अंबिकापुर में हुए बलरामपुर बस दुर्घटना की वीडियो देखकर सब जुबान चूक गई। झारखंड के महुआडांड़ थाना क्षेत्र अंतर्गत लोध फॉल स्कूल बस ओरसाघाट मोड़ पर अनियंत्रित होकर पलट (Bus accident) गई थी, जिसमें 100 ग्रामीणों ने यात्रा की थी।
इस दुर्घटना में तेज रफ्तार से चलने वाली बस की ब्रेक फेल हो गई थी, जिसके कारण यह अनियंत्रित होकर पलट गई। इस घटना में 4 पुरुष और एक महिला की मौत हो गई, जबकि 95 लोग घायल हो गए।
इस दुर्घटना के बाद घटनास्थल पर पहुंचे महुआडांड़ पुलिस व सामरी पुलिस ने तुरंत एंबुलेंस से घायलों को अस्पतालों में भर्ती कराया। यह घटना छत्तीसगढ-झारखंड बॉर्डर पर हुई थी।
अगर ये बस इतनी तेज चल रही थी, तो उसकी ब्रेक फेल करने के लिए क्यों नहीं थोड़ा धीमा घूमती, कोई सोच सकता था? और फिर इतने ग्रामीणों की जान लेने वाली यह दुर्घटना, मुझे बिल्कुल पसंद नहीं है...
इस तरह की हादसों को रोकने के लिए हमें अच्छी सड़कें बनानी चाहिए, और बस ड्राइवर्स को भी दिमाग रखना चाहिए। अगर हमारे देश में हर जगह ऐसी ही सड़कें होंगी, तो यह ज्यादा घटनाएं नहीं होती।
मुझे लगता है कि सरकार को बसों और सड़कों के निर्माण पर अधिक ध्यान देना चाहिए, ताकि हमारे लोगों की जान बचाई जा सके।
यह दुर्घटना हुए जाने वाले लोगों के लिए बहुत दर्दनाक है, लेकिन हमें यह सोचना चाहिए कि ये दुर्घटना क्यों हुई। यह एक स्थिति है जहां लोग तेजी से चल रहे थे, और ब्रेक फेल होकर अनियंत्रित होकर पलट गई।
हमें यह सीखना चाहिए कि हमारे दैनिक जीवन में, भी कभी-कभी ब्रेक फेल हो सकता है। हमें अपने जीवन को अधिक सावधानी से चलने की कोशिश करनी चाहिए। और अगर हमें ऐसी स्थिति दिखाई देती है तो हमें जल्दी से कार्रवाई करनी चाहिए।
यह दुर्घटना हमें यह भी सोचने पर मजबूर करती है कि हमारे आसपास के लोगों की सुरक्षा कैसे महत्वपूर्ण है। हमें अपने परिवार और दोस्तों की सुरक्षा के लिए अधिक प्रयास करने चाहिए।
ये देखकर मुझे बहुत गुस्सा आया , यह तो बस से जाने का इंतज़ार नहीं कर रहा था। लोगों की जान जोखिम में डालकर रख दिया गया है और अभी भी सरकार कुछ नहीं करती। यह तो बस से जाने का इंतज़ार नहीं कर रहा था, लेकिन सरकार ने बसों में सुरक्षा प्रावधान नहीं किया है।
क्या ये लोग अपनी जान के बदले में सड़क पर चलने वाले लोगों को जिम्मेदार ठहराएंगे? यह तो बर्बादी का एक उदाहरण है , बस से जाने का इंतज़ार नहीं कर रहा था, लेकिन सरकार ने सुरक्षा प्रावधान नहीं किया है। यह तो दुर्घटनाओं की आबादी बना रहेगा।
कोई भी ऐसी बात नहीं कह सकता कि बस से जाने का इंतज़ार नहीं कर रहा था, लेकिन सरकार ने इसे तैयार नहीं किया है। यह तो दुर्घटनाओं की आबादी बना रहेगा।
ज़रूर, यह दुर्घटना न तो बस की ब्रेक फेल होने से, बल्कि वातावरण में शांति नहीं होने से हुई। हमारी रास्तों पर गति और जीवन जीने की गति में कितनी अंतर्दृष्टि रही! यह दुर्घटना न सिर्फ बस को बल्कि हमारे समाज में भी एक बड़ा झटका है। लोगों की जान गई, परिवारों का दर्द हुआ। इससे हमें पलटकर विचार करना चाहिए कि हम अपने रास्तों पर और अपने जीवन में शांति कैसे बनाए रख सकते हैं?
