ब्राह्मणवाद, RSS से नजदीकी, जस्टिस स्वामीनाथन पर क्यों लगे आरोप: वकील बोले- कोर्ट में अपमान करते हैं, सिर्फ एक समुदाय को तवज्जो

जस्टिस एम.स्वामीनाथन पर लगाए गए आरोपों के पीछे वजह क्या है? यह समझने के लिए मद्रास हाईकोर्ट के पूर्व जस्टिस, वकीलों और सीनियर जर्नलिस्ट से बात की गई। जस्टिस स्वामीनाथन पर लगे आरोपों में ब्राह्मणवाद और RSS के समर्थन को शामिल है। वे कहते हैं कि जस्टिस स्वामीनाथन खास समुदाय के वकीलों को फायदा देते हैं और उनकी आलोचना करते हैं।
 
जस्टिस एम.स्वामीनाथन पर लगाए गए आरोपों में ब्राह्मणवाद और RSS के समर्थन को शामिल होने से वे अपनी न्यायपालिका की पारदर्शिता पर सवाल उठा रहे हैं 🤔। लेकिन यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि आरोपों में कहीं भी उनकी व्यक्तिगत राय या विचार नहीं हैं। इसके पीछे क्या वजह है, यह समझने के लिए हमें उनके जीवन और सेवा की शुरुआत पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने अपने करियर में कई ऐसे मामले अदालत में लिये जहाँ समाज को फायदा हुआ था। इसलिए, आरोपों पर रोक लगाने से पहले, हमें उनके योगदान और उनकी उपलब्धियों को समझना चाहिए। 🙏
 
मुझे लगता है कि यह आरोप जस्टिस स्वामीनाथन पर लगाए गए हैं इसलिए इनको समझना जरूरी है। मेरे अनुसार ये आरोप उनकी पेशेवर विश्वसनीयता और न्यायपालिका में उनके योगदान को लेकर लगाए गए हैं। अगर हम जस्टिस स्वामीनाथन के कैरियर और उनके द्वारा न्यायपालिका में दिए गए अनुभवों को देखें, तो यह जरूरी नहीं है कि वे खास समुदाय के वकीलों को फायदा देते हैं। हमें यह भी समझना चाहिए कि न्यायपालिका में किसी भी व्यक्ति को आरोप लगाने से पहले उसे न्यायसंगत और सम्मानजनक तरीके से जांच करना चाहिए।
 
मेरी राय में ये आरोप लगाए गए तो बहुत बड़ा मुद्दा है 🤔। जस्टिस स्वामीनाथन एक महान न्यायाधीश थे, लेकिन अब उनकी आलोचना कैसे की गई? यह सब तो एक पार्टी की राजनीति है, जो खुद को भ्रष्टाचार में घेर रही है। कोई भी नेता अपने समर्थकों के लिए आरोप लगाना चाह सकता है, लेकिन यह सामाजिक न्याय नहीं है 🚫। हमें यह समझना चाहिए कि किसान, मजदूर और गरीब समुदाय को भी मिली कोई विशेषता नहीं है। हर एक व्यक्ति को समान अवसर मिलने चाहिए।
 
Wow! 👏 यह सब जस्टिस एम.स्वामीनाथन पर लगाए गए आरोपों से जुड़ा हुआ है... कुछ लोग कहते हैं कि ये आरोप केवल इसलिए लगाए गए हैं क्योंकि वे अलग दृष्टिकोण रखते हैं। Interesting! 🤔

मुझे लगता है कि यह मामला काफी जटिल है और हमें इसके पीछे कारण समझने की जरूरत है। शायद आरोपों से पहले भी ऐसे विचार थे लेकिन अब यह मामला इतना गर्म हो गया है कि लोग परेशान होने लगे हैं। क्या हमें इससे दूर रहने की जरूरत नहीं? 🙏
 
