बुजुर्ग ने बीमार पत्नी को 600KM रिक्शा खींचकर अस्पताल पहुंचाया: 9 दिन में संबलपुर से कटक पहुंचे; 70 की उम्र में कबाड़ बीनकर इलाज कराया

संबलपुर से कटक पहुंचे बुजुर्ग ने 600किलोमीटर रिक्शा खींचकर पत्नी को अस्पताल पहुंचाया, 70 की उम्र में कबाड़ बीनकर इलाज कराया

बाबू लोहार, जो 75 साल के हैं, ने अपनी पत्नी ज्योति के इलाज के लिए 600 किलोमीटर का सफर रिक्शा से तय किया। उनकी पत्नी लकवा होने के बाद कई माह तक अस्पताल में भर्ती रही, लेकिन वह अच्छी नहीं थी। इसलिए, बाबू ने अपनी पत्नी को कटक ले जाने का फैसला किया।

उनकी खास बात यह है कि इलाज पूरा होने पर वे रिक्शा से घर वापस आ गए। बाबू लोहार ने अपने रिक्शा पर मच्छरदानी, चादर, बिस्तर और कंबल रखा। दिन में वह रिक्शा खींचते और रात में दुकानों के आसपास या पेड़ों के नीचे सोए। कई लोगों ने उनकी मदद की, जिनमें से कुछ उन्हें भोजन और पैसे दिए।

बाबू लोहार ने कहा, "मैं अपने पति की बीमारी का डर नहीं सकता। मैं उसके इलाज के लिए 9 दिनों तक रिक्शा से चला गया। जब भी थकान होती, तो मैं उसकी ओर देखता और मजबूत होने लगता।"

इसके बाद, जब ज्योति ने अस्पताल से छुट्टी देने की पुष्टि कर दी तो उनके लिए एक एसी बस की व्यवस्था करने की पेशकश की, लेकिन रिक्शा चलाने में वह खुश नहीं थे। इसलिए, बाबू ने कहा, "मेरी रोजी-रोटी है, और पत्नी मेरी जिंदगी। सुरक्षित पहुंचने के लिए, हमने फिर से रिक्शा चलाया।"
 
बोलते बोलते यह दिल को छू जाता है कि कैसे एक प्यार वाली जोड़ी ने अपने परिवार को खुश करने के लिए 600किलोमीटर का रिक्शा खींचकर अपन पत्नी को अस्पताल पहुंचाया। 😊🚴‍♂️

नहीं तो एक सवाल उठता है कि इतनी दूरी पर जाने में उनकी कितनी मेहनत की और सिर्फ 70किलोग्राम वजन के लिए? 🤔 600किलोमीटर का सफर रिक्शा से तय करना एक अद्भुत खेल है!

उस समय अस्पतालों में इलाज की कीमतें बहुत अधिक होती हैं और बुजुर्गों को भी कभी-कभार परेशानियाँ हो सकती हैं। ऐसे मामलों में रिक्शा से जाने की बात सुनकर मुझे लगने लगा कि कैसे ना करना? 😊

लेकिन जब वास्तविकता में देखने की बात आती है तो यह एक बहुत ही दिलचस्प तथ्य है कि उनके साथ कई लोगों ने उनकी मदद की, जिनमें से कुछ उन्हें भोजन और पैसे दिए। 🙏

बाबू लोहार की बात सुनकर मुझे याद आ गया कि खुशियों और दर्दों में हम सब एक ही तरह के व्यक्ति होते हैं। उनकी इस बहादुरी को देखकर मैं अपने आप को कहूँगा, "तुम्हारी बात मुझसे भी बहुत प्यारी लगी"। ❤️
 
यह सुनकर तो मन में खुशी आती है जब देखा जाता है कि लोग एक-दूसरे की मदद करने के लिए तैयार रहते हैं और व्यक्तिगत रूप से अपने परिवार की जरूरतों को पूरा करते हैं। बाबू लोहार ने अपनी पत्नी ज्योति को अस्पताल ले जाने के लिए 600 किलोमीटर तक रिक्शा चलाया, और जब वे इलाज पूरा कर लिया तो उन्होंने फिर से घर वापस आ गए। यह दिखाता है कि परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए लोग अपनी मेहनत और संघर्ष के साथ आगे बढ़ सकते हैं। 🚲❤️
 
