मुझे बात करने को मिली, तो लगता है कि दीपू दास की हत्या में जुड़े हुए हिंसक विरोधियों ने यह सारा बुरा कर दिया है। अगर उन्होंने अपने राजनीतिक विचारों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से लोगों को समझाया था, तो सब अच्छा होता। लेकिन जब उनकी हत्या की बात आती है तो फिर कुछ गलत हुआ, और अब लोग घायल हो रहे हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है, मुझे लगता है कि हमें अपने समाज में शांतिपूर्ण विचारों को बढ़ावा देने पर जोर देना चाहिए, न कि हिंसक तरीकों से।