बंगाल में बाबरी विवाद- जमीन नहीं, तो मस्जिद कहां बनेगी: हुमायूं का जवाब- 6 दिसंबर को दिखाऊंगा, TMC विधायक बोले- वो झूठा, BJP का एजेंट

बाबरी मस्जिद पर हुए विवाद से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेताओं को कई बार मुकदमों में जिम्मेदार ठहराया गया है। इस मामले में, हमने तृणमूल कांग्रेस के विधायक हुमायूं कबीर से बात की और उन्होंने बताया, 'हम मस्जिद बनाने के लिए सच में जमीन नहीं खरीदी है। हमसे पहले तो कोई जमीन खरीदने देने का वादा नहीं था।'
 
मुझे ये बहुत अजीब लग रहा है 🤔, तृणमूल कांग्रेस नेताओं को बाबरी मस्जिद विवाद में जिम्मेदार ठहराने से पहले हमें पूरी जानकारी तय करनी चाहिए। अगर उन्होंने सच में जमीन नहीं खरीदी है तो फिर क्या था? 🤷‍♂️ यह दावा करने से पहले हमें सबूत और तथ्यांकित जानकारी लेनी चाहिए।
 
बाबरी मस्जिद विवाद में भाजपा नेताओं की जिम्मेदारी को लेकर यह बात है कि वे सच्चाई से बोल रहे हैं। पर अभी तो हमारे देश में बहुत सी बातें होती हैं और सबको सही ठहराना पड़ता है। इस मामले में भी तृणमूल कांग्रेस के नेताओं को उनकी जिम्मेदारी बताई जा रही है लेकिन वास्तविकता यह है कि किस प्रकार के दबावों में क्या समझौता हुआ और कैसे जमीन खरीदने का मौका मिला। हमें अपने नेताओं पर सवाल उठाने की जरूरत है ताकि वास्तविकता पता चले। 😊
 
बाबरी मस्जिद के मामले में तृणमूल कांग्रेस की प्रतिक्रिया सुनकर मुझे बहुत हिचकिचाहट हुई। यह तो समझने लायक है कि जमीन पर विवाद कैसे बढ़ गया। लेकिन हमें यह भी समझना चाहिए कि एक देश में कई मतभेद होते हैं और हर किसी की अपनी राय होती है।
 
मुझे लगता है कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि भाजपा नेताओं को अक्सर मुकदमों में जिम्मेदार ठहराया जाता है, खासकर जब बाबरी मस्जिद का विवाद होता है। मैं समझता हूँ कि इस दिनों के लिए हमें अपनी समाज में सौहार्द और सहयोग को बढ़ावा देने पर ध्यान देना चाहिए, न कि किसी एक पार्टी या व्यक्ति को दोषी ठहराने पर।
 
"जिस देश में दिल खोने पर रानी द्वारा पुलिसवालों को फांसी देने की कोशिश की जाती है, वहाँ तो नेताओं को जमीन खरीदने के लिए बाध्य करने से पहले से ही उनकी नैतिकता की बात कही है 😐"
 
मुझे लगता है कि यह सब ज्यादा भारी न हो, यार तो मस्जिद बनाने के लिए सीधे से कह दो - भाई, मैंने पढ़ा है कि उनके पास जमीन मिलने के बाद उस पर मस्जिद बनाने का प्लान नहीं था। फिर क्यों इतनी जिम्मेदारी लेनी पड़ी? न की तृणमूल कांग्रेस और न ही उनके विधायक साहब। मैं समझता हूँ, लेकिन कुछ दूरी रखनी चाहिए, फिर भी ये मामला भारतीय जनता पार्टी से जुड़ा हुआ है, तो क्या ऐसा कहीं नहीं बदलेगा? 🤔🚫
 
विवाद ऐसा है जो कभी सुलझता भी नहीं देता, लेकिन यह सच है कि समय के साथ सबकुछ बदल गया है। Masjid ke baare mein baat karte samay toh ek cheez yeh pata chalta hai ki log apni aazadi ko lekar bahut darr nahi karte. Lekin humein bhi ek baar se poochhna chahiye ki masjid ke peeche kya sab se pehle tha?
 
