बेटा, यह तो दुखद बात है जो हुआ है। लोगों के दिल में एकता और सहानुभूति नहीं होनी चाहिए, बस रास्ता पहचानना चाहिए। ये देश हमेशा से बहुत विविध था, लेकिन अब यह ऐसा लगता है जैसे हमारी समृद्धि में भेदभाव किया जा रहा है।
मुझे लगता है कि हमें अपने बच्चों को देश के बारे में सिखाना चाहिए, न कि उन्हें अलग-अलग देशों की तुलना करनी चाहिए। हमें खुशियों और दुखों को समझना चाहिए, न कि उन्हें पहचानना चाहिए।
मेरे अनुभव से मैं कहता हूँ, जब हम एक-दूसरे पर भेदभाव नहीं करते, तो दुनिया भी हमारे प्रति अधिक करुणालु बन जाती है।