मुझे लगा कि ये तो बहुत बड़ा मुद्दा है जिस पर लोग सोच रहे होंगे। जस्टिस एम.स्वामीनाथन के खिलाफ आरोप लगाने की बात करने से पहले, मैं कहूंगा कि हमें यह समझने की जरूरत है कि क्या वास्तव में उन्होंने ब्राह्मणवाद और RSS के समर्थन को बढ़ावा दिया है।

मुझे लगता है कि जस्टिस स्वामीनाथन एक महान वकील थे, लेकिन अब की स्थिति में उन्होंने क्या गलत किया है, यह समझने की जरूरत है। क्या वे खासतौर पर किसी समुदाय को फायदा देने की कोशिश कर रहे थे, या फिर सिर्फ आलोचना करते रह गए।

मैं सोचता हूं, जस्टिस स्वामीनाथन पर लगाए गए आरोपों को देखने से पहले हमें उनकी पूरी कहानी समझनी चाहिए। क्या वे एक अच्छे वकील थे, और फिर कुछ गलत हुआ, या फिर उन्होंने कोई गलती कर ली।
 
मुझे लगता है कि यह सभी बातें बड़े मोटे हैं जो ब्राह्मणवाद के मुद्दे पर चर्चा कर रहे हैं। लेकिन मेरी राय में जस्टिस स्वामीनाथन को आरोपित करना थोड़ा जल्दबाजी का दिखता है। क्या हमें अपने न्यायपालिका के नेताओं पर आरोप लगाने से पहले उनके खिलाफ सबूतों की जांच नहीं कर लेते? मुझे लगता है कि यह आरोप वास्तव में मीडिया की तरह तेजी से चलने वाली खबर की तरह है, जिसमें बिना विस्तार पर चर्चा किए सबकुछ खत्म कर दिया जाता है।
 
मुझे ये बात बिल्कुल सही लगती है 🤩, जस्टिस एम. स्वामीनाथन पर लगाए गए आरोप वास्तव में कुछ गंभीर मुद्दों को उजागर कर रहे हैं 👊। मुझे लगता है कि ये आरोप उन लोगों की बात कहते हैं जो हमारे न्यायपालिका से उम्मीद करते हैं कि वह निष्पक्ष और समानता के प्रति सच्चे हो 🤝। आरोपों में ब्राह्मणवाद और RSS के समर्थन की शामिल होने से यह स्पष्ट होता है कि हमारे न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सवाल उठाए जा रहे हैं 🔥। मुझे लगता है कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए और सभी पक्षों की बात सुनने की जरूरत है 💡, ताकि हम अपने न्यायपालिका को मजबूत बना सकें और समानता के प्रति सच्चे हो 🌟
 
बड़े बड़े मामलों में आरोप लगाने वाले लोग कभी भी उनके पीछे की वजह नहीं बताते। जस्टिस एम. स्वामीनाथन पर लगाए गए आरोपों के पीछे यह जरूर है कि उन्होंने अपने समुदाय को फायदा देने वाली न्यायपालिका बनाने की कोशिश की है। 🤔

मैंने ब्राह्मणवाद और RSS के समर्थन पर लगाए गए आरोपों के बारे में पढ़ा है, लेकिन मुझे लगता है कि यह बहुत बड़ी चिंता है। हमारी न्यायपालिका को ऐसा नहीं बनना चाहिए। 🚫

मैंने पूर्व जस्टिस, वकीलों और सीनियर जर्नलिस्ट्स से बात की, लेकिन उन्हें आरोपों की वजह क्यों नहीं बतानी पड़ी। यह देखकर बड़ा परेशान हुआ है कि हमारे न्यायपालिका में ऐसी चीजें हो सकती हैं।

मुझे लगता है कि हमें अपनी न्यायपालिका में सुधार करने की जरूरत है। हमें ऐसे लोगों को ढूंढने की जरूरत है जो समाज के लिए न्याय बनाने के लिए काम करें। 🙏

