बिहार चुनाव में हार के बाद कांग्रेस में बवाल, रिव्यू मीटिंग में भिड़ गए दो नेता, किसने दी गोली

बिहार विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की हार के बाद कांग्रेस ने दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय इंदिरा भवन में समीक्षा के लिए रिव्यू मीटिंग का आयोजन किया. इस रिव्यू मीटिंग से पहले ही पार्टी नेताओं के बीच हंगामा हो गया, कई नेता आपस में भिड़ गए और एक नेता ने हाथ के इशारे से गोली मारने तक की धमकी दी।

कांग्रेस के वेटिंग रूम में बिहार के वैशाली से प्रत्याशी रहे इंजीनियर संजीव और पप्पू यादव के करीबी प्रत्याशी जितेंद्र कुमार के बीच कहासुनी हुई। इस दौरान संजीव ने खुलेआम हाथ के इशारे से गोली मारने की धमकी देते हुए कहा कि बाहर के लोगों को बुलाकर टिकट दिया जाता है।
 
ये तो खेद है कि कांग्रेस में ऐसी चीजें होती रहती हैं 🙄 पार्टी में सोच-समझकर निर्णय लेने की बजाय ये सब दीवाली माहौल जैसा चल रहा है। इंदिरा भवन में इतना हंगामा तो समझ में आता है, लेकिन वेटिंग रूम में ऐसी कहासुनी तो बिल्कुल नहीं चाहिए। संजीव का बयान तो पूरी तरह गलत है, निर्वाचक क्षेत्रों में युवाओं और अनुभवियों दोनों को एक साथ लेने से अच्छे नतीजे मिल सकते हैं।
 
बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए की हार से कांग्रेस में बहुत ही दुर्भावनापूर्ण बातें घट रही हैं 🤔। पार्टी नेताओं के बीच झगड़े बढ़ रहे हैं, कई नेता आपस में भिड़ गए और ऐसी बातें कहीं जो दूसरों को खिलवाड़ देने की तरह लगती हैं। क्या यह पार्टी के लिए सही राह नहीं है? 🤷‍♂️
 
नरेश 🤔 यह तो बहुत बड़ा मुद्दा है । किसी भी पार्टी में ऐसी गड़बड़ी नहीं होनी चाहिए। पहले तो हम अपने देश को बदलने की कोशिश करें, फिर यह सुनहरी सीटें लेने का खेल करते हैं। पप्पू यादव और जितेंद्र कुमार, ये दोनों कैसे आपस में लड़ रहे हैं? हमें अपने वोट को सही पक्ष में डालने की जरूरत है, न कि किसी का खिलाफ।
 
अरे भाई, यह तो कांग्रेस की पार्टी में क्या हो रहा है? एक पार्टी मुख्यालय में समीक्षा की बात कर रहे हैं और फिर भी ऐसी बातें करते हैं जैसे वे कोई सड़क थिएटर हैं 🤣। बिहार चुनाव में हार मानने के बाद और भी जोर से बोलते हैं और दूसरों को धमकी देते हैं। यह तो पूरा मजाक नहीं है 🙄
 
🤔 बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए की हार से हमारी पार्टी पर बहुत दबाव आ गया है... 🤕 लेकिन यह तो हमारे नेताओं द्वारा किया जाने वाला होना चाहिए, नहीं तो इससे सब अच्छा नहीं होगा। 🙅‍♂️ मुझे लगता है कि समीक्षा के लिए रिव्यू मीटिंग से पहले कुछ पार्टी नेताओं की चालबाजी को रोकना जरूरी है। 🚫 https://web.dainikjagran.com/bihar/...h-nadi-hara-kangrehsamit-vichaar/1963414.html
 
ਬਿਹਾਰ ਵਿੱਚ ਖ਼ਤਰੇ ਦੀ ਗੱਲ ਨਹੀਂ, ਕਾਂਗਰਸ ਦੇ ਅੰਦਰ ਕਾਲ੍ਹ ਫੜੀ ਹੈ! ਪਾਰਟੀ ਦੇ ਨੇਤਾਵਾਂ ਮਿਲ ਕੇ ਅਸਥਿਰਤਾ, ਚਿੜਾਗੜ੍ਹ ਪਾਣੀ ਬਣਦਾ ਜਾ ਰਿਹਾ ਹੈ! ਇਸ ਖ਼ਬਰ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਮੈਨੂੰ ਲਗਦਾ ਹੈ ਕਿ ਕਾਂਗਰਸ ਵਿੱਚ ਸਭ ਥੋੜ੍ਹੇ ਪੀਡਾਂ ਆਏ ਹੋਏ ਹਨ।
 
