‘C-ग्रेड फिल्म से भी बदतर है CM हिमंत बिस्वा सरमा का बयान’..पत्नी के ‘पाकिस्तानी कनेक्शन’ पर कांग्रेस सांसद का जवाब

कांग्रेस के काल में, जब आलोचना करने की स्वतंत्रता थी, फिर भी पाकिस्तानी कनेक्शन पर सवाल उठने की चुनौती कितनी बड़ी थी। एक बार फिर से, गौरव गोगोई ने मीडिया को बताया है कि उनकी पत्नी एलिजाबेथ के पाकिस्तानी कनेक्शन पर सवाल उठने का जवाब देना कितना आसान है।

उन्होंने कहा, "दिलचस्प बात यह है कि जब हमारे प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह की सरकार थी, तो अली तौकीर शेख ने 13 बार भारत आने की अनुमति दी गई। उसने सभी मंचों पर भारत की आलोचना की, लेकिन फिर भी उसे अनुमति मिली।" यह कहने की कोशिश है कि जब हमारे प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह थे, तो हमारे देश में वीजा नीति कितनी लचीली थी, और एलिजाबेथ को भारत आने की अनुमति मिली।

लेकिन अब जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हैं, तो उनका भारत आना बंद हो गया। यह सवाल उठने की चुनौती तब होती है जब हमें पता चलता है कि उनके साथ उच्च स्तरीय पाकिस्तानी अधिकारी भी लेकर जाते थे।

इस बीच, एलिजाबेथ ने अमेरिका से पाकिस्तान गई और वहीं से वापस भारत आ गईं। उनका तबादला भारत कर दिया गया था, लेकिन उन्हें वेतन अली तौकीर द्वारा दिया जाता रहा। यह कहने की कोशिश है कि हमें एलिजाबेथ की पाकिस्तानी कनेक्शन पर सवाल उठाने की चुनौती से निपटना होगा।
 
मुझे लगता है कि इस मामले में गौरव गोगोई और उनकी पत्नी एलिजाबेथ को थोड़ा समझाना पड़ सकता है। जब हम बात करते हैं कि पाकिस्तानी कनेक्शन पर सवाल उठना कितना आसान है, तो हमें यह भी याद रखना चाहिए कि उनकी पत्नी एलिजाबेथ ने अमेरिका से पाकिस्तान जाकर अपने पति की ओर से व्यवसाय करना शुरू कर दिया था।

और फिर, जब उन्होंने भारत लौटते हुए उनकी पात्रता को संभाला, तो वहीं पर उन्हें वेतन अली तौकीर द्वारा मिला रहा था। इसका मतलब यह नहीं है कि एलिजाबेथ ने अपने पति के लिए कोई गलत काम किया है, बल्कि यह सिर्फ एक ऐसी परिस्थिति है जिसमें हमें उन्हें उनके राजनीतिक रिश्तों की ओर से समझाना पड़ सकता है।
 
अरे, ये सचमुच अजीब बात है लाजवाब गौरव गोगोई ने बताया है कि उनकी पत्नी एलिजाबेथ को वीजा मिलने की चुनौती कहां? जब अली तौकीर शेख थे, तो भारत आने की अनुमति देने में उन्होंने बहुत लचीलापन दिखाया, लेकिन अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हैं और उनका साथ मिलना बंद हो गया है। यह सवाल उठने की चुनौती बड़ी है, खासकर जब उच्च स्तरीय पाकिस्तानी अधिकारी भी लेकर जाते थे।
 
मुझे लगता है कि यह खबर बहुत दिलचस्प है, लेकिन मैंने गौरव गोगोई जी की बातों पर थोड़ा सोचा है। वह कहते हैं कि जब आलोचना करने की स्वतंत्रता थी, तो भी पाकिस्तानी कनेक्शन पर सवाल उठने की चुनौती कितनी बड़ी थी। लेकिन मुझे लगता है कि यह सवाल उठने की चुनौती तब होती है जब हमें पता चलता है कि हमारे नेताओं के पास उच्च स्तरीय पाकिस्तानी अधिकारी भी लेकर जाते हैं।

मैं यह नहीं कह सकता कि एलिजाबेथ की पाकिस्तानी कनेक्शन वास्तव में उसके लिए बुरी थीं, लेकिन मुझे लगता है कि हमें इस पर और अधिक सावधानी से देखने की जरूरत है। क्या हमें यह जानने की जरूरत नहीं है कि एलिजाबेथ ने अमेरिका से पाकिस्तान गई और वहीं से वापस भारत आ गईं, और उसका तबादला भारत कर दिया गया था, लेकिन उन्हें वेतन अली तौकीर द्वारा दिया जाता रहा।

मुझे लगता है कि हमें इस पर और अधिक शोध करने की जरूरत है, और इसके बाद हमें यह तय करना होगा कि हमें एलिजाबेथ की पाकिस्तानी कनेक्शन पर सवाल उठाने की चुनौती से निपटना कैसे करें। 💡
 
