बिहार के बाद बंगाल में भी SIR पर सियासी बवाल! चुनाव आयोग को क्यों पड़ी इसकी जरूरत? जानें

बंगाल में भी SIR पर सियासत हुई, इसीलिए इसकी जरूरत क्यों?

पश्चिम बंगाल में जारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में लगभग 26 लाख मतदाताओं के नाम 2002 की मतदाता सूची से मेल नहीं खा रहे हैं। इस बारे में चुनाव आयोग ने कहा है कि SIR को लेकर राजनीतिक दृष्टिकोण से बहुत जरूरी है।

शुरुआत में यह सवाल उठता है कि क्यों SIR शुरू किया गया है? इस पर अनिल चमड़िया, एक वरिष्ठ पत्रकार ने, बातचीत के दौरान, कहा है कि हम सिर्फ बिहार नहीं बल्कि पूरे देश में SIR करवाएंगे। उनकी बात राजनीतिक दृष्टिकोण से बहुत जरूरी है। उन्होंने बताया है कि उनका लक्ष्य अगले 25-30 सालों के लिए शुद्धिकरण करना है। इसका मतलब है धार्मिक तौर पर लोगों धर्म के आधार पर अलग करना।

अब सवाल यह उठता है कि घुसपैठिया टर्म इसी की बात का हिस्सा है? अनिल चमड़िया, ने कहा है, "घुसपैठिया का मतलब सीधे तौर पर सांप्रदायिक से जोड़ कर देखा जाता है। यहां सांप्रदायिक को केंद्र माना गया है। बंगाल से ही पूरी राजनीति की दिशा तय की गई है, जिसे SIR से जोड़कर देखा जा रहा है।"

इस तरह से SIR को बंगाल में शुद्धिकरण के तौर पर इस्तेमाल किया गया है। यहाँ के लोगों की बहुत सी समस्याएं हैं। सांप्रदायिक तनाव बढ़ रहे हैं, और स्थानीय लोग सीर्फ SIR के विरोध में हैं।

अब सवाल उठता है कि इसकी जरूरत क्यों? SIR को नागरिकता संबंधी विवादों से जोड़ा जा रहा है। बंगाल में CAA पर विरोध हुआ था, और इसमें कई लोगों की नागरिकता इस मामले में शामिल हुई थी। इसी तरह, असम में भी SIR को लेकर बहुत विवाद हुआ है, और इसमें सिटीजनशिप की बात करने लगे हैं।

अब यह सवाल उठता है कि SIR का सिटीजनशिप से कनेक्शन है? अनिल चमड़िया, ने कहा है, "बंगाल में CAA को लेकर विरोध हुआ था। इसके पीछे एक वजह यह है। वहां के रहने वाले कई लोगों का पड़ोसी देश बांग्लादेश में काफी आना-जाना हुआ था। असम का भी सिटीजनशिप का मामला देखा गया था। वहां तो सरकार ने कह दिया था कि जो लोग 1971 तक असम में आए हैं उन्हें ही नागरिक माना जाएगा। बंगाल में मकुआ समूह के लोगों को लेकर काफी विवाद रहा है। इन्हें छोटी जाति के लोग कहते हैं। उनकी संख्या काफी बड़ी है।

अब सवाल उठता है कि MUA समूह की वजह से SIR पर इतनी सियासत है? अनिल चमड़िया, ने कहा है, "पश्चिम बंगाल में MUA समूह का लगभग 35 विधानसभा सीटों पर झुकाव होता है। इस तरह से जिन पार्टी के तरफ MUA समूह का झुकाव होता है वह पार्टी में चुनाव में जीत हासिल कर लेती है। ऐसे लोगों के साथ SIR की वजह से सबसे ज्यादा दिक्कत आ रही है। इस तरह से वे लोग लगातार विरोध प्रदर्शन कर रही हैं। मकुआ समाज ने बीत मंगलवार को विरोध प्रदर्शन भी किया था। इससे साफ पता चलता है कि SIR का किसी भी राज्य में स्वागत नहीं किया जा रहा है। इस मामले में वे लोग इसका विरोध कर रहे हैं, जो सबसे ज्यादा डरे हुए हैं। अपनी भविष्य को संकट में घिर हुआ देख रह हैं। इन लोगों में अधिकतर वैसे लोग है, जो सामाजिक तौर पर वंचित है।
 
🤔 SIR का यह हरकत पूरी तरह से सही नहीं लगती। कुछ लोग बोल रहे हैं कि हमारे देश में सांप्रदायिकता बढ़ रही है और हमें इसे रोकने के लिए SIR की जरूरत है। लेकिन मुझे लगता है कि यह बहुत पूरी तरह से सही नहीं है। SIR को इस्तेमाल करके हमारे देश की एकता और विविधता को कम कर रहे हैं। 🤷‍♂️
 
सीर्फ सिर्फ मकुआ समूह के लिए भी इतना उतार-चढ़ाव हुआ? ये बात समझ नहीं आ रही, भाई 🤔👎 यहां क्यों इतनी सियासत हो रही है? और इतनी दिक्कत किसके बिना हुई?
 
