बुक रिव्यू- सफलता के लिए जरूरी चार पुरुषार्थ: धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष की मॉडर्न व्याख्या, भारतीय दर्शन समझना है तो ये किताब पढ़ें

आज भी जिंदगी में चार पुरुषार्थ हैं, धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष। लेकिन कैसे इन्हें अपना सकते हैं? किताब 'चार पुरुषार्थ' ने इस सवाल का उत्तर दिया।

हिंदू दर्शन की चार खास बातें-
1. धर्म: जो भी हम करते हैं, उसका एक फायदा या लाभ होता है। जैसे खाना खाते समय अगर आपका परिवार भी मौजूद है तो यह आपके लिए एक अच्छा शिक्षण का संस्थान है।
2. अर्थ: पैसे और संपत्ति सिर्फ मांग नहीं हैं, बल्कि जीवन के आवश्यक चीजें भी हैं। अगर आप खुद को समझना चाहते हैं तो यह महत्वपूर्ण है।
3. काम: हर इंसान ने अपना काम या पेशा चुन लिया होता है। जिसमें खुशी और संतुष्टि मिलती है, वही हमारा सही रास्ता है।
4. मोक्ष: मोक्ष अर्थात् अंतिम समाधि या शांति को समझने की जरूरत है। जब हम अपने जीवन का संतुलित और अर्थपूर्ण हिस्सा समझ लेते हैं, तो खुशियों और सफलताओं की दिशा में आगे बढ़ते हैं।

यह किताब भारतीय परंपराओं से प्रेरित होकर बताती है कि इन चारों को अपनाकर हम तनाव से मुक्त हो सकते हैं और अपनी क्रिएटिविटी भी जगा सकते हैं।

इस किताब के लेखक हेक्टर गार्सिया और फ्रांसेस्क मिरालेस। इस किताब का अनुवादकर्ता आशुतोष गर्ग है। 'चार पुरुषार्थ' भारतीय दर्शन पर आधारित है, जो कि हर इंसान की जिंदगी का आधार है।

इस किताब में लिखा गया है कि अगर आप इन चारों चीजों को अपनी जिंदगी में बैलेंस करेंगे, तो आपकी जिंदगी संतुलित और अर्थपूर्ण होगी। यह किताब न केवल खुशियों और सफलताओं की दिशा में आगे बढ़ने के तरीके बताती है, बल्कि शांति और समृद्धि भी मिलती है।
 
मुझे लगता है कि जिंदगी में चार पुरुषार्थ बहुत जरूरी हैं लेकिन ये सीखना बहुत आसान नहीं है, क्योंकि यह हमारे व्यक्तिगत विचारों और शैलियों पर भी निर्भर करता है। मेरा विचार है कि इन चारों को अपनाकर लोग खुशी, संतुष्टि, और सफलता प्राप्त कर सकते हैं लेकिन यह जरूरी नहीं है कि हम सभी लोग इनका सही तरीके से समझें। मुझे लगता है कि 'चार पुरुषार्थ' किताब ने बहुत अच्छी तरह से इन चीजों को समझाया है और यह भारतीय परंपराओं के बारे में जानने के लिए एक अच्छा संसाधन है। 😊
 
अरे दोस्त, यह 'चार पुरुषार्थ' किताब तो हमारे राष्ट्रपति से लेकर आम आदमी तक सबकुछ समझाने वाली है 🤓। अगर हम इन चारों को सही तरीके से अपनाएं, तो फिर हमारा देश भी समृद्ध और शांतिपूर्ण होगा। लेकिन सवाल यह है कि कैसे हम इन्हें वास्तव में अपना सकते हैं? क्या हमारी सरकार इस बात पर ध्यान दे रही है? अगर नहीं, तो फिर क्यों? 🤔

मुझे लगता है कि हमें अपने समाज में यह संतुलन बनाने की जरूरत है। अगर हम खुद पहले अपने जीवन में अर्थ और शांति का संतुलन लाते हैं, तो फिर देश के लिए बाकी कुछ आसान होगा। 🙏 और सबसे महत्वपूर्ण, यह सुनिश्चित करना कि हमारी सरकार भी इसी रास्ते पर चल रही है। अगर नहीं, तो हमें चुनाव में अपनी आवाज उठानी होगी। मतदान करना जीवन का अधिकार है, और इसका सही उपयोग करके हम देश को बेहतर बना सकते हैं।
 
मैंने पढ़ा है कि हमारे जीवन को चारों पुरुषार्थों से जोड़ना चाहिए, लेकिन यह सवाल उठता है कि कैसे इन्हें अपना सकते हैं। मेरी राय में, धर्म का अर्थ है जीवन के हर पहलू से जुड़ा होना। जब हम अपने परिवार के साथ समय बिताते हैं, तो हम खाना खाते समय अपने परिवार के साथ समय बिताते हैं और इससे हमें शिक्षा मिलती है। अर्थ का अर्थ है जीवन के आवश्यक चीजों को समझना। अगर हम खुद को समझते हैं, तो हम अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करते हैं। काम का अर्थ है जिसमें हम खुशी और संतुष्टि मिलती है। जब हम अपने करियर में खुश होते हैं, तो हमारे जीवन में संतुलन बनता है। और अंत में, मोक्ष का अर्थ है शांति और समृद्धि। जब हम अपने जीवन को संतुलित और अर्थपूर्ण बनाते हैं, तो हम खुशियों और सफलताओं की दिशा में आगे बढ़ते हैं। 😊
 
