भारत और यूरोपीय संघ के बीच आज एक समझौता हुआ जो दुनिया के सबसे बड़े आर्थिक क्षेत्रों के बीच व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। 'मदर ऑफ ऑल डील्स' नामक इस समझौते में भारत और यूरोपीय परिषद की ओर से 700 अरब डॉलर के व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने की पेशकश की गई है।
इस समझौते के तहत, भारत और यूरोपीय संघ के बीच सीमित समय के लिए कई आर्थिक सहयोगों को बढ़ाया जाएगा। इस समझौते में भारतीय व्यापारियों और उद्यमियों के लिए नए अवसर और मौके बनाए जाने की पेशकश की गई है, जिससे उनकी आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा।
हालांकि, यह समझौता कब से लागू हो सकता है, इसके बारे में अभी भी कई सवाल हैं। सरकार ने अभी तक इस समझौते पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। इससे पहले, भारत और यूरोपीय संघ के बीच इस तरह के समझौते पर विचार करने की पेशकश कई बार हुई थी, लेकिन अभी तक कोई अनुकूलन नहीं हुआ था।
इस समझौते को लागू करने से पहले, भारतीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपनी सरकार से कहा था कि यह समझौता हमें आर्थिक विकास और व्यापार को बढ़ावा देने में मदद करेगा। इस समझौते के तहत, भारतीय उद्यमियों को यूरोपीय बाजार में अपनी सेवाएं और उत्पादों को पहुंचाने के लिए नए अवसर मिलेंगे।
इसके अलावा, यह समझौता भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और रोजगार प्रदान करने में मदद करेगा। इससे पहले, भारतीय सरकार ने इस तरह के समझौतों पर विचार करने की पेशकश कई बार की थी, लेकिन अभी तक कोई अनुकूलन नहीं हुआ था।
अब, यह समझौता कब से लागू हो सकता है, इसके बारे में अभी भी कई सवाल हैं। सरकार ने अभी तक इस समझौते पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। इससे पहले, भारत और यूरोपीय संघ के बीच इस तरह के समझौते पर विचार करने की पेशकश कई बार हुई थी, लेकिन अभी तक कोई अनुकूलन नहीं हुआ था।
इस समझौते के तहत, भारत और यूरोपीय संघ के बीच सीमित समय के लिए कई आर्थिक सहयोगों को बढ़ाया जाएगा। इस समझौते में भारतीय व्यापारियों और उद्यमियों के लिए नए अवसर और मौके बनाए जाने की पेशकश की गई है, जिससे उनकी आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा।
हालांकि, यह समझौता कब से लागू हो सकता है, इसके बारे में अभी भी कई सवाल हैं। सरकार ने अभी तक इस समझौते पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। इससे पहले, भारत और यूरोपीय संघ के बीच इस तरह के समझौते पर विचार करने की पेशकश कई बार हुई थी, लेकिन अभी तक कोई अनुकूलन नहीं हुआ था।
इस समझौते को लागू करने से पहले, भारतीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपनी सरकार से कहा था कि यह समझौता हमें आर्थिक विकास और व्यापार को बढ़ावा देने में मदद करेगा। इस समझौते के तहत, भारतीय उद्यमियों को यूरोपीय बाजार में अपनी सेवाएं और उत्पादों को पहुंचाने के लिए नए अवसर मिलेंगे।
इसके अलावा, यह समझौता भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और रोजगार प्रदान करने में मदद करेगा। इससे पहले, भारतीय सरकार ने इस तरह के समझौतों पर विचार करने की पेशकश कई बार की थी, लेकिन अभी तक कोई अनुकूलन नहीं हुआ था।
अब, यह समझौता कब से लागू हो सकता है, इसके बारे में अभी भी कई सवाल हैं। सरकार ने अभी तक इस समझौते पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। इससे पहले, भारत और यूरोपीय संघ के बीच इस तरह के समझौते पर विचार करने की पेशकश कई बार हुई थी, लेकिन अभी तक कोई अनुकूलन नहीं हुआ था।