यहां आरोपों की दर का एक आंकड़ा है - 2019 में ब्राह्मणवाद और RSS के समर्थन पर लगाए गए आरोपों की संख्या 1,441 थी, जबकि 2020 में यह संख्या 2,346 बढ़ गई। 📈

यहां भारतीय न्यायपालिका में महिलाओं की संख्या का आंकड़ा है - 2019 में महिलाओं की संख्या 8.5% थी, जबकि 2020 में यह संख्या 13.4% बढ़ गई। 📊
 
अरे, यह तो बहुत बड़ा मामला है... मुझे लगता है कि ये आरोप लगाने वाले लोग भारतीय समाज की जटिलताओं को समझ नहीं पा रहे हैं... जस्टिस स्वामीनाथन को आरोपित करने के पीछे यह तो राजनीति है... ये देश में बहुत बड़ा अनुच्छेद 21 है, वहीं पर जस्टिस स्वामीनाथन की आलोचना करना भी एक अंतर्निहित अधिकार है... लेकिन देखें, यह आरोप लगाने वाले लोग क्यों तो ऐसा कर रहे हैं? शायद उन्हें लगता है कि हमारी पूरी राजनीति में ब्राह्मणवाद और हिंदूवाद की भावना बहुत मजबूत है, और जस्टिस स्वामीनाथन पर आरोप लगाने से हमें अपनी भावनाओं को प्रकट करने का एक तरीका मिलता है... लेकिन देखें, यह तो एक बड़ा मुद्दा है... हमें अपने समाज में बहुत सारे ऐसे मुद्दों का सामना करना पड़ता है, जिनकी हल्के से गहरे प्रभाव होते हैं...
 
जस्टिस एम.स्वामीनाथन पर लगाए गए आरोप तो बहुत गंभीर हैं, लेकिन अगर मुझे लगता है तो यह सब कुछ एक बड़े विवाद की तरह सामने आ रहा है। जैसे तो जस्टिस स्वामीनाथन को ब्राह्मणवाद और RSS के समर्थन में आरोपित किया गया है, लेकिन अगर हम इस बात पर ध्यान दें कि क्या वे एक विशेष समुदाय को फायदा देने वाले वकील थे, तो यह एक बड़ी चिंता की बात है। मुझे लगता है कि जस्टिस स्वामीनाथन ने अपने जीवनकाल में सच्चाई और न्याय को हमेशा अपनी प्राथमिकता मानी, फिर तो यह आरोप भी झूठे होने का एक रूप है। 🤔
 
अरे भाई, ये तो बहुत ही चुनौतीपूर्ण समय में आ रही है... जस्टिस एम.स्वामीनाथन पर आरोप लगाना तो एक बड़ी बात है, लेकिन इसके पीछे क्यों और कैसे? शायद ये सोचकर भी हमें आगे बढ़ना चाहिए... 🤔

मैं समझता हूँ कि जस्टिस स्वामीनाथन ने खुद बहुत सारे मामलों में महत्वपूर्ण फैसले दिए हैं, लेकिन आरोपों को स्वीकारने से पहले हमें उनकी बारे में और जानना चाहिए... शायद ये सब एक बड़ा मजाक नहीं है... 😬
 
मुझे लगता है कि यह सब ब्राह्मणवादी और समाजवादी मानसिकता के अंधश्रद्धा है। जस्टिस स्वामीनाथन को आरोप लगाने वाले लोगों की चिंता यह है कि भारत में सामाजिक न्याय और समानता पर ध्यान नहीं दिया जाता, तो कैसे वे अपने समुदाय को सुरक्षित रख सकें।

लेकिन हमें याद रखना चाहिए कि भारत एक बहुसांस्कृतिक और बहुशास्त्रीय देश है, जहां सभी समुदायों की बात सुनी जानी चाहिए। आरोप लगाए गए मामले स्पष्ट होने पर हमें उनका विश्लेषण करना चाहिए, न कि आरोप लगाने वालों की राजनीतिक रणनीतियों पर ध्यान देना चाहिए।

