मेरे दोस्त, आज की ज़िंदगी में हम सभी थक-थक कर रहे हैं और सब कुछ पैसे कमाने और मज़े करने पर ही ध्यान देते हैं। लेकिन मुझे लगता है कि यह सच नहीं है। ज़िंदगी का अर्थ केवल पैसे कमाने या मज़े करने में नहीं है, बल्कि हमारे अंदर तो सद्गुण, समृद्धि, प्रेम और मुक्ति का संतुलन होना चाहिए।
मैंने 'चार पुरुषार्थ' नामक किताब पढ़ी है जो हमें यह बात बताती है। इसके माध्यम से हम अपनी ज़िंदगी को और भी अर्थपूर्ण बना सकते हैं। अगर हम सद्गुण, समृद्धि, प्रेम और मुक्ति को एक साथ लेकर चलें, तो जीवन में खुशियाँ और अर्थ निकलने वाले हैं ।
इसलिए, मेरी बात सुनिए, दोस्तों, ज़िंदगी का अर्थ केवल पैसे कमाने या मज़े करने में नहीं है, बल्कि हमारे अंदर तो सद्गुण, समृद्धि, प्रेम और मुक्ति का संतुलन होना चाहिए।