नहीं तो यह बात सही है... 🤔 जब तक SIR का मतलब हमारे देश में निर्धारित नहीं होता, तब तक इसके पीछे कुछ गहराई की राजनीति है। अनिल चमड़िया जैसे लोगों की बात सुनने पर लगता है कि यह सब कुछ बहुत खतरनाक हो सकता है।

क्या हमें वास्तव में पता है कि SIR का उद्देश्य क्या है? और इसके पीछे कौन-कौन सी राजनीतिक शक्तियाँ हैं? अगर हम सच्चाई नहीं ढूंढते, तो यह सब कुछ गलत भी हो सकता है।
 
सीर्फ सांप्रदायिक तनाव का सहारा लेने वाले लोग SIR पर इतनी सियासत कर रहे हैं। लेकिन क्या वास्तव में इन लोगों की संख्या देश भर में इस तरह के मामले है? 🤔

मुझे लगता है कि यह एक बड़ा सवाल है, जिसका जवाब हमें अभी तक नहीं मिल पाया है। लेकिन अगर हम SIR को सिर्फ SITUCization (सिटीजनशिप) के रूप में देखें, तो यह वास्तव में एक बड़ा मुद्दा है। 🚨

क्योंकि अगर हम सोचते हैं कि SIR केवल SITUCization के लिए है, तो यह एक बहुत बड़ा जोखिम है कि हमारे देश की बहुसंख्यक जाति इस तरह के मुद्दों से निकल जाएगी।

हमें इन जटिल मुद्दों पर विचार करना चाहिए, और एक ऐसी नीति बनानी चाहिए जो सभी को सम्मानित करे। लेकिन मुझे लगता है कि इस मामले में बहुत सियासत हो रही है, और इसके परिणामस्वरूप हमारा देश विभाजित हो सकता है।

इसलिए, मैं SIR को एक ऐसी नीति के रूप में देखना चाहूंगा जो सभी को सम्मानित करे, और साथ ही साथ हमारे देश की बहुसंख्यक जाति को भी सुरक्षित रखे। 🙏
 
ਹां, ਸीर्पार (SIR) ਦੀ ਇਸ ਵਾਰ ਤੱਕ ਘੱਟ ਪ੍ਰਭਾਵ ਮਿਲਿਆ ਅਤੇ ਬਹੁਤ ਸਾਰੀਆਂ ਗੱਲਾਂ ਕਹੀਨ ਜਾ ਰਹੀਆਂ ਹਨ, ਪਰ ਮੇਰਾ ਵਿਚਾਰ ਹੈ ਕਿ ਸੀਰ्पार (SIR) ਦੀ ਖ਼ਾਸ ਮਹੱਤਤਾ ਯਥਾਰਥ ਨਹੀਂ ਪਾਉਣੀ ਚਾਹੀਦੀ, ਕਿਉਂਕਿ ਇਸ ਦੀ ਮਹੱਤਤਾ ਖੁੱਲ੍ਹ ਕੇ ਪੈਦਾ ਕੀਤੀ ਗਈ ਹੈ।
 
मैंने शुरू में यही सोचा था कि SIR में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है, लेकिन फिर भी लोगों ने इस पर बहुत ज्यादा दिक्कत कर रखी है। मुझे लगता है कि हमारे देश में शुद्धिकरण की बात करने से पहले पूरी स्पष्टता की जरूरत है, खासकर जब इस पर इतनी सियासत हो रही है। 🤔

मैंने कल मेरी बहन ने मकुआ समूह के लोगों से मिलने जा रही थी, और उसने मुझसे कहा कि वह उन्हें बहुत पसंद करती है, क्योंकि वे बहुत अच्छे खिलाड़ी हैं। मैंने उससे पूछा, "बेटी, MUA समूह के लोग हमारे देश को कैसे मजबूत बना सकते हैं?" और उसने कहा, "मुझे लगता है कि वे हमारी सांस्कृतिक धरोहर को बढ़ावा देने में मदद कर सकते हैं।" 🏆

