Bihar Politics: बेटे को मंत्री बनाने पर उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी में हुआ विरोध, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष समेत कई नेताओं ने दिया इस्तीफा

बिहार में राजनीतिक खुशबू में एक बड़ा बदलाव आया है। बीजेपी के उपाध्यक्ष विनय कुमार चौधरी ने उपेंद्र कुशवाहा को एक पत्र भेजकर पार्टी से इस्तीफा देने की घोषणा की है।

क्योंकि उपेंद्र कुशवाहा अपने बेटे राजेश कुमार चौधरी को मंत्री बनाने के लिए पार्टी की सुझाव के खिलाफ थे, इसलिए उन्होंने इस फैसले से सहमत नहीं है। उपेंद्र कुशवाहा ने पत्र में अपने विरोध को बताया है और कहा है कि वे पार्टी के निर्णयों से सहमत नहीं हैं।

उन्होंने कहा है कि राष्ट्रीय उपाध्यक्ष चौधरी पिछले 9 साल से उनके साथ काम कर रहे थे, लेकिन अब उनसे खुद को जोड़ने में असमर्थ हैं। ऐसे में उन्होंने कहा है कि उनकी स्थिति वहीं तालमेल नहीं कर सकते और इसलिए पद और पार्टी से इस्तीफा देना उचित है।

विनय कुमार चौधरी को अपनी इस घोषणा पर विचार करना पड़ा है, लेकिन उन्होंने यह कहा है कि वह अपने संकल्प को नहीं बदलेंगे।
 
बड़ा आश्चर्य है कि उपेन्द्र कुशवाहा ने इतनी तेजी से इस्तीफा देने की घोषणा की, लगता है उनके मानसिक स्वास्थ्य पर थोड़ा दबाव आ गया हूँ। पार्टी में ऐसे बदलाव तो जरूर होते हैं लेकिन इतनी जल्दी निकलना चाहिए शायद इस्तीफा देने के पहले बातचीत करने पर विचार कर लेते।
 
मुझे लगता है कि उपेंद्र कुशवाहा जी ने सही फैसला लिया है, लेकिन क्या वे सही थे? उनके बेटे राजेश कुमार चौधरी को मंत्री बनाने से उन्हें अपने पुत्र के भविष्य पर खुशी हुई, और यह अच्छा था, लेकिन फिर भी उनके नेतृत्व का एक अनुभवी व्यक्ति जैसे उपेंद्र कुशवाहा को चुनना उचित नहीं था। अब जब उन्होंने इस फैसले से सहमत होने में असमर्थ हैं तो यह अच्छा नहीं लग रहा है, और विनय कुमार चौधरी जी ने उनकी बात मानी क्या?
 
बिहार में ऐसा बड़ा बदलाव आया तो फिर भी लगता है कि हम सब सही दिशा में नहीं जा रहे हैं। उपेंद्र कुशवाहा ने अपना पत्र लिखकर कहा है कि राजेश चौधरी को मंत्री बनाने का फैसला पार्टी से उनकी पसंद नहीं थी, और अब उन्होंने इसे सहित नहीं कर सका। यह अच्छी बात है कि वह अपने संकल्प पर अडिग रहे हैं 🙏

लेकिन हमें यह भी याद रखना चाहिए कि राजनीति में बहुत सारी गुदगुडाहट आती रहती है, और कभी-कभी ऐसे बड़े बदलाव होते हैं जिनका परिणाम निश्चित नहीं होता। उम्मीद है कि विनय कुमार चौधरी अपनी स्थिति से सही निकल सकेंगे।
 
ये तो पोल देखना थोड़ी मजेदार लग रहा है... उपेंद्र कुशवाहा ने खुद को बीजेपी से अलग करने का फैसला किया, और इस दौरान उन्होंने अपने बेटे राजेश कुमार चौधरी को मंत्री बनाने के लिए पार्टी की सुझाव के खिलाफ थे। यह तो एक बड़ा बदलाव है... 🤔

