मुंबई में एक ऐसा परिवार जहां प्यार और साथियों की भावना सबसे बड़ी शक्ति है। 75 वर्षीय बाबू की कहानी इस दिशा में एक नया मोड़ ला रही है, जो न केवल हमें आश्चर्यचकित कर रही है बल्कि हमें हौसले भी दे रही है।
बाबू की पत्नी को अस्पताल पहुंचने के लिए, उनका साथी ट्रॉली रिक्शा पर सवार होकर उसकी ओर बढ़ा। यह सोचावरण न केवल बाबू की मेहनत और धैर्य की कहानी बताता है, बल्कि पत्नी के प्रति उनकी अनमोल भावनाओं को भी उजागर करता है।
बाबू ने खुलकर कहा, "मैं अपनी ट्रॉली की ज़रूरत नहीं छोड़ सकता। वह मेरी रोज़ी-रोटी है। लेकिन जब भी मुझे थकान होती है, तो मैं अपनी पत्नी की ओर देखता हूं। उनकी देखभाल से मेरी हर थकान निकल जाती है।"
इस प्यारी और मजबूत जोड़ी की कहानी हमें बताती है कि कैसे प्रेम और सहयोग एक परिवार को सफल बना सकता है, चाहे उसका स्थिति कितनी भी कड़हे.
बाबू की पत्नी को अस्पताल पहुंचने के लिए, उनका साथी ट्रॉली रिक्शा पर सवार होकर उसकी ओर बढ़ा। यह सोचावरण न केवल बाबू की मेहनत और धैर्य की कहानी बताता है, बल्कि पत्नी के प्रति उनकी अनमोल भावनाओं को भी उजागर करता है।
बाबू ने खुलकर कहा, "मैं अपनी ट्रॉली की ज़रूरत नहीं छोड़ सकता। वह मेरी रोज़ी-रोटी है। लेकिन जब भी मुझे थकान होती है, तो मैं अपनी पत्नी की ओर देखता हूं। उनकी देखभाल से मेरी हर थकान निकल जाती है।"
इस प्यारी और मजबूत जोड़ी की कहानी हमें बताती है कि कैसे प्रेम और सहयोग एक परिवार को सफल बना सकता है, चाहे उसका स्थिति कितनी भी कड़हे.