लेकिन फिर मैंने उससे पूछा, "बेटी, क्या MUA समूह के लोग हमारे देश को विभाजन करने की कोशिश कर रहे हैं?" और उसने कहा, "नहीं, मुझे लगता है कि नहीं." 😊

लेकिन फिर मैंने उससे पूछा, "बेटी, तुम्हें लगता है कि हमारे देश में SIR की जरूरत है या नहीं?" और उसने कहा, "मुझे लगता है, कि इसकी जरूरत नहीं है।" 🤷‍♀️

लेकिन फिर मैंने उससे पूछा, "बेटी, तुम्हारी राय से हमें क्या सीखने को मिलता है?" और उसने कहा, "मुझे लगता है, कि हमें सीखने को मिलता है कि हमें अपने देश की सच्चाई को पहचानने की जरूरत है।" 💡

लेकिन फिर मैंने उससे पूछा, "बेटी, तुम्हारी राय से हमें क्या सीखने को मिलता है?" और उसने कहा, "मुझे लगता है, कि हमें सीखने को मिलता है कि हमें अपने देश की सच्चाई को पहचानने की जरूरत है।" 🙏

लेकिन फिर मैंने उससे पूछा, "बेटी, तुम्हारी राय से हमें क्या सीखने को मिलता है?" और उसने कहा, "मुझे लगता है, कि हमें सीखने को मिलता है कि हमें अपने देश की सच्चाई को पहचानने की जरूरत है।" 😊
 
मुझे लगता है कि SIR की इस्तेमाल किया जा रहा है तो हमारे देश में और भी बड़ी समस्याएं आ सकती हैं 🤯। यह सिर्फ एक छोटा सा मुद्दा नहीं है, बल्कि इससे हमारे समाज में बहुत बड़ा तनाव फैल सकता है। मुझे लगता है कि हमें अपने देश की विविधता और जटिलताओं पर ध्यान देना चाहिए, न कि किसी एक समूह या वर्ग को अल्पसंख्यक बनाकर उसके साथ भेदभाव करना। 🤝
 
बंगाल में SIR को लगा रही राजनीति से पहले यह सवाल उठता है कि हमारे देश में लोगों को अपनी पहचान बताने की जरूरत तो नहीं है? 🤔
 
बंगाल में भी SIR पर सियासत हुई, यह बहुत भयानक है 🤯। MUA समूह का इतना झुकाव और अनिल चमड़िया जी के दृष्टिकोण से SIR की जरूरत क्यों? कोई जवाब नहीं है, बस विरोध प्रदर्शन ही हो रहे हैं। लेकिन यह सवाल उठता है कि भारत में हमारी नागरिकता और पहचान कैसे साफ की जाएगी।
 
😨🙅‍♂️ SIR की बात करने पर मुझे लगता है कि यह देश के प्रति बहुत ध्यान से देखा जा रहा है, लेकिन इसका कोई फायदा नहीं हो सकता। 🤔🚫

सिर्फ इतनी बातें न करें, मैं SIR की वास्तविक जरूरत क्या है? यह तो समझने की ज़रूरत नहीं कि SIR एक ऐसा प्रक्रिया है जिसका उपयोग किसी भी राज्य में शुद्धिकरण करने के लिए किया जाता है, और इसका मतलब यह हो सकता है कि हमारे देश में बहुत से लोग अपने धर्म या जाति के आधार पर अलग हो जाएंगे। 🤯

लेकिन MUA समूह की वजह से SIR पर इतनी सियासत? यह तो एक मजाक नहीं है! 😂 मुझे लगता है कि हमें अपने देश की सामाजिक समस्याओं को हल करने के लिए चिंतित होना चाहिए, न कि किसी भी राजनीतिक दल के लिए। 💬
 
मुझे लगता है कि यह सिर्फ चुनाव की घोषणा से पहले तो हो रहा है। SIR की जरूरत है या नहीं, इसके बारे में ज्यादा चर्चा नहीं होनी चाहिए। लेकिन जब राजनीतिक दलों ने इसे अपने प्लेटफॉर्म में शामिल कर लिया, तो यह सिर्फ एक समस्या बन गया।
 
मुझे लगता है कि अगर हम SIR की समस्याओं को समझने की कोशिश करते हैं तो ये हमें यह नहीं बताता है कि लोगों को इसकी जरूरत क्यों है। मुझे लगता है कि सिर्फ धार्मिक ग्रुप्स और घुसपैठियाओं को देखने से इस समस्या का समाधान नहीं मिलेगा। हमें यह समझना चाहिए कि किसी भी व्यवस्था में अगर लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखा जाए तो ही उसकी सफलता संभव है।
 
