Bengal: मतदाता सूची संशोधन अंतिम चरण में, बंगाल की फाइनल लिस्ट 28 फरवरी तक संभव; सीईओ मनोज अग्रवाल का दावा

विशेष रिपोर्ट: पश्चिम बंगाल में अंतिम मतदाता सूची 28 फरवरी तक जारी, सुप्रीम कोर्ट ने समयसीमा बढ़ाई, संशोधन प्रक्रिया में हुई प्रगति

विशेष रिपोर्ट: पश्चिम बंगाल में अंतिम मतदाता सूची 28 फरवरी तक जारी, सुप्रीम कोर्ट ने समयसीमा बढ़ाई, संशोधन प्रक्रिया में हुई प्रगति

राज्य मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने बताया कि अंतिम मतदाता सूची 21 फरवरी से पहले नहीं जारी की जाएगी, बल्कि इसे 28 फरवरी तक प्रकाशित करने का प्रयास जारी है।

अग्रवाल ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने समयसीमा बढ़ाई, जिसके अनुसार दस्तावेजों की जांच 14 फरवरी के बाद एक सप्ताह के लिए बढ़ा दिया गया है।

इस प्रक्रिया में लगभग 1.39 करोड़ मामलों में सुनवाई पूरी हो चुकी है, जबकि लगभग 1.06 करोड़ मामलों में दस्तावेज अपलोड किए जा चुके हैं।

अग्रवाल ने बताया कि राज्य सरकार ने चुनाव संबंधी कार्यों के लिए 8,505 ग्रुप-ब अधिकारियों के नाम उपलब्ध कराए हैं, जिन्हें मंगलवार से कार्यभार संभालेगा।

चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पूरी की जा रही है।

यदि अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद किसी मतदाता का नाम सूची में नहीं मिलता है, तो वह पांच दिनों के भीतर जिला निर्वाचन अधिकारी के पास आवेदन कर सकता है।
 
अंतिम मतदाता सूची के बारे में सभी चिंताओं को भूलकर हम बस यह जान लें कि 28 फरवरी तक सूची जारी होगी, तो सुधार की दिशा में प्रगति हो रही है। सुप्रीम कोर्ट ने समयसीमा बढ़ाई, दस्तावेजों की जांच और अपलोड की प्रक्रिया में भी सुधार हुआ है 🕒
 
अरे बेटा, यही सही है कि चुनाव प्रक्रिया में समयबद्धता और पारदर्शिता का ध्यान रखा जाए। अगर अंतिम मतदाता सूची तैयार नहीं हो सकती तब भी, तो इससे मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा में कोई कमी नहीं आ सकती। 8,505 ग्रुप-ब अधिकारियों को नाम देने से चुनाव आयोग की पूरी प्रक्रिया तेज हो गई है और इससे निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित होता है।
 
कोई बड़ी बात नहीं, अंतिम मतदाता सूची 28 फरवरी तक यानी चुनाव के पहले दिन ही जारी होनी चाहिए, न तो 21 फरवरी, न तो किसी और तारीख पर। इससे निष्पक्षता बनाए रखने में मदद मिलेगी।
 
मुझे लगता है कि पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया बहुत धीमी जा रही है, लेकिन फिर भी यह एक अच्छी बात है कि समयसीमा बढ़ाई गई है। ऐसा लगता है कि राज्य सरकार और चुनाव आयोग मिलकर इस प्रक्रिया को साफ़ और पारदर्शी बनाने का प्रयास कर रहे हैं।

लेकिन फिर भी, यह देखभाल रखना जरूरी है कि मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा किया जाए और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित किया जाए। क्या हमें उम्मीद करनी चाहिए कि सभी दस्तावेज़ सही ढंग से अपलोड हो जाएंगे? नहीं, लेकिन यह जरूरी है कि प्रक्रिया में कोई भी गलती या असाम्य न हो।
 
बेटा, यह एक अच्छी बात है कि सुप्रीम कोर्ट ने समयसीमा बढ़ाई है, इससे लोगों को मतदान करने में आसानी होगी। और राज्य सरकार ने चुनाव संबंधी कार्यों के लिए अधिकारियों के नाम उपलब्ध कराए हैं, इससे काम करने वाले लोगों को भी सहायता मिलेगी। और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पूरी की जा रही है, तो सभी को मिलेगा। 🙏💕
 
🤔 यह मतदाता सूची जारी करने की प्रक्रिया में बहुत सावधानी और समयबद्धता दिखाई देती है, नाहीं तो हमें गलतफहमी महसूस कराती। जैसे कि मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा करने के लिए, यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से हो रही है। मुझे लगता है हमें मतदान प्रक्रिया में भी अपनी भागीदारी दिखानी चाहिए, न कि बस वोट डालने में ही। 🗳️ यही तो सच्चा सामाजिक बदलाव लाने का तरीका है।
 
अरे, मतदाताओं के लिए सुनिश्चित करना बहुत जरूरी है कि उनका नाम सही सूची में हो। दिल्ली से तो पता चल रहा है कि अंतिम मतदाता सूची जल्दी जारी कर देनी चाहिए ताकि मतदाताओं के लिए कोई परेशानी न हो। यह बहुत जरूरी है कि सबकुछ सही तरीके से चले। 28 फरवरी तक सूची जारी करना जरूरी है, और दस्तावेजों की जांच एक सप्ताह में पूरी होनी चाहिए। इससे सबको खुशी होगी। 🤝
 
अगर अंतिम मतदाता सूची 28 फरवरी तक नहीं मिलती तो मुझे लगता है कि कुछ गलत होगा 🤔 निर्वाचन अधिकारियों की जांच पूरी करने में इतना समय लग रहा है, फिर भी 8,505 ग्रुप-ब अधिकारियों को कार्यभार संभालने देने की जरूरत तो नहीं? ⏰ निर्वाचन प्रक्रिया में जोखिम भरापन कम करने के लिए अधिक समय लगाना चाहिए, लेकिन इतनी जाम होने की स्थिति में यह संभव नहीं हो सकता है 🚗
 
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