आजकल किसी भी समुदाय को फायदा दिलाने या उनकी आलोचना करने से पहले हमें यह समझना चाहिए कि हमारा लक्ष्य एकता, समानता और न्याय होना चाहिए।
 
आरोप लगने का मतलब यह नहीं है कि विशेष समुदाय के लोग तो बिल्कुल भले ही निकल जाएंगे। इसमें थोड़ा सा दखल देना चाहिए। कुछ साल पहले मैंने देखा था कि जस्टिस स्वामीनाथन ने ऐसे मामलों में हस्तक्षेप किया था। यह तो उनकी अच्छी बात नहीं थी। फिर भी, उन्हें आरोप लगाना चाहिए या नहीं, यह किसी की उम्मीद नहीं है। पर यह जरूरी है कि जस्टिस स्वामीनाथन ने जो कुछ कहा, उसकी वजह समझनी चाहिए। शायद वे ऐसा इसलिए करते थे ताकि हमारे समाज में फूट लगे।
 
🤔 जस्टिस एम.स्वामीनाथन पर लगाए गए आरोप तो बहुत ही गंभीर हैं... मुझे लगता है कि ये आरोप पहले से ही उनके विशेषज्ञता और अदालती अनुभव को धूमधाधम कर देंगे। क्या लोग यह नहीं समझते कि जस्टिस स्वामीनाथन ने कैसे अपने अधिकारियों और वकीलों को चुना था? 🤝

मैंने देखा है कि पिछले 5 वर्षों में Madras High Court में ब्राह्मणवाद और RSS समर्थन वाले मामलों की संख्या 12 से बढ़कर 45 हो गई है। यह एक बहुत ही चिंताजनक स्थिति है... तो हमारे देश में अभी भी सामाजिक और आर्थिक असमानताएं दूर नहीं हुई हैं। 📊

दुनिया की 200 सबसे बड़ी अदालतों की लंबाई में मद्रास हाईकोर्ट की लंबाई 15वें स्थान पर है... तो हमारी अदालतें इतनी मजबूत नहीं हैं कि वे ऐसे आरोपों का मुकाबला कर सकें। 🚫
 
अरे यार, तुमने सोचा था कि जस्टिस स्वामीनाथन को आरोप लगाए गए लोग कुछ ठीक से नहीं समझ रहे हैं? लेकिन फिर मुझे विचार करने पर मजबूर हुआ और तुम्हारी बात पर विचार करने लगा। शायद, जस्टिस स्वामीनाथन को आरोप लगाने के पीछे कुछ सच्चाई भी हो सकती है। उन्हें खासतौर पर समुदाय के वकीलों को फायदा देने में दोषी कहा गया है, लेकिन क्या यह हमेशा सच नहीं होता? और जस्टिस स्वामीनाथन आरएसएस के समर्थन करने वाले हैं तो क्या यह उनकी निष्पक्षता को धूमधाम में लाने का मतलब है? शायद, हमें इसके पीछे कुछ और गहराई से जानने पर मजबूर होना चाहिए। 🤔
 
मुझे लग रहा है कि यह मामला बहुत बड़ा है… आरोपों में ब्राह्मणवाद और RSS का उल्लेख करने से पहले, मुझे लगता है कि हमें जस्टिस स्वामीनाथन के जीवन और कार्य पर ध्यान देने की जरूरत है। क्या यह सच है कि उन्होंने खासतौर पर एक ही समुदाय के वकीलों को फायदा दिया था, और अगर ऐसा है, तो यह बहुत बड़ा मुद्दा है। लेकिन हमें यह भी ध्यान रखना चाहिए कि जस्टिस स्वामीनाथन ने अपने पूरे जीवन में कई महत्वपूर्ण मामलों में अभियोजन किया, और उनकी विरासत को देखने से हमें यह पता चलता है कि उन्होंने संविधान के मूल्यों को बनाए रखने के लिए बहुत कुछ किया था। 🤔
 
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