मैं सोचता हूँ कि यह सब मामला बहुत जटिल है 🤔. मस्जिद बनाने और विवाद होने की बात करने से पहले हमें अपने पास की जमीन की समस्या को देखना चाहिए। अगर हमारे पास जमीन नहीं है, तो हमें खुद को वहाँ निर्माण करने वालों से समझना चाहिए। यह सब मामला बहुत जटिल और गहरा है जिसे ध्यान से देखना पड़ेगा।
 
विवाद से जुड़े पुराने मामलों को फिर से निकाल लेना जरूरी है क्योंकि यह हमारे समाज में स्वतंत्रता और न्याय की भावना को फिर से जगाता है। बाबरी मस्जिद के मामले में सच्चाई बताने की जरूरत है, खासकर जब सरकार ने इसे एक पुराने मुद्दे को फिर से सक्रिय बनाया है।
 
बाबरी मस्जिद की कहानी सुनते हुए, मेरा मन यह सोचता है कि भारतीय समाज में धर्म और राजनीति के बीच कितनी जटिलताएं हैं। जब तक सरकार ने इस मामले को शांतिपूर्ण तरीके से हल नहीं किया, तब तक यह समस्या बस नहीं होती।
 
मुझे यह बात बहुत दुखद लगती है 🤕, क्योंकि यह विवाद से निपटने में हमारे देश में बहुत ज्यादा तनाव हो रहा है। तृणमूल कांग्रेस के विधायक से बात करते समय, मुझे लगने लगा कि ये मामला बहुत जटिल है और हमें इस पर पूरी तरह से समझाने की जरूरत है। अगर सच्चाई तो है कि मस्जिद बनाने के लिए जमीन नहीं खरीदी गई, तो यह एक अच्छी बात है। लेकिन मुझे लगता है कि हमें अपने विचारों और धारणाओं को साझा करने के लिए थोड़ी धैर्य रखना चाहिए। किसी भी तरह से, यह एक अच्छा अवसर है कि हम सभी अपनी राय और विचारों को साझा करें। 🤝
 
बाबरी मस्जिद का विवाद सुनकर लगता है कि यहाँ सब कुछ सही से नहीं जालिम चालू है, तृणमूल कांग्रेस के नेताओं पर भी सवाल उठने चाहिए, उन्हें भी अपनी जमीनों की गोपनीयता का ख्याल रखना चाहिए। लेकिन इस मामले में तृणमूल कांग्रेस के नेताओं से यह सवाल है कि क्या आपके पास जबरन जमीन थी या नहीं।
 
मुस्लिमों और सिक्खों के बीच धार्मिक जगहों पर मतभेद होना तो असामान्य नहीं है, लेकिन जब सरकारी जमीन खरीदने में विवाद होता है तो सबको शांति बनाए रखनी चाहिए। यह कोई भी दल या नेता इस मामले में जिम्मेदार नहीं होना चाहिए। पूरी बात समझने की जरूरत है।
 
बाबरी मस्जिद की बात करते हैं तो अभी भी बहुत सारे सवाल रहते हैं । मेरे बच्चों को पूछता हूँ कि अगर हमारे पूर्वजों ने उन दिनों ऐसी स्थिति में डाला था, तो आज फिर यह जमीन विवाद का कारण बन गई है और भी इतने दिन बीत गए हैं…। इस तरह की घटनाएं हमारे समाज में तेजी से बदलाव लाने में मदद कर सकती हैं, लेकिन फिर भी उन्हें कैसे संभालना चाहिए, यह बहुत जरूरी है ।
 
विवाद की इस गहराई से, लगता है कि हमारे इतिहास में कई पल भूल गए हैं। बाबरी मस्जिद का विषय इतना जटिल है, यह तो एक बड़ा सवाल है कि मुस्लिम बहुल समुदाय ने जमीन खरीदने की पुष्टि नहीं की, लेकिन फिर भी विवाद हुआ। इसके बीच में हमारा देश इतना विभाजित हो गया है कि लगता है हर एक पक्ष अपने न्याय का अनुरोध कर रहा है।
 
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