नहीं तो यह तो बहुत अजीब है कि लोग इतने जल्दी एलिजाबेथ की पाकिस्तानी कनेक्शन पर सवाल उठाते हैं। पहले तो हमें पता चलता था कि उनकी पत्नी पाकिस्तान में रहती थी, इसलिए उन्हें भारत आने की अनुमति मिली थी। लेकिन अब जब उन्होंने अमेरिका से वापस भारत आ गईं, तो क्या हमें अभी भी सवाल उठाने की ज़रूरत है? 🤔

मैं सोचता हूँ कि यह एक दूसरे की गलतियों पर ध्यान केंद्रित करने की बात है। एलिजाबेथ को वेतन अली तौकीर द्वारा दिया जाता रहा, तो फिर उनकी पाकिस्तानी कनेक्शन पर सवाल उठाने से हमें कुछ नहीं होगा। न तो यह हमारे देश की गरिमा को कम करेगा, न ही हमारे प्रधानमंत्री की वीजा नीति को। 🙅‍♂️
 
मुझे लगता है कि पत्रकारों को अपने लेख में अच्छे से श्रृंखला लगानी चाहिए। पहले एलिजाबेथ की पाकिस्तानी कनेक्शन पर सवाल उठने, फिर उनके भारत आ जाने और वेतन अली तौकीर से देने की बात, और फिर गौरव गोगोई की बातें... ये सभी एक अच्छे से संरचित लेख का हिस्सा हो सकते थे।
 
मुझे लगता है कि ये सब बातें बहुत जटिल हैं और हमारे देश में कई तरह की नीतियां हैं। मेरी राय में, जब हमारे प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह थे, तो वीजा नीति में थोड़ा फायदा था, लेकिन अब यह बदल गया है। मुझे लगता है कि हमें अपने देश की नीतियों को समझने और उन्हें समायोजित करने पर ध्यान देना चाहिए। 🤔

लेकिन जब बात एलिजाबेथ की आती है, तो मुझे लगता है कि यह एक अलग संदर्भ है। हमें समझना चाहिए कि यह एक व्यक्तिगत मामला है और हमें उस पर सवाल उठाने की जिम्मेदारी नहीं लेनी चाहिए। 🙏
 
मुझे लगता है कि यह एक दिलचस्प विषय है, लेकिन मैं इस पर ज्यादा बोलने की कोशिश नहीं करूँगा 🤔

वीजा नीति के बारे में मेरा विचार है कि भारत में यह बहुत ही लचीली थी, खासकर डॉ मनमोहन सिंह की सरकार के दौरान। लेकिन अब, जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हैं, तो उनका भारत आना बंद हो गया, और यह सवाल उठने की चुनौती तब होती है जब हमें उच्च स्तरीय पाकिस्तानी अधिकारी भी लेकर जाते दिखाई देते हैं 💥

मुझे लगता है कि एलिजाबेथ की पाकिस्तानी कनेक्शन पर सवाल उठना एक बड़ी चुनौती है, और हमें इस पर बोलने के लिए तैयार रहना चाहिए 🗣️

यह लिंक देखें: [वीजा नीति के बारे में जानें](https://indianexpress.com/article/explained/the-evolving-india-pakistan-visa-policy/)

मुझे लगता है कि यह जानकारी हमें विज्ञापन से बचने में मदद करेगी 🙏
 
अरे, ये तो मुझे दिलचस्प लगता है... 🤔 कि क्यों लोग एलिजाबेथ की पाकिस्तानी कनेक्शन पर सवाल उठाते हैं? क्या हमें नहीं पता कि एलिजाबेथ को अमेरिका से भारत आने में आसानी से अनुमति मिली, लेकिन जब वो पाकिस्तान जाती है, तो सवाल उठना शुरू हो जाता? यह तो बहुत अजीब लग रहा है...

और फिर, क्या हमें नहीं याद है कि अली तौकीर ने एलिजाबेथ को वेतन दिया, और वह बिना किसी सवाल के भारत आयी? तो क्यों अब लोग उनकी पाकिस्तानी कनेक्शन पर सवाल उठाते हैं? यह तो बहुत अजीब है... 🤷‍♂️
 
मुझे लगता है कि यह बात दिलचस्प है लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि एलिजाबेथ जी को उनके पति के साथ शादी करने के लिए पाकिस्तान में रहने की अनुमति मिलनी चाहिए थी।

क्या हमें लगता है कि एलिजाबेथ जी के पास भारतीय नागरिकता नहीं होनी चाहिए थी और उनको अपने पति से अलग होकर भारत आकर शादी करनी चाहिए थी।

मुझे लगता है कि हमें यह बात भी नहीं भूलनी चाहिए कि एलिजाबेथ जी ने अमेरिका में रहते हुए पाकिस्तान को देखा। हमें यह नहीं करना चाहिए कि हमें उनके अतीत को बदलने की जरूरत नहीं है।
 
