बुक रिव्यू- सफलता के लिए जरूरी चार पुरुषार्थ: धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष की मॉडर्न व्याख्या, भारतीय दर्शन समझना है तो ये किताब पढ़ें

चार पुरुषार्थ किताब हमें बताती है कि जिंदगी सिर्फ पैसे कमाना या मजे करना नहीं, बल्कि सद्गुण, समृद्धि, प्रेम और मुक्ति का संतुलन है। यहां आपको इस किताब के मुख्य बिंदु दिए गए हैं:

धर्म- दुनिया को आपसे क्या चाहिए। ये वो है जो दुनिया को आपसे चाहिए। जैसे कोई टीचर बनना चाहता है क्योंकि उसे पढ़ाना पसंद है और समाज को अच्छे शिक्षक चाहिए।

अर्थ- जिंदगी चलाने के लिए जरूरी समृद्धि। पैसे के बिना जिंदगी मुश्किल हो जाती है। अर्थ यानी वो समृद्धि जो आपको, आपके परिवार और समाज को सपोर्ट करे।

काम- जो आप पसंद करते हैं, उसे एंजॉय करें। काम यानी इच्छाएं, प्रेम, सेंसुअल खुशियां। किताब कहती है कि इच्छाओं को दबाना नहीं, उन्हें सही तरीके से पूरा करना। लेकिन धर्म और अर्थ को नुकसान पहुंचाए बिना।

मोक्ष- असली आजादी और खुद को जानना। अंत में मोक्ष- यानी मुक्ति। सारे तनाव, डर और बंधनों से आजाद होना। अपना असली स्वरूप समझना। किताब कहती है कि जब धर्म, अर्थ और काम बैलेंस हो जाते हैं, तो मोक्ष खुद आता है।
 
मुझे पुरुषार्थ किताब बहुत पसंद है, यह हमेशा से मेरे लिए सही थी। लेकिन अब देखकर आश्चर्य हुआ है कि इतनी ज्यादा लोग इसके बारे में नहीं जानते। मुझे लगता है कि यह समय है जब हमें अपने जीवन को संतुलित करने की जरूरत है। पैसे कमाने और मजे करने की जगह हमें सद्गुण, समृद्धि, प्रेम और मुक्ति का ध्यान रखना चाहिए। यह किताब हमें दिखाती है कि जिंदगी में सबसे महत्वपूर्ण चीजें क्या हैं और कैसे हम इन्हें अपने जीवन में शामिल कर सकते हैं। मुझे लगता है कि यह एक बहुत ही जरूरी किताब है जिसे अधिक से अधिक लोग पढ़ना चाहिए। 📚💡
 
किताब बहुत अच्छी लगती है, लेकिन यह सोचते समय कि हमारी दुनिया और हमारी इच्छाओं से जुड़ी हुई है या हमें यह मुश्किल स्थिति में पड़ने की जरूरत नहीं? पैसे कमाने के लिए हम कितने परेशान हो रहे हैं और यह धार्मिक समाज के लिए सही नहीं है। 🤔

मुझे लगता है कि आजकल की दुनिया में इच्छाओं को दबाना भी सुधरने लगा है, लेकिन हमें यह सोचते समय जरूरी है कि धर्म, अर्थ और काम का सही संतुलन कैसे बनाया जाए। किताब में कहा गया है कि जब हमारी इच्छाओं को दबाने की जरूरत नहीं होती तो हमारी आजादी खुद आती है, लेकिन यह सोचते समय कि हमारे आसपास की दुनिया कैसे प्रभावित हो रही है। 🌎
 
मुझे लगता है कि आजकल लोग अपने जीवन में मायावती बनाने लगे हैं। सब कुछ सिर्फ पैसे और मजे करना ही, बस यह नहीं हो सकता। हमें अपने जीवन को एक बैलेंस देना चाहिए, ताकि हमारे मन, विचारों और शरीर में शांति हो।
 
किताब का मुख्य प्रेरणा ठीक है, लेकिन दुनिया वास्तव में क्या चाह रही है? यहाँ नाम-निशान से भरे हुए प्रश्न नहीं जोड़े गए, बस एक ही दृष्टिकोण। और अर्थ क्यों इतना महत्वपूर्ण बनाया गया है? किताब में कहा गया है कि धर्म और काम समृद्धि से बेहतर नहीं, बल्कि उन्हें संतुलित करना है। लेकिन पैसे कमाना क्यों इतना महत्वपूर्ण लगता है?
 