अरे, ये बहुत ही संवेदनशील और जटिल मुद्दा है 🤔। SIR को लेकर राजनीतिक दृष्टिकोण से बहुत जरूरी है, लेकिन इसके पीछे क्या कारण हैं? यह सवाल हमें गहराई तक ले जाता है। अनिल चमड़िया की बात सुनकर लगता है कि SIR को शुद्धिकरण के तौर पर इस्तेमाल किया गया है, लेकिन यह वास्तव में कब से शुरू हुआ था? 🕰️

मुझे लगता है कि हमें SIR के पीछे की सच्चाई समझनी चाहिए, जो कि बहुत अधिक जटिल है। यह सवाल उठता है कि घुसपैठिया टर्म इसी की बात का हिस्सा है? 🤷‍♂️ और MUA समूह की वजह से SIR पर इतनी सियासत है? यह सवाल हमें भूलने नहीं देना चाहिए।

यह समय है कि हम SIR के पीछे के मुद्दों को समझें और उनके बारे में जागरूकता बढ़ाएं। इससे हम अपनी राजनीतिक प्रणाली को मजबूत बना सकते हैं और सामाजिक तौर पर वंचित लोगों के अधिकारों की रक्षा कर सकते हैं। 💪
 
"सच्चाई से बोलना हमेशा सबसे बड़ा शक्तिशाली हथियार होता है।"

मुझे लगता है कि SIR को लेकर बहुत सियासत हुई है, लेकिन इसकी जरूरत क्यों? मुझे लगता है कि यह तय करना होगा कि हम अपने मतदाताओं की सूची में कौन शामिल होना चाहिए और कौन नहीं।
 
**SIR का मक़सद क्या? 🤔**

मेरी बात यह है कि SIR का मक़सद शुद्धिकरण करना नहीं है, बल्कि दूसरों के मतभेदों को दबाना है। 🚫👥

**बंगाल में घुसपैठिया टर्म क्या? 🤔**

घुसपैठिया टर्म सीधे तौर पर सांप्रदायिक से जुड़ा नहीं है, बल्कि यह राजनीतिक दृष्टिकोण से है। 💡👥

**SIR की जरूरत क्यों? 🤔**

SIR की जरूरत नहीं है, इसका सिर्फ व्यावसायिक हिस्सा है। 😒💸

**MUA समूह की वजह से SIR पर इतनी सियासत? 🤔**

मेरी बात यह है कि MUA समूह की वजह से SIR पर इतनी सियासत इसलिए है, क्योंकि यह समूह राजनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है। 💸👥

**सुलह का समय? 🤝**

बिल्कुल! हमें एक-दूसरे की बात माननी चाहिए और सुलह करनी चाहिए। शांति ही सबसे बड़ी जीत है। 🙏💕
 
😕 SIR से लेकर यह बात बिल्कुल सही नहीं है...🙅‍♂️ यह तो सिर्फ राजनीति का मुहावरा है, जो किसी भी देश में हो सकती है। 🤔
 
सिर्फ इतना नहीं है! बंगाल में SIR की जरूरत क्यों? यह एक बहुत ही बड़ा सवाल है 🤔

मुझे लगता है कि SIR को लेकर राजनीतिक दृष्टिकोण से बहुत जरूरी है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हमें अपने देश की जटिलताओं को छुपाने की कोशिश करनी चाहिए। असम में भी SIR को लेकर विवाद हुआ है, और इसमें सिटीजनशिप की बात करने लगे हैं। यह एक बहुत बड़ा सवाल है: क्या हमारी सरकार हमेशा सही दिशा में जाने वाली है? 🤷‍♂️

और MUA समूह की वजह से SIR पर इतनी सियासत है? यह एक बहुत बड़ा सवाल है! मुझे लगता है कि हमें अपने देश की जटिलताओं को समझने की जरूरत है, और न केवल MUA समूह की वजह से बल्कि बंगाल की समस्याओं को भी समझने की जरूरत है। 🤝

हमें अपने देश में शुद्धिकरण करने की जरूरत नहीं है, बल्कि हमें अपने देश में सभी लोगों को सम्मान देने की जरूरत है! 💖
 
मुझे लगता है कि यह सिर्फ एक राजनीतिक चाल है, और इसके पीछे सच्ची समस्या कौन सी है? लोगों को अपने मतदाता सूची में नाम शामिल करने के लिए 2002 की सूची से तुलना कराने का यह तरीका क्यों? मुझे लगता है कि यह एक मकड़ी की तरह है, जो हमेशा हमारी आँखों से बचती रहती है। हमें अपनी ज़रूरतों और समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए, न कि राजनीतिक चालों पर।
 
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