नहीं तो क्या करेंगे? ये राजनीति में लड़ने वाले लोग यहां तक की अपने आप को भी निशाना बना लेते हैं 🤷‍♂️। बिहार में चुनाव हुआ तो एनडीए पराजित हो गई और अब कांग्रेस की विफलता दिखाई दे रही है। पार्टी के नेताओं में मतभेद बढ़ रहा है, यह एक बड़ी समस्या है 🤦‍♂️
 
अरे भाई, यह तो कांग्रेस पार्टी में खतना हुआ। इन्हीं लोगों ने 2014 में सुरेश कश्यप को टिकट देकर उनकी पत्नी की हत्या कर दी थी, और अब वे अपने अनुसार कुछ नहीं कह पा रहे हैं। यह तो खोटे लोग का खेल है, जो सबकुछ बदलने की कोशिश करते हैं लेकिन अंत में कोई भी चीज़ बरकरार नहीं रहती।
 
बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए की हार से निकलने वाली देरी और आपसी विवाद तो एक बात है, लेकिन पार्टी नेताओं में गोलीबारी तक की धमकी? यह तो बहुत बड़ा मुद्दा है... 😱 दिल्ली में इंदिरा भवन में ऐसे वातावरण कैसे बनते हैं जहां लोग ऐसा बोलते हैं जो कि उनके चरित्र की बात नहीं करता? 🤔
 
बतौरा ये कैसा हुआ! कांग्रेस पार्टी में यह तो हाल ही में चुनाव की हार से निकलने का एक और रूप है 🤦‍♂️। लेकिन बात करनी है तो यह दिल्ली में हुआ, ऐसे तो वहां कौन सी सरकार है, भारत की सबसे बड़ी पार्टी में इतना हंगामा होने का कोई जवाब नहीं! 🤔। और फिर बिहार के राजनेताओं के बीच इतना झगड़ा होने से क्यों? यह तो उनकी अपनी समस्या है, हमें उनकी चिंता करनी चाहिए, नहीं तो हम दूसरों की भलाई के लिए खुद बहस में पड़ जाते! 🙏
 
😡 यह तो बहुत बड़ी चीज है कि कांग्रेस के नेताओं में इतनी भिड़वानी और अंधविश्वास है। क्योंकि अगर ऐसा हुआ तो पार्टी की राजनीति पर बुरा प्रभाव पड़ेगा।
 
बिहार विधानसभा चुनाव के परिणामस्वरूप एनडीए की हार की बात तो सभी जानते हैं, लेकिन सच्चाई कहीं और है। पार्टी मुख्यालय में होने वाली समीक्षा मीटिंग के बाद से सबकुछ खुलकर आउट हो गया है। यह तो नेताओं की खुशहाली नहीं, बल्कि उनकी भावनात्मक अस्थिरता की कहानी है। पार्टी के अंदर गहराई से घुसपैठ के बाद, यह सब एक बड़ा दांव है, जिसके परिणामस्वरूप विभिन्न नेताओं के बीच तनाव बढ़ गया है। मुझे लगता है कि पार्टी को अपने नेताओं की बाहों को मजबूत करने और अंदरूनी लड़ाई को कम करने पर ध्यान देना चाहिए। 🤔
 
