बसवाराजू से हिड़मा तक, 2 अफसरों से हारा नक्सलवाद: ‘सरेंडर या एनकाउंटर' पॉलिसी से डरे नक्सली, 2100 का सरेंडर; 477 ढेर

छत्तीसगढ़-आंध्र प्रदेश बॉर्डर पर मारेडुमिल्ली जंगल में एनकाउंटर के दौरान नक्सली माडवी हिड़मा को मार गिराया गया।
 
नाक नहीं है कि यह अच्छी बात है 🤔, लेकिन नहीं तो भी यह बहुत भयानक है 😱। माडवी हिड़मा जैसे लोगों को मारना ठीक नहीं है, फिर भी मार देने से कुछ नहीं होता। नक्सलियों के बारे में बात करने वाले लोग हमेशा एक ही दिशा में चलते हैं, कभी कहीं यह नहीं सोचते। मारेडुमिल्ली जंगल में घुसने से पहले चिंता थी, मगर कुछ ऐसा नहीं होना चाहिए। पुलिस ने ठीक करने की कोशिश की तो फिर भी मरने वाले कौन थे।
 
नाकीना, यह बहुत अच्छा कि पुलिस ने नक्सली को मार दिया और लोगों को सुरक्षित रखा। मुझे लगता है कि इस जंगल में काफी खतरे क्योंकि था तो अब सुरक्षा बढ़ाने पर विचार करें। स्थानीय लोगों की बात माननी चाहिए और उन्हें मदद करनी चाहिए। नक्सलियों को शांति प्राप्त करने के लिए सबकुछ करने को तैयार होना चाहिए।
 
नाक में दर्द हो रहा है यह तो बहुत बड़ी खबर है 🤕 नाक्सलियों को सीरीज लगाने वाले देश में उनकी हत्या का मतलब क्या है? जंगल में लड़ाई लड़ने के लिए नक्सली पार्टी का एक और सदस्य गायब हो गया। मरेडुमिल्ली जंगल में एनकाउंटर की बात सुनकर लगता है कि सरकार ने फिर से एक बड़ा निर्णय लिया है। नक्सलियों को हराने के लिए पुलिस और सैनिक अपनी जान देने को तैयार रहते हैं।
 
🔥 वाह भाई, यह तो बहुत बड़ा खुलासा है! नक्सलियों को पकड़ने की जासूसी की जानी चाहिए। माडवी हिड़मा को मार गिराने से लोगों का आतंक कम हुआ हoga। लेकिन यह भी ध्यान रखना चाहिए कि नक्सलियों को पकड़ने के लिए सरकार को बहुत सावधानी बरतनी चाहिए, ताकि उनके लोगों पर भी कोई मारने का दांव न डाले। बाहर भी हमें नक्सलियों के खिलाफ लड़ने के लिए खड़े होना चाहिए। 🙌
 
मुझे ये सुनकर बहुत खेद हो रहा था! मारेडुमिल्ली जंगल की बहुत सारी बातें अच्छे निकलती हैं... तो फिर ये नक्सली क्यों ऐसे जंगल में रहते हैं? और उनके पास इतनी भुनियाँ हैं जो उन्हें खतरा नहीं देती? मुझे लगता है कि अगर हम अपने जंगलों को अच्छी तरह से रखें, तो ये नक्सली ऐसे खेलने का कोई reason नहीं रखते।

क्या शायद हमें अपने जंगलों को और अधिक सुरक्षित बनाने की जरूरत है? और नक्सलियों के लिए भी कुछ करने की जरूरत है ताकि वे बिना किसी परेशानी के जीवनयापन कर सकें। मुझे लगता है कि अगर हम दोनों पक्ष को समझें, तो शायद कोई समस्या नहीं रहेगी।
 
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