यह बहुत दुखद है कि ऐसी दुर्घटना फिर से हुई। बस की ब्रेक फेल होना एक बड़ा खतरा है और इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर कोई मुकाबला नहीं किया जा रहा है।
घायल लोगों को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया है, लेकिन अभी भी कई सवाल उठते हैं। क्या बस की जांच नहीं की गई थी? क्या ब्रेक की जाँच नहीं की गई थी? और क्या यात्रियों को सुरक्षित यात्रा करने के लिए पर्याप्त सावधानियां बरती गईं?
सबको यह समझना चाहिए कि हमारे देश में यातायात की सुरक्षा को लेकर बहुत कुछ नहीं बदला गया है। बसों और ट्रैक्टर-ट्रॉलरों की जांच नहीं की जाती, लेकिन अब यह हुआ है।
ये दुर्घटना बहुत गंभीर है , बस जैसे प्राथमिक सेवाओं वाली संस्था में भी ऐसी घटनाएं हो सकती हैं? लोगों की जान जोखिम में आ गई और घायल लोगों की मदद नहीं मिली तो बहुत बड़ी समस्या होती। इस प्रकार की दुर्घटनाओं से बचने के लिए सरकार को व्यवस्थित रूप से बस सफाई और नियमों की जांच करानी चाहिए।
इस दुर्घटना के पीछे तेज रफ्तार से चलने वाली बस को लेकर मेरा सवाल यह है कि क्या हमें लगता है कि बस की ब्रेक की जांच करना चाहिए या बस के ड्राइवर की प्रशिक्षण और अनुभव पर ध्यान देना चाहिए?
मुझे लगता है कि हमें अपने ग्रामीण इलाकों में बस सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए एक्सपीडिशन बस चलाने पर विचार करना चाहिए। इससे यातायात होने पर अनियंत्रित होकर पलटने की समस्या नहीं होगी। इसके अलावा, ड्राइवरों को अधिक प्रशिक्षण देना और उनकी जिम्मेदारी को समझाना चाहिए।
लेकिन फिर भी, मुझे लगता है कि हमें इस तरह से नहीं देखना चाहिए कि बस दुर्घटनाओं को एक समस्या के रूप में देखना चाहिए, बल्कि इसके पीछे की जड़ को समझना चाहिए।
इस घटना ने हमें सोचने पर मजबूर किया है कि हमारे ग्रामीण इलाकों में कैसे सुरक्षित और सुस्त बस सेवाएं चलाई जा सकती हैं।
यह बस दुर्घटना बहुत दुखद है । मैंने तो मात्र 5 किमी दूर क्षेत्र में भी ऐसा ही दुर्घटना होती देखी है। पुलिस व सामरी पुलिस दोनों को बस की मरम्मत पर ध्यान देना चाहिए, लेकिन लगता है वे इस मामले में कुछ करने में असफल रहे।
अगर हम अपने राष्ट्रीय राजमार्गों की सुरक्षा पर ध्यान देते, तो ये जघन्य अपराध न होता। बसें इतनी तेज चल रही थीं कि लोग अपने जीवन की पलटी में पड़ गए। 95 घायल, यह आंकड़ा हमारे राष्ट्रीय स्वास्थ्य व्यवस्था पर हमारी भरपाई करने की क्षमता को सवाल उठाता है।
जानलेवा बस दुर्घटना, ऐसी कई जगहें भारत में घट रही हैं । बसों को सुरक्षित बनाने के लिए सरकार को कुछ बदलना चाहिए। पहले तो यात्रियों को बस में जाने से पहले बैठने वाले वाली सीट पर बैठना पड़ता है, फिर भी ऐसी दुर्घटनाएं होती रहती हैं। बसों में सुरक्षा उपकरण लगाना चाहिए, और ड्राइवर को अच्छा प्रशिक्षण देना चाहिए। इससे यात्रियों की जान बचाई जा सकती है।
अगर बस चलाने वाले लोग अपने नेताओं जैसे नियंत्रित नहीं करते तो दुर्घटनाएँ होने का खत्मा नहीं हो सकता। और पुलिस तो दूर-दूर से आ जाती है या नहीं। मेरे अनुसार, बस चलाने वालों को स्किल्स शिक्षित करनी चाहिए ताकि वे अपनी बस को नियंत्रित कर सकें।
दुर्घटना की संख्या बढ़ गई, अब 100 लोग घायल हो गए! 95 लोगों के अलावा, घायलों में एक पैर हार गया और एक नेत्र बनाया गया। यह तो बस की ब्रेक फेल होने से नहीं बल्कि इसके ड्राइवर की गलती से हुई। पुलिस ने 3 दिनों में मामला दर्ज करने में देरी की, जिससे घायल लोगों को अस्पतालों में भर्ती कराने में भी देरी हुई।
मेरी भाई, ये देखकर तो कोई फिक्र नहीं करनी, बस पूरी तरह से कंप ले गई। तेज रफ्तार से चलने वाली बस की ब्रेक फेल हो जाना तो समझ में आता है, लेकिन इंसान की जान क्यों मान लेती है?