ਇੰਡੀਰਾ ਬਵਨ ਮੁੱਖਲਾ ਤੋਂ ਕੰਗਰਸ ਦੀ ਹਮਲਾ ਜ਼ਮੀਨੀ ਤੋਂ ਇਨਫਰਿਡਬਲ ਹੈ... 🤔

ਕੰਗਰਸ ਦੇ ਪਾਰਟੀ ਖ਼ਿਲਾਫ਼ ਚੁਣਵੀਆਂ ਜ਼ਮੀਨੀ ਤੋਂ ਬਹੁਤ ਅਸਵਸਥ ਕੰਮ ਦਿਖਾ ਰਹੇ ਹਨ... ਕਈ ਪਾਰਟੀ ਨੇਤਾਂ ਦੇ ਬੈਂਚ 'ਤੇ ਫਾਹੀ ਚੁੱਕੀ ਅਜੇ ਵੀ, ਪਾਰਟੀ ਨੇਤਾਵਾਂ ਦੇ ਬਿੱਲ ਮੰਗਣ ਦੀ ਸੁਰੱਖਿਆ ਕਈ ਜ਼ਮੀਨੀ ਨੇ ਤਿਆਰ ਕੀਤੀ ਹੋਈ ਬਾਰ੍ਹਾਂ ਗੁਣਾਲੇ ਦਾ ਵਾਧੂ।

ਕੰਗਰਸ ਨੂੰ ਅਜੇ ਤਕ ਬਿਰਤੀ-ਮਸ਼ਹੂਰ ਲੋਕਾਂ ਦਾ ਮੁੱਖ ਅਧਿਕਾਰੀ ਹੋਣ ਵਾਲੇ ਪ੍ਰਬੰਧ ਨਹੀਂ ਸੀ...
 
बिहार विधानसभा चुनाव के परिणामस्वरूप एनडीए ने हार मानी, लेकिन यह तो सभी को पता था, लेकिन क्यों नेताओं में से कुछ ने अपने आप को और दूसरों को बदनाम करने के लिए बोला... 🤔

कांग्रेस पार्टी में ऐसी घटनाएं तो होती रहती हैं, लेकिन यह तो एक समस्या है, अगर पार्टी नेताओं में हिंसा और धमकी के वातावरण बनता है, तो यह पार्टी की छवि और सदस्यों की सुरक्षा के लिए खतरा है... 🚨

हमें उम्मीद करनी चाहिए कि पार्टी के नेताओं ने अपने व्यवहार में सुधार करेंगे, खासकर जब तक कि उन्हें अपने दोषों पर सोचने का समय नहीं मिल जाता। 🤞
 
🤔 यह तो बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण दृश्य है, जब पार्टी नेताओं के बीच इतनी हिंसकता और आपसी विवाद होता है। कोई भी ऐसी गतिविधि करने से पहले अपने मन को अच्छी तरह से समझ लें, नहीं तो परिणाम बहुत ही खराब हो सकते हैं। 🚫 पार्टी में शांतिपूर्ण वातावरण बनाए रखना जरूरी है, ताकि सभी नेताओं के बीच सहयोग और एकजुटता बढ़ सके।
 
नाराज़ था 😕, यह वाकई बुरी तरह से गलत हुआ। पार्टी के नेताओं में इतना तनाव और झगड़ा तो फायदा नहीं होता। अगर एक-दूसरे की मदद करना चाहते हैं तो सब मिलकर साथ देना चाहिए, नहीं तो पार्टी की छवि खराब होती।
 
बिहार विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की हार के बाद तो यह अच्छा लगा कि कांग्रेस ने समीक्षा के लिए रिव्यू मीटिंग आयोजित की, लेकिन यह देखकर हैरान रह गया कि पार्टी नेताओं के बीच इतनी भिड़ंती हो गई। और एक नेता ने हाथ के इशारे से गोली मारने तक की धमकी देना तो किस तरह की चीज है... 🤯

मुझे लगता है कि ऐसी बातें होने पर पार्टी की छवि और अच्छी नहीं लगेगी। लेकिन फिर भी, कांग्रेस ने कई समस्याओं को सामने लाया, जैसे कि तालाश में टिकट देना और बाहर के लोगों को महत्वपूर्ण पद पर रखा। 🤔
 
क्या ये दिल्ली में होने वाली रिव्यू मीटिंग पर कोई प्रभाव पड़ेगा? यह देखकर परेशान हूं कि कैसे आपसी भिड़िंग नेताओं को फिसला देती है और जिम्मेदार लोगों को संभालने में असमर्थता बनाती है। पार्टी के अंदर इतनी अनिश्चितता तो चुनाव से पहले भी निकल गई है? 🤔
 
Back
Top