बिहार विधानसभा में सदन में तेजस्वी यादव और नीतीश कुमार की भिड़ंत।
बिहार की राजनीति तेजस्वी यादव और नीतीश कुमार के बीच खुलकर गरम हो गई। सदन में जमकर बवाल देखने को मिला। प्रश्नकाल से लेकर बहस के दौरान दोनों नेताओं के बीच तीखी नोक-झोंक हुई, जिसने न सिर्फ सदन की कार्यवाही को बाधित किया बल्कि राजनीतिक तापमान भी काफी बढ़ा दिया।
तेजस्वी यादव ने सरकार पर वादाखिलाफी, बेरोज़गारी, भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था के मुद्दों को लेकर आक्रामक हमला बोला और आरोप लगाया कि नीतीश कुमार की सरकार जनता से किए गए वादों को निभाने में पूरी तरह नाकाम रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि सत्ता में बने रहने के लिए सिद्धांतों से समझौता किया गया और जनता के विश्वास को ठेस पहुंचाई गई। तेजस्वी के आरोपों पर पलटवार करते हुए नीतीश कुमार भी बेहद आक्रामक अंदाज़ में नजर आए।
उन्होंने तेजस्वी पर अनुभवहीनता और गैर-जिम्मेदार राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि विपक्ष केवल शोर मचाने और भ्रम फैलाने का काम कर रहा है, जबकि सरकार विकास और सुशासन के लिए लगातार काम कर रही है।
नीतीश कुमार ने अपने कार्यकाल की उपलब्धियां गिनाते हुए विपक्ष को आईना दिखाने की कोशिश की और यह भी याद दिलाया कि सत्ता में रहते हुए तेजस्वी और उनकी पार्टी ने क्या किया और क्या नहीं किया।
दोनों नेताओं के बीच बढ़ती तल्खी के कारण सदन में शोरगुल इतना बढ़ गया कि स्पीकर को कई बार हस्तक्षेप करना पड़ा और कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित भी करनी पड़ी।
सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायकों ने भी अपने-अपने नेताओं के समर्थन में नारेबाज़ी शुरू कर दी, जिससे माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया।
यह टकराव केवल व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके जरिए आने वाले चुनावों की झलक भी साफ दिखाई दी। तेजस्वी यादव जहां खुद को एक मजबूत और आक्रामक विपक्षी नेता के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं नीतीश कुमार यह संदेश देना चाहते हैं कि वे अब भी राज्य की राजनीति के सबसे अनुभवी और निर्णायक नेता हैं।
सदन में हुआ यह बवाल इस बात का संकेत है कि बिहार की राजनीति आने वाले दिनों में और ज्यादा तीखी होने वाली है, जहां विकास, सुशासन और सत्ता की विश्वसनीयता जैसे मुद्दों पर मुकाबला और तेज होगा।
कुल मिलाकर, तेजस्वी और नीतीश की यह भिड़ंत सिर्फ एक दिन की बहस नहीं, बल्कि बिहार की सियासत में गहराते राजनीतिक संघर्ष की झलक मानी जा रही है।
बिहार की राजनीति तेजस्वी यादव और नीतीश कुमार के बीच खुलकर गरम हो गई। सदन में जमकर बवाल देखने को मिला। प्रश्नकाल से लेकर बहस के दौरान दोनों नेताओं के बीच तीखी नोक-झोंक हुई, जिसने न सिर्फ सदन की कार्यवाही को बाधित किया बल्कि राजनीतिक तापमान भी काफी बढ़ा दिया।
तेजस्वी यादव ने सरकार पर वादाखिलाफी, बेरोज़गारी, भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था के मुद्दों को लेकर आक्रामक हमला बोला और आरोप लगाया कि नीतीश कुमार की सरकार जनता से किए गए वादों को निभाने में पूरी तरह नाकाम रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि सत्ता में बने रहने के लिए सिद्धांतों से समझौता किया गया और जनता के विश्वास को ठेस पहुंचाई गई। तेजस्वी के आरोपों पर पलटवार करते हुए नीतीश कुमार भी बेहद आक्रामक अंदाज़ में नजर आए।
उन्होंने तेजस्वी पर अनुभवहीनता और गैर-जिम्मेदार राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि विपक्ष केवल शोर मचाने और भ्रम फैलाने का काम कर रहा है, जबकि सरकार विकास और सुशासन के लिए लगातार काम कर रही है।
नीतीश कुमार ने अपने कार्यकाल की उपलब्धियां गिनाते हुए विपक्ष को आईना दिखाने की कोशिश की और यह भी याद दिलाया कि सत्ता में रहते हुए तेजस्वी और उनकी पार्टी ने क्या किया और क्या नहीं किया।
दोनों नेताओं के बीच बढ़ती तल्खी के कारण सदन में शोरगुल इतना बढ़ गया कि स्पीकर को कई बार हस्तक्षेप करना पड़ा और कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित भी करनी पड़ी।
सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायकों ने भी अपने-अपने नेताओं के समर्थन में नारेबाज़ी शुरू कर दी, जिससे माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया।
यह टकराव केवल व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके जरिए आने वाले चुनावों की झलक भी साफ दिखाई दी। तेजस्वी यादव जहां खुद को एक मजबूत और आक्रामक विपक्षी नेता के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं नीतीश कुमार यह संदेश देना चाहते हैं कि वे अब भी राज्य की राजनीति के सबसे अनुभवी और निर्णायक नेता हैं।
सदन में हुआ यह बवाल इस बात का संकेत है कि बिहार की राजनीति आने वाले दिनों में और ज्यादा तीखी होने वाली है, जहां विकास, सुशासन और सत्ता की विश्वसनीयता जैसे मुद्दों पर मुकाबला और तेज होगा।
कुल मिलाकर, तेजस्वी और नीतीश की यह भिड़ंत सिर्फ एक दिन की बहस नहीं, बल्कि बिहार की सियासत में गहराते राजनीतिक संघर्ष की झलक मानी जा रही है।