मुझे लगता है कि यह सब एक दिलचस्प मामला है, लेकिन फिर भी मैं थोड़ा संदेह करता हूँ। एलिजाबेथ के पाकिस्तानी कनेक्शन पर सवाल उठने की बात तो पहले से ही बहुत ज्यादा चर्चा में रही है, लेकिन अब जब गौरव गोगोई ने फिर से मीडिया को बताया है कि उनकी पत्नी के पास कुछ ऐसा है जिस पर सवाल उठने की जरूरत है, तो मुझे लगता है कि यह सब एक बड़ा माहौल बना रहेगा।

मैं नहीं कह सकता कि एलिजाबेथ वास्तव में पाकिस्तान से जुड़ी हुई थीं, लेकिन फिर भी यह सवाल उठने की चुनौती है। और सबसे बड़ा सवाल यह है कि हमारे देश में सरकार कैसे काम करती है? क्या हमारे प्रधानमंत्री को अपने परिवार के सदस्यों के बारे में सावधानी बरतनी चाहिए या नहीं।
 
मेरा विचार है कि यह सभी बातें सच हो सकती हैं, लेकिन हमें पहले साबित करने की जरूरत है। मैंने कभी नहीं देखा कि किसी भी पत्रकार या नेता ने अपने परिवार के सदस्यों के पाकिस्तानी कनेक्शन को खुलकर बताया हो। यह सवाल उठने की चुनौती तब होती है जब हमें दूसरों से यह जानने की जरूरत होती है कि वास्तव में उनके पास क्या कनेक्शन हैं। 🤔
 
🤔 गौरव गोगोई की बात सुनकर मुझे बहुत आश्चर्य हुआ। जैसे ही मैंने उनकी पत्नी एलिजाबेथ के पाकिस्तानी कनेक्शन पर सवाल उठने का जवाब देने को देखने लगा, तो मेरे मन में एक सवाल उत्पन्न हुआ - क्या हमारे देश में वीजा नीति इतनी लचीली थी, जिससे एलिजाबेथ को भारत आने की अनुमति मिल गई?

जैसे ही मैंने अली तौकीर शेख की बात सुनी, तो मुझे यह कहना होगा कि हमारे देश में वीजा नीति कितनी लचीली थी। जब डॉ मनमोहन सिंह की सरकार थी, तो एलिजाबेथ को भारत आने की अनुमति मिल गई, लेकिन आजकल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हैं, तो उनका भारत आना बंद हो गया। यह सवाल उठने की चुनौती तब होती है जब हमें पता चलता है कि उनके साथ उच्च स्तरीय पाकिस्तानी अधिकारी लेकर जाते थे।

मुझे लगता है कि हमें एलिजाबेथ की पाकिस्तानी कनेक्शन पर सवाल उठाने की चुनौती से निपटना होगा। लेकिन मैं यह कहना नहीं चाहता, कि हमारे देश में वीजा नीति इतनी खराब है। बस इतना कहूँगा कि हमें अपने देश को समझने और उसकी आलोचना करने की स्वतंत्रता की जरूरत है, ताकि हम अपने देश को बेहतर बना सकें।
 
बिल्कुल ये तो बहुत बड़ी मुद्दा है, लोगों को पता नहीं है कि हमारे प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह काल में वीजा नीति तो बहुत ही सहयोगी थी, अब नरेन्द्र मोदी जी के समय में यह सब बदल गया है। लेकिन एलिजाबेथ की बात करें, उनके पाकिस्तानी कनेक्शन पर सवाल उठना तो एक बड़ी चुनौती है, लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि हमारे देश में विश्वास बनाए रखना और सच्चाई बताना बहुत जरूरी है।
 
मैंने कल सुनील गोपी नामके एक दोस्त से मुलाकात की थी, जो अपने खेत में घास काटता है वहीं मैंने उसे फेसबुक पर पढ़ाई के बारे में बताया तो उसने कहा, "आरे यार, पढ़ाई कैसे करोगे? मुझे दुनिया की जानकारी मिलती है" 😂

लेकिन मैंने उसे बताया, "अरे दोस्त, पढ़ाई करना ही है तो अच्छा है, लेकिन बिना पढ़े नहीं चल सकता है" 🤓

मैंने उससे पूछा, क्या वह खेत में घास काटते समय सोचता है कि वह दुनिया की जानकारी कैसे प्राप्त करेगा, या वह बस सोचता है कि वह तो बस किसी काम को करता है? 🤔

मैंने उसे बताया, "दोस्त, पढ़ाई करना ही है, लेकिन जीवन में हर जगह सीखना भी होता है" 💡
 
कल फिल्म देखा तो था, मैंने सोचा कि एलिजाबेथ के पाकिस्तानी कनेक्शन वास्तव में क्या हैं। शायद यह एक बड़ा सवाल है जिसका जवाब नहीं मिलता। लेकिन बात करते समय, मुझे लगता है कि हमारी स्वतंत्रता और आलोचना करने की स्थिति दोनों अलग-अलग हैं। जब आलोचना करने की स्वतंत्रता थी, तो सवाल उठने की चुनौती थी। लेकिन अब जब यह सवाल उठने की चुनौती है, तो हमें पता चलता है कि हमारे पास क्या चुनाव हैं। 🤔
 
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