ब्लैकबोर्ड-इंटरनेशनल टीटी प्लेयर की पत्नी गहने बेचकर घर चला रही: पति की मौत के बाद नौकरी का वादा किया था, 4 साल से दफ्तरों के चक्कर लगा रही

बीती पाँच साल पूर्व मेरे पति की मौत हो गई, आज तक नौकरी नहीं मिली।

मैं 39 साल की, 85% हैंडीकैप्ड हूं। जब पहले पति की मौत हुई तो उसकी जगह नौकरी देने का वादा किया गया था, लेकिन नौकरी नहीं मिली।

मेरे दो बच्चे हैं, एक 6 साल का और एक 16 साल का। घर चलाने के लिए गहने-जेवर और अपनी कार तक बेचकर भी खर्च चलेगा। अधिकारियों से नौकरी मांगना मेरा हक नहीं है क्या?
 
क्या तो ये देश तो माफ़ कर दे। 85% हैंडीकैप्ड लेकिन नौकरी नहीं मिलेगी, परिवार चलाने के लिए कुछ भी करना पड़ेगा। यह तो हमारे बच्चों का भविष्य कैसे बनाएगा? मुझे लगता है कि देश में विकल्पों की कमी नहीं है, बस हमें खुद पर भरोसा करना चाहिए।

ज़रूर, ज़रूर, हमें नौकरी के लिए लड़ना नहीं चाहिए, बल्कि अपने अधिकारों के बारे में जागरूक होना चाहिए। शायद तो ये देश खुद ही सुधरेगा, फिर तो हम भी आराम कर सकते हैं।
 
अगर वह वादा पूरा हो जाए तो यह बहुत अच्छी बात होगी, लेकिन ऐसा लगता है कि सब कुछ ठीक से चल नहीं रहा। मैं समझती हूँ कि अधिकारी वादे के पीछे खड़े होते हैं, लेकिन अभी तक कोई नौकरी नहीं मिली। घर चलाने के लिए हमें बहुत परेशान करना पड़ रहा है। मुझे उम्मीद है कि आगे अच्छी बातें होंगी, लेकिन अब जल्दी से नौकरी की तलाश करूँगी।
 
मुझे लगता है कि यह एक बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है। लेकिन जैसे ही मैं इस बात पर विचार करता हूं, तो मुझे ऐसा लगने लगता है कि कुछ बड़ा खेल चल रहा हो। यह एक तरह से सामाजिक न्याय की समस्या नहीं है, बल्कि एक राजनीतिक प्रयास।

क्या यह तो एक मुकदमा नहीं बनेगा? नौकरी देने के लिए बोलते समय सरकार को अपनी नीतियों और नियमों को सावधानीपूर्वक समझने की जरूरत होगी। हमें उम्मीद करनी चाहिए कि सरकार हमेशा सच्चाई के प्रति तैयार रहेगी, लेकिन मुझे लगता है कि यहाँ कुछ गड़बड़ी हो सकती है।
 
मुझे बहुत दुःख हुआ जब मैंने पढ़ा कि ये महिला अपने पति की मौत के बाद भी नौकरी पाने का उम्मीद करती रही। जानवरों की तरह खोए सिर्फ किसान नहीं है लेकिन उन्हें भी सही सलाह और समर्थन देने की जरूरत है। ये महिला की कहानी हमें सोचने पर मजबूर कर रही है कि क्या हम अपने देश के ऐसे लोगों के प्रति कितनी सहानुभूति दिखाते हैं।
 
😔 यह बहुत दुखद कहानी है। मुझे लगता है कि सरकार और आर्थिक व्यवस्था को बदलने की जरूरत है, ताकि ऐसे लोगों को भी रोजगार मिल सके। 85% हैंडीकैप्ड होने के बावजूद, यह बिल्कुल नहीं सही है कि उन्हें नौकरी नहीं मिली। सरकार को नौकरियों को आवंटित करने की प्रक्रिया में सुधार करना चाहिए और ऐसे लोगों को भी रोजगार देना चाहिए जिनके पास कोई उपाय नहीं है। 🤝
 