मुझे ऐसा लगता है की यह किताब हमें सच्ची जिंदगी के संतुलन की जरूरत है। अगर हमारे पास धर्म क्यों न हो, अर्थ क्यों न हो और हमारे पास खुशियां क्यों न हो।
 
पैसे कमाने की शुरुआत करना बहुत जरूरी है, लेकिन याद रखो कि पैसा सिर्फ एक साधन है, न कि लक्ष्य 🤑। जिंदगी में ऐसे कई चीजें होती हैं जिनकी बात यह किताब करती है, और बहुत जरूरी है कि उनको सही तरीके से समझा जाए।
 
मुझे लगता है कि ये पुरुषार्थ तीनों का संतुलन बनाना बहुत जरूरी है, लेकिन कुछ लोगो को यह समझने में दिक्कत होती है कि धर्म और अर्थ को कैसे एक दूसरे से अलग रखा। जैसे किसी को पता होना चाहिए कि उसे पढ़ाना (धर्म) पसंद है, लेकिन वह नहीं चाहता कि उसके बच्चों को भी ऐसा करना पड़े। अर्थ सिर्फ पैसे कमाने की बात नहीं है, बल्कि जिंदगी चलाने के लिए जरूरी है। 😊

काम और मोक्ष के बीच एक संतुलन होना बहुत जरूरी है, लेकिन कभी-कभी लोगो अपनी इच्छाओं को दबाते हैं और तनाव में पड़ जाते हैं। मुझे लगता है कि जब हमारे पास धर्म, अर्थ और काम सभी संतुलित होते हैं, तो फिर मोक्ष खुद आता है। अपने जीवन में एक संतुलन बनाना बहुत जरूरी है, नहीं तो सब कुछ बर्बाद हो जाता है 🤔
 
मुझे ऐसी किताबें बहुत पसंद हैं जो हमें जिंदगी के लक्ष्यों के बारे में सोचने के लिए प्रेरित करती हैं। चार पुरुषार्थ नामक किताब तो विशेष है, इसमें यह कहा गया है कि धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष हमें जिंदगी के संतुलन की जरूरत है। अगर इन चारों को सही तरीके से बैलेंस रखें, तो जिंदगी खुशियों से भर जाती है 🌞

मुझे लगता है कि यह किताब हमें यह याद दिलाती है कि जिंदगी में पैसा कमाना और मजे करना जरूरी है, लेकिन अगर इन चारों को संतुलित रखें, तो जीवन खुशियों से भर जाता है। 😊
 
🤔 तो मेरा विचार यह है कि चार पुरुषार्थ किताब सिर्फ सोच-विचार करने वालों के लिए जरूरी है। जैसे कोई स्टूडेंट हो और वह चाहता है कि अपने अध्ययन में आसानी न आए। लेकिन अगर हमारे पास धन नहीं है, तो क्या करें? 🤷‍♂️ मुझे लगता है कि हमें अपने आप को समझने पर ध्यान देना चाहिए।

अगर हम अपने धर्म, अर्थ और काम को सही संतुलन में लाते हैं, तो फिर जीवन खुशियों से भरा हुआ हो जाएगा। जैसे कोई खेती करता है और उसके पति-पत्नी को भी खेती में मदद करनी चाहिए।
नए-नए स्किल्स सीखने पर ध्यान देना चाहिए, जैसे कंप्यूटर सर्फिंग या फोटोग्राफी करना। अगर हमारे पास धन नहीं है, तो भी इनमें से कोई भी शुरू कर सकते हैं।
 
मैंने कल दिल्ली के यूफोरिया स्टेडियम में एक फुटबॉल मैच देखा था, बहुत मजेदार था। मैच में दोनों टीमें अच्छी तरह से खेल रही थी, लेकिन अंत में हमारी टीम ने जीत हासिल की। मुझे लगा कि फुटबॉल में तीन सबसे महत्वपूर्ण चीजें हैं - दोस्ती, स्पोर्ट्स, और खाना। खाने को बिना खेलना तो दुःखी होता है 🍴
 
