चार पुरुषार्थ किताब हमें बताती है कि जिंदगी सिर्फ पैसे कमाना या मजे करना नहीं, बल्कि सद्गुण, समृद्धि, प्रेम और मुक्ति का संतुलन है। यहां आपको इस किताब के मुख्य बिंदु दिए गए हैं:
धर्म- दुनिया को आपसे क्या चाहिए। ये वो है जो दुनिया को आपसे चाहिए। जैसे कोई टीचर बनना चाहता है क्योंकि उसे पढ़ाना पसंद है और समाज को अच्छे शिक्षक चाहिए।
अर्थ- जिंदगी चलाने के लिए जरूरी समृद्धि। पैसे के बिना जिंदगी मुश्किल हो जाती है। अर्थ यानी वो समृद्धि जो आपको, आपके परिवार और समाज को सपोर्ट करे।
काम- जो आप पसंद करते हैं, उसे एंजॉय करें। काम यानी इच्छाएं, प्रेम, सेंसुअल खुशियां। किताब कहती है कि इच्छाओं को दबाना नहीं, उन्हें सही तरीके से पूरा करना। लेकिन धर्म और अर्थ को नुकसान पहुंचाए बिना।
मोक्ष- असली आजादी और खुद को जानना। अंत में मोक्ष- यानी मुक्ति। सारे तनाव, डर और बंधनों से आजाद होना। अपना असली स्वरूप समझना। किताब कहती है कि जब धर्म, अर्थ और काम बैलेंस हो जाते हैं, तो मोक्ष खुद आता है।
धर्म- दुनिया को आपसे क्या चाहिए। ये वो है जो दुनिया को आपसे चाहिए। जैसे कोई टीचर बनना चाहता है क्योंकि उसे पढ़ाना पसंद है और समाज को अच्छे शिक्षक चाहिए।
अर्थ- जिंदगी चलाने के लिए जरूरी समृद्धि। पैसे के बिना जिंदगी मुश्किल हो जाती है। अर्थ यानी वो समृद्धि जो आपको, आपके परिवार और समाज को सपोर्ट करे।
काम- जो आप पसंद करते हैं, उसे एंजॉय करें। काम यानी इच्छाएं, प्रेम, सेंसुअल खुशियां। किताब कहती है कि इच्छाओं को दबाना नहीं, उन्हें सही तरीके से पूरा करना। लेकिन धर्म और अर्थ को नुकसान पहुंचाए बिना।
मोक्ष- असली आजादी और खुद को जानना। अंत में मोक्ष- यानी मुक्ति। सारे तनाव, डर और बंधनों से आजाद होना। अपना असली स्वरूप समझना। किताब कहती है कि जब धर्म, अर्थ और काम बैलेंस हो जाते हैं, तो मोक्ष खुद आता है।