मैं तो इन दिनों युवाओं की स्थिति सोचकर परेशान रहती हूँ, जिनके पति और बच्चे अपने घर चलाने के लिए कुछ नहीं कर सकते। यह जरूरी है कि हमें सरकार की योजनाएँ समझनी चाहिए और उनका सही उपयोग करना चाहिए। यह माता-पिता को नौकरी देना चाहिए जिनके बच्चे हाथों से कुछ नहीं कर सकते। इससे बेहतर शिक्षा प्राप्त होगी, व्यवसाय भी कर सकेंगे।
 
मुझे लगता है कि यह बहुत बुरा लग रहा है, लेकिन फिर भी मैंने यह महसूस किया है कि सब कुछ ठीक है। मेरा पति नौकरी नहीं देने का वादा क्यों था, और अब उसकी जगह मुझे क्यों नौकरी मिलनी चाहिए? मैं 85% हैंडीकैप्ड हूं, लेकिन फिर भी मैंने सोचा है कि क्या मेरे बच्चों को अच्छी शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था मिलनी चाहिए? क्या यह सब मेरे पति द्वारा दिया गया वादा नहीं था, लेकिन अब मुझे उस पर भरोसा करना है?
 
अगर सरकार द्वारा ऐसे व्यक्ति को नौकरी देने का वादा किया गया तो फिर वह वादा पूरा करना चाहिए। यहां 85% हैंडीकैप्ड महिला के लिए जिंदगी बहुत मुश्किल है। उसके पति की मौत हुई और अब उसकी परवरिश के लिए बोझ कैसे उठाएगी?
 
बुरी तरह फंसी लड़की है यह, पाँच साल से बिना नौकरी मिली, तो चिंतित हूँ। 85% हैंडीकैप्ड होने के बावजूद भी काम नहीं मिला, यह सरकार की जिम्मेदारी है। माँ के बच्चों की देखभाल करना मुश्किल हो सकता है, तो स्थानीय संगठनों और सरकार को एक साथ मिलकर मदद करनी चाहिए।
 
આ નિર્દોષ વાત કે શામલતા હેઠળ બચપનથી જ ધિક્કાર લેવાય છે. અંગ સંબંધિત દુષ્કાળ ઉપનિષત નથી, કેમકે આ વિશય લોકસાહસિક અવગુણ છે. જ્યારે તમને પૂરી શુભ-સ્વભાવ હશે અને બચ્ચાઓ ઉગાડતાં પણ જીવનમાં રહેલા છો, ત્યારે એકબિચારથી આપણે જીવનના સુખ-દુઃखમાં ઉલટો અહીં.
 
मैं समझ गया, यह तो बहुत दुखद कहानी है 🤕। पूर्वजों की मेहनत के बाद भी आज तक नौकरी नहीं मिल रही तो बिल्कुल सही क्या होगा? पर सरकार को और अधिकारियों से कोई जवाब कहां दूं? 🤔

मेरी तरह 85% हैंडीकैप्ड लोगों को नौकरी मिलनी चाहिए, यह एक अधिकार है न कि एक सहन करना चाहिए। इससे हमारे बच्चों का भविष्य सुरक्षित हो और वे अच्छी शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे।

सरकार को जरूर ऐसे कानून बनाए जाएं जिससे हमारे जैसे लोगों को नौकरी मिले। हमें अपने अधिकारों के बारे में आवाज उठानी चाहिए।
 
मुझे बहुत दुख हुआ जब मैंने पढ़ा ki आपको पति की जगह नौकरी नहीं मिली। 85% हैंडीकैप्ड होने के नाते तो आपको नौकरी मिलनी चाहिए। घर चलाना सीधा नहीं है, तो मुझे विश्वास है कि आप अपने बच्चों की शिक्षा और खुशहाली पर ध्यान दें। सरकार को आपके अधिकारों को ध्यान में रखते हुए नौकरी देना चाहिए।
 
ये दुखद कहानी बहुत गंभीर है। हमेशा ऐसी कई महिलाओं को पति की मौत के बाद नौकरी देने का वादा मिलता है, लेकिन जैसे ही वे अपनी स्थिति बताती हैं तो सब कुछ टूट जाता है।

गृहस्वामी बनने का सपना खुद रोती है और नौकरी देने का वादा करते हुए भी कोई कार्रवाई नहीं करता। यह बहुत गंभीर समस्या है जिस पर सरकार और नौकरियों में लोगों को ध्यान देने की जरूरत है।
 
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