भास्कर अपडेट्स: जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में सर्च ऑपरेशन जारी, कल मुठभेड़ के बाद 2–3 आतंकी फरार हुए

जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में आज सुबह सर्च ऑपरेशन शुरू हो गया है, जब सुरक्षाबलों ने जनसीर-कांडीवार जंगल में आतंकियों से मुठभेड़ की थी। इस मुठभेड़ के बाद 2-3 आतंकवादी फरार हो गए हैं।

इस मुठभेड़ में भारी बर्फबारी के दौरान सेना और पुलिस ने ऊंचाई वाले इलाकों में सर्च ऑपरेशन चलाया है। रात 10.20 बजे आतंकियों की हलचल को देखकर सुरक्षाबलों ने पहले फायरिंग शुरू की, लेकिन 2-3 आतंकवादी जंगल का फायदा उठाकर भाग गए।

पिछले एक हफ्ते में इस इलाके में तीसरी मुठभेड़ हुई थी। इसके अलावा, 18 जनवरी को सोनार गांव में हुई मुठभेड़ में एक पैरा कमांडो शहीद हुआ और सात जवान घायल हुए। 22 जनवरी को आतंकियों को फिर घेरने की कोशिश की गई, लेकिन वे बच निकले।

इसके अलावा, राजौरी जिले के केरी इलाके में एलओसी के पास पेट्रोलिंग के दौरान एक जवान घायल हो गया। इस घटना के बाद सेना ने कहा है कि बारिश के कारण एंटी-इनफिल्ट्रेशन सिस्टम की लैंडमाइन खिसकने से ऐसे हादसे होते हैं।
 
क्या ये हमेशा जैसा हो गया है, जंगलों में आतंकियों का साथी बनकर घूम रहा है 🤕। पहले तो कोई चिंता नहीं थी, फिर एक हफ्ते में तीसरी मुठभेड़ होने से तो जान लेनी चाहिए। और अब यहां भी बर्फबारी के दौरान 2-3 आतंकवादी फरार हो गए, तो फिर क्या करना? 🤔

मुझे लगता है कि सेना ने सही काम किया, लेकिन ये कैसे संभव होता है? क्या हमें इन जंगलों में नहीं जाने देते? शायद अगर हमारी पुलिस और सेना पहले से जानती थी, तो यह सब कुछ पहले ही रोक लिया होता। 🤷‍♂️
 
अरे, ये जंग कैसे चल रहा है... जम्मू-कश्मीर में आतंकियों ने फिर से अपनी जान जोखिम में डालकर तीनों पुलिसकर्मियों को घायल कर दिया है। लेकिन हमारी सेना और पुलिस की इस दखल की वजह से आतंकवादियों को हराया जा रहा है।

लेकिन इन घटनाओं की वजह से हमें एक बात याद रखनी चाहिए, हमारा जवान भारत की रक्षा करने के लिए अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं। हमें उनकी बहादुरी को कभी नहीं भूलना चाहिए।

अब इस स्थिति में हमें एक-दूसरे का सहारा ढूंढकर आतंकवादियों के खिलाफ लड़ना होगा। हमें अपने देश की गरिमा और अखंडता को बनाए रखने के लिए एक साथ खड़े होने की जरूरत है। 🚫💪
 
अरे वाह, जम्मू-कश्मीर में फिर से आतंकवादी गतिविधियाँ तेज़ हो रही हैं, और हमारा सेना कितनी अच्छी है! 😂 बर्फबारी के दौरान भी वहाँ सर्च ऑपरेशन चलाती है, जैसे कि कहीं से भी मुठभेड़ करनी होगी।

पिछले एक हफ्ते में तीसरी मुठभेड़ हुई, और फिर से 2-3 आतंकवादी फरार हो गए। यह अच्छा है कि सेना हमें सुरक्षित रखने की कोशिश कर रही है, लेकिन फिर भी उन्हें जंगल में घुसने का तरीका नहीं पता करना चाहिए।

और हाँ, राजौरी जिले में एलओसी के पास पेट्रोलिंग के दौरान एक जवान घायल हो गया। यह अच्छा है कि सेना ने कहा है कि बारिश के कारण एंटी-इनफिल्ट्रेशन सिस्टम की लैंडमाइन खिसकने से ऐसे हादसे होते हैं। लेकिन हमें उम्मीद करनी चाहिए कि सेना और पुलिस ने अपनी चाल तो बदल दी होगी।
 
क्या ये हमेशा इतनी गंभीरता से होती रहती है? पहले तो पुलिस और सेना की बहुत जोर लगी थी, फिर 2-3 आतंकवादी दूर चले गए, फिर कुछ जवान घायल हुए। यहाँ भी ऐसा ही हुआ, लेकिन ज्यादा बात नहीं करनी चाहिए, हमें सिर्फ एक साथ खड़े रहना चाहिए और इस बारे में जागरूक रहना चाहिए कि जब तक आतंकवादी फिर से घेरे नहीं जाते, हमें शांति बनाए रखनी होगी।
 
क्या तो जंगल में भारतीय सेना निकल पड़ी है और एक्सपरिट जंगलवालों से मुठभेड़ की है? क्या वे लोग जंगल में इतने अकेले रह सकते हैं? यार, मुझे लगता है कि हमें जंगलों की बात करनी चाहिए और उनके सुरक्षित होने के लिए कुछ जरूरी बदलने चाहिए।

क्या यह तो सिर्फ आतंकवादियों की समस्या नहीं है? हमें अपने देश की जंगलों में सुरक्षा के बारे में सोचकर चलना चाहिए, न कि आतंकवादियों को पकड़ने के लिए।

मैं पूछता हूँ, जंगलों में सर्च ऑपरेशन करने के लिए हमें कितनी सैनिकों की जरूरत है? और यह तो भारी बर्फबारी के दौरान किया गया था? यार, मुझे लगता है कि हमें अपने जंगलों की सुरक्षा के लिए कुछ जरूरी बदलने चाहिए।

क्या हमें आतंकवादियों को पकड़ने के लिए अपने जवानों को जंगल में भेजने की जरूरत है? यार, मुझे लगता है कि यह तो हमारे देश की सुरक्षा के लिए खतरनाक है।

मैं इस बात पर और भी सोचना चाहता हूँ। 🤔
 
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