहलें लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाएं या नहीं।

अब बाबरी मस्जिद और राम मंदिर की बात करें, यह तो एक विवादित विषय है, लेकिन अगर हम स्थानीय लोगों की भावनाओं को समझते हैं तो यह एक बहुत बड़ा मुद्दा नहीं है। लोगों को अपने घरों पर शांति से रहने देने की जरूरत है, न कि ख़ुद को किसी भी तरह से मजबूर करना। 🌹

मुझे लगता है कि अगर हम सभी एक-दूसरे की बातें सुनने और समझने में सक्षम होते, तो देश बहुत अच्छा हो सकता था। लेकिन यह आसान नहीं है। 🤷‍♂️
 
जो कुछ हो रहा है वह बहुत अजीब लग रहा है 🤔। पहले तो हमारे पास एक मस्जिद थी और फिर वाही मस्जिद से कोई राम मंदिर बनाया गया। अब फिर से कोई मस्जिद नहीं बनने देना चाहते हैं क्या? 🤷‍♂️ और नादिया जिले में तो ऐसा करने से पहले यहां पर कोई सुनवाई नहीं हुई थी। तो यह राम मंदिर बनाने की कोशिश पूरी तरह से अन्यायपूर्ण है और हमें इसके खिलाफ आवाज उठानी चाहिए। 👊
 
मुझे लगता है कि ऐसा करना कितना अजीब है 🤔, पहले तो उन्होंने बाबरी मस्जिद बनाने की बात कही, फिर बदल दिया। यह तो एक बड़ा झगड़ा उठेगा, और नादिया जिले में भी ऐसा मंदिर बनाना क्या सही है? 🤷‍♂️ मुझे लगता है कि यह एक राजनीतिक खेल है, जब तक इसका कोई फायदा नहीं होता।
 
कोई भी नई परियोजना को लेकर जोरदार दावे नहीं करना चाहिए। यह राम मंदिर की प्रतिकृति है तो वह फाइन है, लेकिन बाबरी मस्जिद की नींव रखने वाले भाई कबीर साहब की बातें समझनी चाहिए जिनका इस मामले से जुड़ाव था। यह कोई राजनीतिक गतिविधि नहीं है, बल्कि एक धार्मिक पहल तो जो 15 साल पहले शुरू हुई थी। क्या हमने उसकी पूरी कीमत नहीं समझी?
 
बात तो हो गई, यह राम मंदिर बनाने की प्लानिंग फिर से बढ़ गई है 🤯। मुझे लगता है कि यह एक बड़ा मुद्दा होने वाला है, लेकिन कुछ दिनों बाद ही जानना होगा। मैंने पढ़ा है कि श्री अरिंदम भट्टाचार्य ने कहा है कि यह राम मंदिर बनने की प्लानिंग 2017 से चल रही थी, तो इसका मतलब यह है कि पहले से ही बहुत कुछ तैयार है। मुझे लगता है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस परियोजना को उठाने का फैसला इसलिए किया है क्योंकि वह अपने दिग्घ जिले में जगन्नाथ धाम का उद्घाटन करने और न्यू टाउन में दुर्गांगन और सिलीगुड़ी में महाकाल मंदिर की आधारशिला रखने के बाद उठाई गई है।
 
मेरे दोस्तों 👋, तो यह तो एक बहुत बड़ा मुद्दा है! मैंने पढ़ा है कि 15 बीज़ी भूमि पर अयोध्या की तर्ज पर राम मंदिर बनाने की योजना है, लेकिन यह सवाल है कि इससे आगे क्या होगा? शायद इस परियोजना को पूरा करने के बाद, हमें देखना होगा कि कैसे लोकप्रिय विरोध होंगे। मैं सोचता हूं कि अगर यह मंदिर बन जाए तो वह भी एक ऐतिहासिक स्थल हो जाएगा।
 
अरे, ये तो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की राजनीति का फायदा उठाने का एक नया तरीका है न? पहले उन्होंने बाबरी मस्जिद की घोषणा की, तो अब अयोध्या में राम मंदिर की नींव रख दी है। लेकिन यह सोचते समय, हमें याद रखना चाहिए कि भारत में धर्म और धार्मिकता के मुद्दों पर तालमेल बिघड़ने का जो खतरा है, उसे बढ़ावा देना भी न कोई अच्छा सोचा गया है।

अब, अगर हम अपने युवाओं को रोजगार की तलाश में देश की सीमा पर खड़े देखें, तो यह एक बड़ी समस्या है। हमें अपने पास की समस्याओं को हल करने के बजाय, वहां और वहां की समस्याओं को बढ़ावा देना कैसे करेंगे, यह सोचते समय, हमें ध्यान रखना होगा।

और, यह सवाल उठता है कि ममता बनर्जी ने इस परियोजना को कैसे बढ़ावा दिया, और इससे पहले तो भाजपा की राजनीति में कई ऐसी चीजें हैं जो उनके फायदे में हैं। लेकिन, सबसे जरूरी बात यह है कि हम अपने देश में शांति और सौहार्द का माहौल बनाए रखने के प्रयास करें।
 
मैंने कभी भी ऐसी चीजों पर टिप्पणी नहीं की थी, लेकिन यहाँ एक सवाल है... क्या हमें राजनीति और धार्मिक मुद्दों से हटकर एक दूसरे को समझने और सम्मान करने की जरूरत नहीं है? 🤔

मैं समझता हूँ कि भारत में हमारे इतिहास में कई तरह के परिवर्तन हुए हैं, लेकिन जब यह बाबरी मस्जिद और राम मंदिर के बारे में बात आती है, तो मुझे लगता है कि हमें एक दूसरे की भावनाओं को समझने और सम्मान करने की जरूरत है। यह परियोजना कैसे बनेगी, इसके बारे में हमें पता नहीं है, लेकिन मुझे लगता है कि अगर हम एक दूसरे को समझते हैं और सम्मान करते हैं, तो शायद यह सब सुधर जाएगा। 🙏

मैं अपनी राय को रखने के लिए तैयार हूँ, लेकिन मैं भी यह नहीं कह सकता कि मैं सही हूँ और आप गलत हैं। हमें एक दूसरे को समझने और सम्मान करने की जरूरत है, न कि लड़ने और विवादों में फंसने। 🤝
 
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