मुंबई में बढ़ते वायु प्रदूषण की समस्या पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने का फैसला किया है। अदालत ने कहा है कि अब तक राज्य और नगर निकायों द्वारा उठाए गए कदम नाकाफी हैं और आम लोगों को शुद्ध हवा में जीने का अधिकार मिलना चाहिए।
कोर्ट ने कहा है कि प्रदूषण स्तर "बहुत गंभीर" तक पहुंचने की रिपोर्ट ने अदालत की चिंता बढ़ाई है। अदालत ने यह भी कहा है कि महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और मुंबई-नवी मुंबई की नगरपालिकाओं की ओर से दाखिल हलफनामे पर्याप्त नहीं हैं। प्रयास किए गए होंगे, लेकिन नतीजे दिखाई नहीं दे रहे।
अदालत ने यह भी कहा है कि बढ़ते मामलों और सीमित समय के कारण हर हलफनामे की सूक्ष्म जांच संभव नहीं, इसलिए निगरानी के लिए अलग व्यवस्था जरूरी है। अदालत ने कहा है कि समिति रोजाना बैठक कर अनुपालन की समीक्षा करेगी।
समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व न्यायाधीश करेंगे। अदालत ने कहा है कि समिति नगर निकायों और संबंधित एजेंसियों से प्रगति रिपोर्ट तलब करेगी।
कोर्ट ने यह भी कहा है कि जरूरी सुविधाएं और अधिकार समिति को दिए जाएंगे, ताकि निर्णय लागू हो सकें। अदालत ने दोहराया कि मुंबई जैसे महानगर में प्रदूषण कम करना प्राथमिकता होनी चाहिए और सभी एजेंसियों को जवाबदेह बनाया जाएगा।
अदालत ने यह भी कहा है कि प्रदूषण से प्रभावित नागरिकों को मुआवजा देने के सुझाव पर विचार हो सकता है। नवी मुंबई नगर निगम की ओर से मौजूदा वैधानिक निकायों का हवाला दिया गया, लेकिन कोर्ट ने कहा कि मौजूदा कार्यवाही में ऐसे निकायों की ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई, इसलिए समिति को कुछ अधिकार देना जरूरी है।
मुंबई में वायु गुणवत्ता का लगातार बिगड़ना स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बन चुका है। अदालत का यह कदम निगरानी, जवाबदेही और परिणाम-आधारित कार्रवाई की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिससे शहरी हवा की गुणवत्ता में ठोस सुधार की उम्मीद जगी है।
कोर्ट ने कहा है कि प्रदूषण स्तर "बहुत गंभीर" तक पहुंचने की रिपोर्ट ने अदालत की चिंता बढ़ाई है। अदालत ने यह भी कहा है कि महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और मुंबई-नवी मुंबई की नगरपालिकाओं की ओर से दाखिल हलफनामे पर्याप्त नहीं हैं। प्रयास किए गए होंगे, लेकिन नतीजे दिखाई नहीं दे रहे।
अदालत ने यह भी कहा है कि बढ़ते मामलों और सीमित समय के कारण हर हलफनामे की सूक्ष्म जांच संभव नहीं, इसलिए निगरानी के लिए अलग व्यवस्था जरूरी है। अदालत ने कहा है कि समिति रोजाना बैठक कर अनुपालन की समीक्षा करेगी।
समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व न्यायाधीश करेंगे। अदालत ने कहा है कि समिति नगर निकायों और संबंधित एजेंसियों से प्रगति रिपोर्ट तलब करेगी।
कोर्ट ने यह भी कहा है कि जरूरी सुविधाएं और अधिकार समिति को दिए जाएंगे, ताकि निर्णय लागू हो सकें। अदालत ने दोहराया कि मुंबई जैसे महानगर में प्रदूषण कम करना प्राथमिकता होनी चाहिए और सभी एजेंसियों को जवाबदेह बनाया जाएगा।
अदालत ने यह भी कहा है कि प्रदूषण से प्रभावित नागरिकों को मुआवजा देने के सुझाव पर विचार हो सकता है। नवी मुंबई नगर निगम की ओर से मौजूदा वैधानिक निकायों का हवाला दिया गया, लेकिन कोर्ट ने कहा कि मौजूदा कार्यवाही में ऐसे निकायों की ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई, इसलिए समिति को कुछ अधिकार देना जरूरी है।
मुंबई में वायु गुणवत्ता का लगातार बिगड़ना स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बन चुका है। अदालत का यह कदम निगरानी, जवाबदेही और परिणाम-आधारित कार्रवाई की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिससे शहरी हवा की गुणवत्ता में ठोस सुधार की उम्मीद जगी है।