🚴‍♂️ यह बात पूरी तरह से सच है कि पत्नी को अस्पताल में भर्ती कराने के लिए 600 किलोमीटर रिक्शा खींचना एक बहुत बड़ा परिश्रम है। लेकिन जब आप अपनी पत्नी की जिंदगी में प्यार और समर्थन देते हैं तो ऐसे पैरों की शक्ल नहीं लेता। 👫

मुझे लगता है कि बाबू लोहार की इस कहानी से हमें यह सीखने को मिलता है कि सच्चे परिवार में एक दूसरे की मदद करने के लिए तैयार रहना बहुत जरूरी है। उनकी पत्नी ज्योति की बीमारी के इलाज के लिए जो प्रयास किया, वह प्रेम और समर्थन की एक सच्ची कहानी है। 💕

इस दुनिया में अगर हम साथ-साथ रहते हैं और एक-दूसरे की मदद करते हैं, तो यही हमारी सबसे बड़ी जीत होगी।
 
अरे भाई, यह बात बहुत ही दिलचस्प है कि बाबू लोहार ने 600 किलोमीटर रिक्शा खींचकर अपनी पत्नी को अस्पताल पहुंचाया। मुझे लगता है कि वे दोनों एक-दूसरे के साथ बहुत प्यार करते हैं। लेकिन, क्या यह रिक्शा चलाना आसान था? मुझे लगता है नहीं। 70 की उम्र में कबाड़ बीनकर इलाज कराया जा रहा है, तो शायद उनके पास बहुत सारे नुस्खे और दवाएं थीं जिनके लिए उन्हें रिक्शा चलाना पड़ा।

मुझे लगता है कि यह एक अच्छी कहानी है, लेकिन मैं सोचता हूं कि क्या अस्पताल ने उनकी मदद करने में भी कुछ गलत किया? शायद उन्हें बेहतर इलाज की व्यवस्था की जानी चाहिए थी।

मेरी राय में, अगर ऐसी कई बार यह होता, तो लोगों को सोच-विचार करने पर मजबूर कर देता।
 
Wow 😂 600किलोमीटर तक रिक्शा खींचकर पत्नी को अस्पताल ले जाने की बात तो हंसाने वाली है, पर वास्तव में स्वाभिमान की बात है 🙏। 70 की उम्र में भी निरंतरता और बलिदान दिखाना बहुत प्यारा है। यही तो सच्चाई है कि जिंदगी में हमेशा सबसे बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, लेकिन अगर हम अपने परिवार और प्रेम को पहले रखें, तो हर चुनौती निपट सकते हैं। 👏
 
यह तो बहुत ही दिल को छू लेने वाला मामला है 🙏। बाबू लोहार ने अपनी पत्नी के इलाज के लिए 600 किलोमीटर का सफर रिक्शा से तय किया। यह बहुत ही दूरबीनी और प्यारी बात है। मैंने ऐसा नहीं सोचा था कि किसी ने अपनी पत्नी को अस्पताल ले जाने के लिए रिक्शा खींचकर दूर-दूर तक चलना। उनकी बहादुरी और प्यारी बातें मुझे बहुत पसंद आई हैं।

मैंने सोचा था कि अस्पतालों में अब स्ट्राइक टीम्स होनी चाहिए, ताकि ऐसे मामलों में लोग आसानी से इलाज कराए जा सकें। लेकिन यह बाबू लोहार जी की दूरबीनी और प्यारी बातें दिखाई देती हैं। मुझे लगता है कि यह एक ऐसी समस्या को हल करने वाला समाधान हो सकता है।
 
🚴‍♂️ यह देखकर बहुत खुश हुआ कि बाबू लोहार ने अपनी पत्नी को अस्पताल पहुंचाने के लिए 600 किलोमीटर रिक्शा चलाया। उनकी कोशिशों से पत्नी ज्योति को अच्छा इलाज मिला, और अब वह बेहतर है।

रिक्शा चलाने में उनकी मेहनत की बात करनी चाहिए। 75 साल की उम्र में भी उन्होंने अपने रिक्शे पर कई वस्तुओं को रखकर खींचा। यह दिखाता है कि वे अपनी पत्नी के इलाज के लिए किस प्रतिज्ञा से जुड़े थे।