मुझे लगा कि स्कूल बस का निरीक्षण कम पूरा, यार, कम पूरा। बस चल रही थी तो नहीं देखा जाता की ब्रेक ठीक से काम कर रहा है या नहीं। इसके लिए सरकार को जवाबदेह करना चाहिए।
यह तो ऐसी बस की वीडियो देखने लगे हैं! पहले सोचा था कि ये बस तो ब्रेक फेल होने से भी नहीं मारती, लेकिन तेज रफ्तार से चलने पर भी यह पलटने लगती है! क्या बस के ड्राइवर को खुद को ड्राइव करने की शिक्षा नहीं मिली?
और फिर भी, हमारी सरकार की तैयारी से बेहतर इन दुर्घटनाओं की रिपोर्ट्स आने लगी हैं! बसों को सुरक्षित बनाने के लिए जो पैसा खर्च किया गया है, वह तो कहीं गायब हो गया होगा। और अभी भी यात्रियों को अपनी जान खतरे में डालने के लिए कुछ नहीं किया जा रहा है।
इस दुर्घटना से हमें एक बार फिर सोचने को मजबूर है कि हमारी जानवरों की सवारी बहुत ही अनियंत्रित है। बस में 100 लोगों को लगे थे कि यात्रा चल रही है, लेकिन बाद में यह पलट गया, वहीं तेज रफ्तार से चलती बस की ब्रेक फेल हो गई। यह भी सवाल उठता है कि क्यों नहीं थी यह बस सुरक्षित और अनियंत्रित होकर चलने वाली लेजर पर जांच की गई थी।
हमारे राष्ट्र में घनिष्ठ समाज और परिवार की दुनिया बहुत ही अच्छी है, लेकिन हमारे यातायात नियमों और सुरक्षा उपायों को ठीक करने की जरूरत है। इस तरह की घटनाएं जितनी बार होती हैं उतनी ही दूर होने वाली नहीं हैं।
यह तो बहुत दुखद है , लेकिन हमें ऐसे विडियो देखने से बचना चाहिए। यह तो बस की दुर्घटना है, जिसमें कई ग्रामीणों की जान गई। मुझे लगता है कि सरकार और पुलिस को इस तरह की घटनाओं से निपटने के लिए तैयार रहना चाहिए, लेकिन फिर भी यह दुर्घटना हुई। बस की गति बहुत ज्यादा थी, और ब्रेक फेल होने से इसका पलटना हुआ। हमें ऐसी घटनाओं से जागरूक रहना चाहिए और उनके लिए सरकार और पुलिस को जिम्मेदार होना चाहिए।
मेरा मन इस दुर्घटना से गुस्सा आया । बस चल रही थी, तेज रफ्तार से, फिर ब्रेक फेल हो गया, और पलट गई। यह कैसे हुआ? क्या लोग तैयार नहीं थे?
मुझे लगता है कि हमें बसों की सुरक्षा पर ध्यान देने की जरूरत है। सरकार को इस तरह की दुर्घटनाओं को रोकने के लिए कुछ करना चाहिए।
मैंने एक छोटी सी चित्र बनाया है जिसमें बस की दुर्घटना दिखाई गई है। [ ASCII art: /_/\ (टपकती) |||~(पलटती हुई) ]
यह हमारी भारतीय बसों की सुरक्षा के लिए एक चेतावनी है