मुझे लगता है कि उपेंद्र कुशवाहा ने सही फैसला किया है, क्योंकि राजनीति में हमेशा खुद को जोड़ने-मुड़ने की जरूरत नहीं होती... अगर आप अपने संकल्प को नहीं बदल सकते तो फिर कुछ भी करने का मतलब नहीं है। 🙏

और विनय कुमार चौधरी को यह तो एक बड़ा चुनौती का सामना करना पड़ेगा, लेकिन मुझे लगता है कि वह अपने संकल्प को नहीं बदलेंगे। यह देखना रोमांचक होगा... क्या वे इस फैसले पर सफल होंगे या नहीं। 🤞
 
अरे, ये बात तो बहुत दिलचस्प है 🤔। उपेंद्र कुशवाहा ने जो फैसला लिया है, वो उनकी खुद की बात है। और विनय कुमार चौधरी को अपने संकल्प को नहीं बदलना चाहिए, परन्तु यह सवाल उठता है कि पार्टी में उनकी नीतियों से सहमति क्यों नहीं है? क्या वे अपने दिल की बात नहीं समझ रहे? 🤷‍♂️

और बिहार में राजनीतिक खुशबू में यह बदलाव आया है, तो यह तो लोगों को आकर्षित करेगा। लेकिन सवाल उठता है कि विरोध क्यों नहीं किया गया था? क्या पार्टी में भी कोई आवाज़ नहीं थी जिसे उन्हें सुनना चाहिए था? 🤔

कुल मिलाकर, यह एक दिलचस्प मोड़ है और इसके बाद कुछ होने वाला ही है। 😃
 
यह बहुत ही दिलचस्प बात है। मुझे लगता है कि उपेंद्र कुशवाहा ने सही काम किया है, खुद की परिस्थिति को समझने और अपने साथी विनय कुमार चौधरी के संकल्प को समझने के लिए। इससे पार्टी में कुछ बदलाव भी आ सकता है जो जरूरी है। अब देखिए, यह पार्टी में एक नया मोड़ तैयार होने वाला है, और यह बदलाव हमेशा अच्छा नहीं साबित होता है। लेकिन मुझे लगता है कि उपेंद्र कुशवाहा ने सही तरीके से अपने संकल्प को बताया है 🤔
 
ਅरे, ਇਸ ਘोटਾਲ ਕੋਲ ਕੀ ਹੈ ? 😂 ਉਪੰਦਰ ਕੁਸ਼ਵਾਹਾ ਨੇ ਆਪਣੇ ਬੱਚੇ ਦੇ ਵੱਡੇ ਭਾਈ ਨੂੰ ਮੰਤਰੀ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਪਾਰਟੀ ਦੀ ਸਿਫ਼ਾਰਸ਼ ਤੋਂ ਵਿਰੋਧ ਕਰ ਦਿੱਤਾ , ਜਿਸ ਲਈ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੇ ਆਪਣੀ ਪਾਰਟੀ ਤੋਂ ਅਸਤੀਫ਼ਾ ਦੇ ਦਿੱਤਾ ! 👏

ਮੈਂ ਉਹਨਾਂ ਦੀ ਬਹੁਤ ਸਾਰੀ ਮਸ਼ਵਰਾ ਕਰਦਾ ਹਾਂ , ਪਰ ਇਸ ਵਾਰ ਉਹ ਵਿਅਰਥ ਫੁੱਟ ਗਏ ! 😒

ਮੈਨੂੰ ਲੱਗਦਾ ਹੈ ਕਿ ਪਾਰਟੀ ਦੇ ਅੰਦਰ ਜੁਝਾਰਾਤ ਹੋਣ ਲੱਗ ਪਿਆ , ਖ਼ਾਸ ਕਰ ਕੇ ਵਿਨਯ ਕੁਮਾਰ ਚੌਧਰੀ ਦੇ ਬਹੁਤ ਜ਼ੋਰਦਾਰ ਅਭਿਆਸ ! 💪
 