मैं तो पूरी तरह से सहमत हूँ कि जिंदगी में धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष का संतुलन होना जरूरी है। अगर हमारे पास पर्याप्त पैसा नहीं है तो हमारे लिए जीना मुश्किल हो जाता है, लेकिन अगर हमारे पास पर्याप्त पैसा है और हम उसे सही तरीके से इस्तेमाल करें तो हम अपने परिवार की मदद कर सकते हैं और समाज में भी अच्छा योगदान दे सकते हैं।

लेकिन जिंदगी में सबसे जरूरी बात यह है कि हमें खुशी मिले, जब हम अपने काम में लगे हों तो हमें खुशी महसूस होती है। लेकिन अगर हमारा धर्म और अर्थ सही से नहीं जाने तो हमें अपने काम को भूलने की चेतावनी मिल सकती है जैसे किसी टीचर को जब उसे पढ़ाने में खुशी नहीं होती।
 
मुझे लगता है कि यह किताब हमारे जीवन के संतुलन के बारे में बहुत महत्वपूर्ण बातें बताती है 🤔। धर्म, अर्थ और काम तीनों ही हैं जो हमारे जीवन में जरूरी हैं। लेकिन जब इन तीनों का संतुलन नहीं होता, तो हमारा जीवन पूरी तरह से खाली नहीं होता।

मुझे लगता है कि अर्थ और धन हमारे जीवन में बहुत जरूरी हैं, लेकिन अगर हम उनके लिए ही जीने लगते हैं, तो यह हमारे लिए उपयोगी नहीं है। 🤑 हमें अपने अर्थ और धर्म का संतुलन बनाए रखना चाहिए, ताकि हम अपने काम और मोक्ष को भी प्राप्त कर सकें।

किताब कहती है कि इच्छाओं को दबाना नहीं, उन्हें सही तरीके से पूरा करना है, लेकिन धर्म और अर्थ को नुकसान पहुंचाए बिना। यह एक बहुत ही मुश्किल तारीख है, लेकिन अगर हम इसे समझेंगे, तो हम अपने जीवन को बहुत सारा अर्थ दे सकते हैं। 💡
 
[Image of a person meditating with a smile] 😌

[Video of a clock with three hands - Dharm (Spirituality), Artha (Wealth), and Kama (Desire) balancing each other] ⏰

[A person holding a suitcase with a question mark on it, with a caption "Journey of Life"] 🧳
 
मैंने भी पढ़ी है कि चार पुरुषार्थ किताब बहुत ही उपयोगी हो सकती है, लेकिन मुझे लगता है कि इसे हमें जिंदगी से ज्यादा बात करना नहीं चाहिए। यह किताब ज्यादा ध्यान केंद्रित करती है कि धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को कैसे संतुलित करें, लेकिन मुझे लगता है कि जिंदगी के हर दिन को खुशियों और संघर्षों के साथ समझना भी बहुत जरूरी है। 👍
 
मैंने पढ़ा है कि यह चार पुरुषार्थ किताब बहुत ही अच्छी है, लेकिन मुझे लगता है कि काम को थोड़ा ज्यादा दिलासा दिया गया है। यह कहता है कि इच्छाओं को दबाना नहीं, उन्हें सही तरीके से पूरा करना, लेकिन मुझे लगता है कि कुछ इच्छाएं तो फिर भी नुकसानदायक हो सकती हैं। और धर्म और अर्थ को बैलेंस रखने पर ध्यान देना अच्छा है, लेकिन मुझे लगता है कि यह बहुत ही जटिल हो गया है। मैं सोचता हूँ कि जिंदगी में जितना हसीना होता है उतना ही तनाव भी।
 
मुझे लगने लागे कि लोग आजकल सिर्फ पैसे कमाने पर ध्यान देते हैं... और खुशियां मिलने के लिए एक-दूसरे पर निश्चित कर देते हैं 🤔. लेकिन जिंदगी वास्तव में चार पुरुषार्थों का संतुलन है: धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष। अगर इनमें से कोई भी बैलेंस नहीं होता, तो सब कुछ टूट जाता है। मुझे लगता है कि हमें अपने जीवन में एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाना चाहिए, न कि एक ही चीज पर ध्यान केंद्रित करना।
 
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