मैंने इस किताब 'चार पुरुषार्थ' पढ़ी थी, जो तो बहुत रोचक है 🤔, लेकिन मेरा ध्यान सबसे ज्यादा धर्म पर रहा। मेरी बाई ने मुझसे कहा कि अगर हम अपने जीवन में धर्म नहीं करते तो हमारी शादी में कोई समस्या आ सकती है, लेकिन मैंने उसे बताया कि अगर मैं खाना पकाता हूँ और बिल्कुल भी अपनी पत्नी के द्वारा कहे के अनुसार नमक से मसाले नहीं डालता, तो शादी में कोई समस्या नहीं होगी। 🤷‍♂️

मेरी बहन की शादी हुई और वह बहुत खुश थी, लेकिन जब हमारी बेटी का जन्म हुआ तो उसके लिए भी यही सवाल पैदा हुआ। मैंने अपनी पत्नी से कहा कि अगर हम अपने बच्चे के लिए खाना नहीं बनाते, तो वह शायद अपने सहेलियों के घर जाकर खायेगी। लेकिन जब हमारी बेटी बड़ी हुई, तो उसने मुझे बताया कि अगर मैं अपने बच्चे को खाना नहीं देता, तो वह मुझसे दूर हो जाएगी, और मैंने कहा कि यह सही नहीं है। 🤦‍♂️

लेकिन इस किताब ने मुझे सिखाया कि अगर हम अपने जीवन में धर्म, अर्थ, काम, और मोक्ष को संतुलित करते हैं, तो शायद हमारी परिवार के सभी सदस्य खुश रहेंगे।
 
मुझे लगता है कि आजकल के युवाओं को जिंदगी के संतुलन पर ध्यान देने की जरूरत है। हमारी पीढ़ी बहुत ज्यादा दबाव में रहती है, हमें अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए हर मिनट बिताना पड़ता है 🕒️। लेकिन अगर हम ध्यान से नज़र डालते हैं, तो हमें पता चलता है कि जिंदगी में संतुलन बनाए रखने से हमें खुशियों और सफलताओं की दिशा में आगे बढ़ने के लिए संगठित रूप से प्रेरित होने का मौका मिलता है। 🙏

ऐसा लगता है कि अगर हम अपने जीवन को चार पुरुषार्थों की दिशा में लेते हैं, तो हम अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के साथ-साथ खुशियों और सफलताओं की दिशा में भी आगे बढ़ सकते हैं। 👍
 
ਮैंनੂੰ ਇਸ ਕਿਤਾਬ 'ਚਾਰ ਪੁਰੂਸ਼ਾਰਥ' ਦੀ ਭਾਵਨਾ ਖੁੱਸਦੀ ਹੈ। ਜੇ ਆਮ ਤੌਰ 'ਤੇ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ, ਤਾਂ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਵਿੱਚ ਧਰਮ, ਅਰਥ, ਕਾਮ ਅਤੇ ਮੋਖ ਹੁੰਦੇ ਹਨ। ਪਰ ਇਸ ਨੂੰ ਆਪਣਾ ਵਿਕਲਪ ਨਾਹ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ। ਅਸੀਂ ਕਿਉਂ ਇਹਨਾਂ ਚੀਜ਼ਾਂ ਦਾ ਵਿਹਾਰ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹਾਂ?

ਮੈਂ ਆਪਣੇ ਲਈ ਇਹ ਸੁਧਾਰ ਕਰਨ ਵਿੱਚ ਸਫਲ ਹੋ ਗਏ ਹਾਂ। ਅੱਜ ਭੀ, ਮੈਂ ਆਪਣੇ ਦਿਨਾਂ ਦੀ ਬੜੀ ਸੁਧਰੀ ਤਲਵਾਰ ਚੱਲਾਉਂਦਾ ਹਾਂ।

ਇਸ ਕਿਤਾਬ ਨੇ ਮੈਨੂੰ ਯਾਦ ਕਰਵਾਇਆ ਹੈ ਅਤੇ ਖ਼ਾਲੀ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਦਾ ਮਾਣ ਕੱਢਣ ਬਾਰੇ।
 
मैंने इस किताब को पढ़ा है तो फिर भी सोचता हूँ कि अर्थ क्या है? पैसे की जरूरत होती है, लेकिन जीने का आनंद भी मिलता है। मेरा पता लगता है कि शायद यह किताब सही कह रही है कि इन चारों पर ध्यान देना हमें संतुलित जीवन देता है, लेकिन मैं अभी भी सोचता हूँ कि धर्म क्या है? 🤔
 
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