वाह, ये तो बहुत बड़ा फैसला हुआ है बिहार में। मैं तो उपेंद्र कुशवाहा की जिंदगी को समझ नहीं पाऊं, एक दिन वह राजनीति में होते हैं और अगले दिन तो पार्टी से निकाल दिया जाता है। मेरी पत्नी की बहन का भाई तो ऐसा ही हुआ था, उसकी पत्नी को पार्टी से बहुत परेशानी हुई थी।

मैं विनय कुमार चौधरी के निर्णय से सहमत नहीं हूं, क्योंकि वह अपने मंत्री को मिलवाने का फैसला कर रहे हैं। लेकिन मैं समझता हूं कि पॉलिटिक्स में जिंदगी कैसे होती है, और हर दफ़ा ऐसा ही नहीं होता। मुझे लगता है कि उपेंद्र कुशवाहा ने सही फैसला लिया है। 🤔
 
अरे, ये राजनीतिक खुशबू में बिल्कुल बदलाव आया है... उपेंद्र कुशवाहा ने पार्टी से इस्तीफा देने की घोषणा की है, और विनय कुमार चौधरी ने भी अपनी भूमिका को समझने के लिए पत्र भेजा है... मुझे लगता है कि यह पार्टी में जो बदलाव आया है वह कुछ समय से आ रहा था। और अब जब उपेंद्र कुशवाहा ने इस्तीफा देने की घोषणा की है, तो यह पार्टी के लिए एक बड़ा चुनौती होगी।
 
वाह, उपेंद्र कुशवाहा ने दिखाया है कि वे सच्चे नेताओं में से एक हैं। उनकी स्थिति बहुत मजबूत थी, लेकिन फिर भी उन्होंने अपने मूल्यों और नीतियों पर खड़े रहने का फैसला किया। यह हमेशा अच्छी बात है जब कोई नेता अपने संकल्प को नहीं बदलता। 🙏
 
बता दो, मैंने कल रात कोई दीवाल पर पेन नाम से एक कॉलिंग करनी थी, लेकिन फिर उसे फोन बंद हो गया था। फिर तो मैंने उसका फोन नंबर बदलकर बाद में उस दीवाल पर गुमसूम महसूस कराया, वहां बैठ गया और सोचा कि अगर वही दीवाल फट जाती, तो क्या होता?
 
क्या भाई, यह तो एक बड़ा झटका है। उपेंद्र कुशवाहा जी को पद छोड़ना देखने को मिल रहा है, और विनय कुमार चौधरी जी को अपने संकल्प पर चलने देना पड़ रहा है। मुझे लगता है कि यह पार्टी के लिए एक बड़ा रुकावट होगी, लेकिन मैं विनय कुमार चौधरी जी को उनके निर्णय पर चलने देने के लिए सलाम करूंगा। 🙏

मुझे लगता है कि उपेंद्र कुशवाहा जी ने सही सोची, और अगर उन्होंने अपने बेटे राजेश कुमार चौधरी को मंत्री बनाने की मांग वापस लेनी थी, तो विनय कुमार चौधरी जी ने गलती की। यह पार्टी के लिए एक बड़ा सबक होगा। 🤔
 
ज़रूर, यह बड़ा बदलाव है और सबकुछ क्या होगा, ये तय करना मुश्किल है। उपेन्द्र कुशवाहा ने बहुत देर से इस्तीफा देने की घोषणा की है, लेकिन अभी भी सवाल यह है कि क्या वास्तव में उन्होंने इस्तीफा देने का फैसला किया है या नहीं। यह एक बड़ा सीन है, और सबकुछ ठीक से समझने के लिए समय लगेगा।
 
ज़रूर बात है उपेंद्र कुशवाहा ने ऐसी बड़ी परेशानियाँ तयार कर दीं हैं और विनय कुमार चौधरी को भी इस निर्णय से लेकर बेहद कठिन समय मिल गया है।