बाबू ने कहा, "मैं अपने पति की बीमारी का डर नहीं सकता।" यह उनकी गहरी प्यार और समर्थन को दर्शाता है। मुझे लगता है कि वे एक दूसरे के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। 👫
 
अगर बाबू लोहार को उनके देश में सरकारी बसों और ट्रेनों का उपयोग करने का मौका मिल गया, तो उन्हें 600 किलोमीटर तक सफर करने के लिए इतनी परिश्रम नहीं करना पड़ा। लेकिन वह रिक्शा चलाने के प्रति अपनी स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता का महत्व जानते हैं।

मुझे यह बात पसंद है कि उनकी पत्नी भी उनके साथ थी और उन्होंने मिलकर एक दूसरे को मजबूत बनाया। इससे पता चलता है कि प्रेम और समर्थन कितना महत्वपूर्ण होता है। और बाबू लोहार ने अपने रिक्शा पर हमेशा उनकी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सोचने की भावना दिखाई है।

मैं तो उनके इस प्रयास से बहुत प्रेरित हूं और उनसे सबक लेने की कोशिश करूंगा।
 
बिल्कुल बात सही, अब तक तो सड़कें बहुत खराब है, और काट-मारने वाली दुकानों की संख्या बढ़ जाए तो फिर कैसे सुरक्षित पहुंचेंगे। 600 किलोमीटर खींचना आसान नहीं है... 🚲😬 ज्योति जी की तबीयत कितनी अच्छी थी, और बाबू लोहार ने कितनी मेहनत की।
 
अरे, यार, यह तो बहुत खूबसूरत बात है! 🤩 600किलोमीटर रिक्शा खींचकर पत्नी को अस्पताल पहुंचाना और फिर वापस आ जाना... लेकिन तो बाबू लोहार ने कुछ गलत कहा, ना? 🤔 वह सोचता है कि अपने पति की बीमारी का डर नहीं सकता, लेकिन फिर क्यों ने एसी बस की व्यवस्था करने से इंकार कर दिया? 🚗

और फिर, वह कहता है कि रिक्शा चलाने में खुश नहीं था, लेकिन तो उसकी पत्नी लकवा होने के बाद कई माह तक अस्पताल में भर्ती रही, और वह अच्छी नहीं थी। तो क्यों ने उसे एसी बस से घर पहुंचाने की व्यवस्था करने से इंकार कर दिया? 🤷‍♂️

मैं समझता हूं, बाबू लोहार की मंशा, लेकिन तो वह क्यों इस तरह गलत तरीका अपनाया? 😐
 
बात यह तो बहुत अच्छी है! 75 साल के बाबू लोहार ने पत्नी को अस्पताल पहुंचाने के लिए 600 किलोमीटर रिक्शा खींचकर पूरा सफर तय किया। 🚴‍♂️ मुझे लगता है कि यह बहुत ही देशभक्ति और सामाजिक जिम्मेदारी का उदाहरण है। लोगों ने उनकी मदद की, जिनमें से कुछ उन्हें भोजन और पैसे दिए। यह तो एक अच्छा सबक है कि समाज में सहयोग और मदद करना बहुत जरूरी है।

मुझे लगता है कि बाबू लोहार ने अपने पत्नी के इलाज में वफादारी दिखाई है। वह 9 दिनों तक रिक्शा से चला, जब भी थकान होती, तो उसकी ओर देखता और मजबूत होने लगता। यह बहुत ही प्यारा कुछ है! 💕
 
🚲 बात तो यह है कि अब कलंक के दिनों नहीं रहे, सभी की मदद से वह 600किलोमीटर का सफर बेहद आसान है। मेरी यादें 80 के दशक में जब हमारे परिवार ने भी 300किलोमीटर की एक लंबी यात्रा अपनी पत्नी को अस्पताल पहुंचाने के लिए खींचा था। तभी उस समय की डीजल पंप स्टेशन और दुकानें अलग ही थीं। अब ऐसा नामुमकिन नहीं है। मेरे बचपन की यादें जारी हैं जब हम बाजारों से लेकर घर तक अपने पत्नियों को खींचकर लाते थे। वह तो रिक्शा चलाने की कला भी जानते थे, आज देख रहे हैं कि कैसे पुरुष 70 की उम्र में भी रिक्शा चला कर अपनी पत्नी को सुरक्षित पहुंचाते हैं। यह तो समाज की बदलाव की बात है।
 
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