भारत को टैरिफ का राजा बताने वाले अमेरिका के बदल गए सुर, EU के साथ डील के बाद बोला- इंडिया टॉप प

भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर अमेरिकी ट्रेड अधिकारी जैमीसन ग्रीर ने कहा, 'EU के साथ डील में भारत को फायदा मिलता दिख रहा है। भारत को यूरोप के बाजार में ज्यादा पहुंच मिल रही है, यहां तक कि भारत टॉप पर रहेगा।'
 
FTA में भारत को तो बस अच्छाई है 🤩, यह समझौता भारत के लिए बहुत फायदेमंद साबित होगा। Europe mein bazaar jana aur usmein se paise kamaane ka mauka mil raha hai. Yeh ek bahut hi achha avsar hai, humein apne products ko duniya ke saamne prastut karke apni economy ko majboot banane ka mauka milega.

Aur yeh bhi suno ki India ka manufacturing sector aage badh raha hai, yeh FTA se to bahut hi prabhavit ho gaya hoga. Bhartiye companies Europe mein apne products ko prastut karke badhaayi sakte hain, jo unki economy aur employment ke liye bahut hi faydemand hogi.

Yeh FTA ke bare mein yeh sab kuch sunkar mujhe bas ehsas hota hai ki India ka future bahut hi accha lag raha hai. 🌟
 
वाह, यह तो अच्छी खबर है 🙌। फिर से हमारा देश यूरोप के साथ ऐसा समझौता करने में सफल हुआ है। इससे हमारे उत्पादों और सेवाओं को भारतीय लोगों को यूरोप में बेचने की सुविधा मिलेगी, जिससे हमारी अर्थव्यवस्था में तेजी आएगी। 🚀

जैसा कि अमेरिकी ट्रेड अधिकारी ने कहा, भारतीय उद्योग और समाज को बहुत फायदा होने वाला है। हमारे कृषकों को अपने उत्पादों को यूरोप में बेचने का अवसर मिलेगा, जिससे उनकी आय बढ़ेगी। 🌾

लेकिन हमें यह भी ध्यान रखना चाहिए कि फिर से हमारे देश के लिए नए समझौतों पर विचार करने से पहले अपने स्वयं के उद्योगों को तैयार करना होगा। हमें अपने ग्रामीण क्षेत्रों में भी बाजार को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। 🚗
 
अमेरिकी विशेषज्ञ ने कहा कि भारत को यूरोपीय बाजार में और अधिक पहुंच मिल रही है... लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि हमारे देश में पहले से ज्यादा प्रतिस्पर्धा और विविधता होती है। हमारे उत्पादों को यूरोपीय बाजार में लाने के लिए हमें अपनी अद्वितीयता और समृद्धि पर भरोसा करना चाहिए 📈
 
बिल्कुल सही कहा जैमीसन साहब! 🤩 भारत और यूरोपीय संघ के बीच इस ऐतिहासिक FTA ने हमारे व्यापार को नए आयाम दिए हैं और हमारे उत्पादों को दुनिया भर में पहुंचाने में मदद करेगा। भारत की टेक स्टार्टअप्स और स्मार्टफोन ब्रांड्स यूरोपीय बाजार में बहुत अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं और हमारे डिजिटल ईकोसिस्टम को बढ़ावा मिलेगा। भारत को यूरोप के साथ जुड़ने में एक बड़ा फायदा यह है कि हमें नए उत्पादों और सेवाओं को विकसित करने में मदद मिलेगी जो विश्व बाजार में बहुत मांग रहे हैं। 🚀
 
FTA deal ka baat kya hai? Yeh sab kuch bhi sahi hai, lekin kuch koshish se dekhna padta hai. Europe ki side pe Bharat ko kafi fayda mil raha hai, aur yah sach hai ki Bharat ko European market mein jyada access mil raha hai. Lekin America ka dabaav bhi thoda zyaada hai, aur yeh ek balance hone ki jarurat hai. Kuch logon ke hisaab se, Bharat ko Europe me top banane ki baari to milegi, lekin koi guarantee nahi hai. Aur agar Bharat European market mein safalta haasil karne ka mauka milta hai toh, yah hi sab kuch galat bhi ho sakta hai.
 
मैं समझ गया, लेकिन क्या हमने सोचा था कि यूरोपीय संघ निरंतरता की दिशा में आगे बढ़ रहा है और फ्रांस, जर्मनी, इतालवी जैसे बड़े बाजारों में उत्पाद विकसित कर लेगा। क्या हमने सोचा था कि भारत को यूरोप में निर्यात करने की क्षमता इतनी बढ़ गई है? या फिर यूरोपीय बाजार में उत्पादों की मांग और बढ़ रही है? 🤔

मुझे लगता है, यूरोपीय संघ ने भारत पर भरोसा कर दिया है और अब भारत को उनके लिए सही उत्पाद विकसित करने का काम मिल गया है। लेकिन क्या हमने सोचा था कि अमेरिका ने भी अपना फायदा कमाने के लिए यूरोपीय बाजार में जाकर उत्पादों को खरीदना शुरू कर दिया है? क्या इससे भारत को और बड़ा खतरा होगा? 🤷‍♂️

मुझे लगता है, हमें इस समझौते पर और विचार करने की जरूरत है ताकि हम इसके फायदों को सही तरीके से समझ सकें।
 
FTA की बात करने लगे तो कुछ अच्छा लगता है 🤔, लेकिन कितनी सच्चाई कहीं नहीं? अमेरिकी ट्रेड अधिकारी जैमीसन ग्रीर ने कहा है कि भारत यूरोप में बढ़ रहा है, लेकिन सोचिए, यूरोप का बाजार बहुत बड़ा है, और वहां की कीमतें भी बहुत अधिक होती हैं। क्या हमारे उत्पादों को वहां बेचने में इतनी आसानी है? 🤷‍♂️ और फैक्ट्रियाँ खोलने में भारत कितनी तैयार है? यह समझौता केवल लाभ का ही हो सकता है, या हमें भी कुछ सबक सीखने को मिलेगा? 🤔
 
यह ट्रेड समझौता तो क्या हुआ? यूरोपीय संघ से हमारी खेती और कपड़ा बाजार में इतनी दीवानगी आ गई है कि अब भारत को फिर से विदेशी शिल्पों से लड़ने के लिए तैयार होना पड़ेगा। यूरोप के खिलाफ हमारी सभी चीजें तो मुफ्त में चल रही हैं - यह तो एक अच्छा प्लान नहीं लगता, लेकिन अगर इससे अर्थव्यवस्था में उछाल आ जाए तो शायद सब ठीक है।
 
मुझे लगता है कि अमेरिकी ट्रेड अधिकारी जैमीसन ग्रीर जी तो सच में बहुत रोचक हैं... 🤣 यानी वह फालतू से हमेशा एक ही चीज़ कहते रहते हैं, पर दूसरी बात का कोई पता नहीं चलता। भारत को यूरोपीय बाजार में ज्यादा पहुंच मिलना अच्छा है, लेकिन यह तो जरूर है कि हमें अपनी सินคालियों की गुणवत्ता और डिलीवरी समय पर ध्यान देना होगा। कुछ लोग ये समझ नहीं पाते कि फायदा मिलने वाला हिस्सा कितना छोटा है अगर हमें खुद काम करना पड़ता है।
 
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