उपेंद्र कुशवाहा की बातों पर ध्यान देना जरूरी है और उनके फैसले को समझने की कोशिश करनी चाहिए। उन्होंने अपने साथ काम करने वाले राष्ट्रीय उपाध्यक्ष चौधरी से लेकर पद छोड़ने तक का अपना तरीका बताया है और यह जरूरी है कि हम उनके दृष्टिकोण को समझें।

विनय कुमार चौधरी के दृष्टिकोण का इस पर प्रभाव पड़ेगा, लेकिन उन्होंने कहा है कि वे अपने संकल्प को नहीं बदलेंगे। यह देखकर अच्छा लग रहा है।
 
"जीवन में कभी भी जीत या हार, हमेशा सबक – बाबा साहब अम्बेडकर 🙏"

मुझे लगता है कि यह फैसला विनय कुमार चौधरी ने लिया होगा, तो एक बात जरूर है, पार्टी में खुशबू बदल गई है, और यह बदलाव बिहार के राजनीतिक दृश्य में बड़ा है। लेकिन जब तक विनय कुमार चौधरी अपना संकल्प नहीं बदलें, तो किसी भी कीमत पर उपेंद्र कुशवाहा की स्थिति ठीक नहीं होगी।
 
उपेंद्र कुशवाहा की बात सुनकर मुझे लगा कि वे सच्चे नेता हैं। उन्होंने अपने संकल्प और मूल्यों को बनाए रखने के लिए इतना बड़ा फैसला लिया है। यह एक अच्छी बात है कि वे पद और पार्टी से इस्तीफा देने के लिए तैयार हैं।

मुझे लगता है कि यह बदलाव हमें नई दिशा में ले जाने का अवसर है। उपेंद्र कुशवाहा ने अपनी पार्टी और पद से इस्तीफा देने का फैसला इसलिए किया है क्योंकि उन्होंने अपने मूल्यों और संकल्प को बनाए रखने का फैसला किया। यह एक अच्छा सबूत है कि वे सच्चे नेता हैं और उनकी बात हमें सुननी चाहिए।

मुझे लगता है कि यह बदलाव हमारे देश को नई दिशा में ले जाने का अवसर है। उपेंद्र कुशवाहा ने अपनी पार्टी और पद से इस्तीफा देने का फैसला इसलिए किया है क्योंकि उन्होंने अपने मूल्यों और संकल्प को बनाए रखने का फैसला किया।
 
अगर ऐसा हुआ तो यह अच्छा होगा कि उपेंद्र कुशवाहा ने अपनी बात रखी 🤞। दो लोग एक-दूसरे की बात सुनने में असमर्थ नहीं होते। अब विनय कुमार चौधरी को यह सोचना पड़ रहा है कि क्या उनका निर्णय सही था 🤔। उपेंद्र कुशवाहा की बात मानकर फायदा होता। अगर विनय कुमार चौधरी अपने संकल्प को नहीं बदलते तो पार्टी के लिए और भी बड़ा मुद्दा बन जाएगा 😬
 
આ ઘटनા પૂરી થયા બાદ, વિનય કુમાર ચૌધરીની આ સલાહ શોધ્યા તો એટલે જેવી છે. પાર્ટીમાં ચૌધરીનું કદ શું ?
 
बीजेपी में इतनी खुशबू खिल गई है तो फिर भी ऐसी बातें होती जानी चाहिए! उपेंद्र कुशवाहा ने अपने परिवार और राजनीति के प्रति समर्पण का उदाहरण दिया है। उनकी स्थिति में कोई गलत नहीं है, वह बस अपने परिवार के लिए जिसे महत्वपूर्ण मानते हैं उसी को पहले रखना चाहते हैं।

विनय कुमार चौधरी की निश्चितता दिलचस्प है! अगर उनके संकल्प में बदलाव होने की संभावना नहीं है, तो फिर वे अपने नेतृत्व क्षमताओं पर भरोसा कर सकते हैं। लेकिन इसने जो प्रभाव पड़ा है, वह देखने दिलचस्प होगा।
 
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