चुनाव आयोग पुलिसकर्मी की भूमिका नहीं निभा सकता: किसी का नाम हटाना नागरिकता पर सवाल उठाने जैसा, SIR के खिलाफ याचिकाओं पर सुनवाई

चुनाव आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रक्रिया पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान याचिकाकर्ताओं के वकील ने कहा कि चुनाव आयोग वोटर्स को शक की निगाह से देखते हुए संदिग्ध पड़ोसी या पुलिसकर्मी की भूमिका नहीं निभा सकता।

इस मामले में CJI सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने दलीलें सुनीं। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजू रामचंद्रन ने दलीलें रखीं।

वकील राजू रामचंद्रन ने कहा, चुनाव आयोग का काम लोगों की मदद करना है ताकि वे आसानी से वोट डाल सकें। BLO जैसे अधिकारियों को सिर्फ शक के आधार पर लोगों की जांच करने का अधिकार देना गलत है। किसी का नाम संदेह में वाटर्स लिस्ट से हटाना, नागरिकता पर सवाल उठाने जैसा है।

वहीं जस्टिस बागची ने कहा, 'माइग्रेशन' शब्द को कई बार गलत तरीके से अवैध प्रवासी समझ लिया जाता है, जबकि लोग अक्सर नौकरी या काम के लिए एक जगह से दूसरी जगह जाते हैं।

इस मामले पर रामचंद्रन ने पूछा, क्यों सिर्फ 9 राज्यों और 3 केंद्रशासित प्रदेशों को चुना गया। उन्होंने कहा कि लक्षद्वीप और अंडमान-निकोबार में तेजी से शहरीकरण या पलायन होने का दावा आसान अनुमान और लापरवाही है।
 
चुनाव आयोग की इस SIR प्रक्रिया पर बात करते समय, मुझे लगता है कि यह बहुत जटिल हो गया है 🤔। ऐसा लग रहा है कि बिना वोटर्स की मदद करने की, लोगों को अपने मतदान अधिकार का पूरा उपयोग करने में सक्षम बनने में, चुनाव आयोग का काम सिर्फ शक की निगाह से देखने में आ गया है। इससे बुरी तरह से लापरवाही और अनुमान लगाने वालों को शिकायत करने का मौका बढ़ जाता है 🙄

मुझे लगता है कि चुनाव आयोग का काम है लोगों की मदद करना, न कि उनकी जांच करना। चूंकि CCI और BLO जैसे अधिकारियों को यह सिर्फ शक पर आधारित करने देना सही नहीं है, वोटर्स के मतदान अधिकार की रक्षा में बाकी क्या कर सकते हैं? 🤷‍♂️

इस मामले पर ध्यान देते समय, 'माइग्रेशन' शब्द को सही तरीके से समझने की जरूरत है। जब लोग नौकरी या काम के लिए एक जगह से दूसरी जगह जाते हैं, तो यह अवैध प्रवासी नहीं माना जाना चाहिए। ऐसे मामलों को बेहतर ढंग से समझने की जरूरत है, न कि उनके लिए अलग से कानून बनाए जाने की।
 
चुनाव आयोग स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रक्रिया पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, यह तो बहुत ही दिलचस्प है 🤔। मुझे लगता है कि चुनाव आयोग वोटर्स को शक की निगाह से नहीं देख सकता, जैसे कि संदिग्ध पड़ोसी या पुलिसकर्मी की भूमिका। यह तो उनकी बिल्कुल जरूरत नहीं है, लेकिन मुझे लगता है कि उन्हें अपने काम में थोड़ा और ध्यान देना चाहिए। 📝

जैसे कि वकील राजू रामचंद्रन ने कहा, चुनाव आयोग का काम लोगों की मदद करना है, ताकि वे आसानी से वोट डाल सकें। यह तो सही है, लेकिन हमें उन्हें ऐसी चीजों पर ध्यान देने की जरूरत नहीं है जिनके लिए पहले से ही सिद्ध व्यवस्था हो।

लेकिन मुझे लगता है कि इस मामले में उनकी बात सही नहीं है। चुनाव आयोग को यह तो बहुत ही महत्वपूर्ण काम है, जिसमें हमारे देश की Zukunft का निर्धारण होता है। इसलिए, उन्हें अपने काम में अधिक सावधानी और गंभीरता लानी चाहिए।

इस तरह से, हमें यह तो सुनिश्चित करना चाहिए कि चुनाव आयोग अपने काम में सही तरीके से आगे बढ़ रहा है, और हमारे देश की जनता की आवाज को सुनकर उनके निर्णय ले रहा है।
 
बोलते बोलते यह चुनाव आयोग की नई नीति क्या है...? पहले तो डीजीएनआई में भी ऐसा ही बात कर रहे थे, लेकिन अब ये दिल्ली सुपरमोर्चा लगा गई है। पूरे देश को चुना गया नहीं, बस 12 राज्यों और कुछ केंद्रशासित प्रदेशों को। बाकी सभी राज्य जहां वोटर्स की संख्या कम या मध्यम हैं उन्हें छोड़ दिया गया। यह तो एक बड़ा भ्रष्टाचार है...!
 
मुझे लगता है कि यह सिर्फ चुनाव आयोग को वोटर्स की रक्षा करने के लिए बनाया गया योजना है, लेकिन क्या इस प्रक्रिया में नागरिकों के अधिकारों का ध्यान रखा जाता है? 🤔

मैं सोचता हूं कि अगर हमारे देश में शहरीकरण और पलायन बहुत तेजी से हो रहा है, तो क्या हमने अपने चुनावों में इन विकल्पों को ध्यान में रखा है? मुझे लगता है कि यह एक अच्छा समय है कि हम अपने चुनाव सिस्टम को अद्यतन करें ताकि नागरिकों को उनके अधिकारों और विकल्पों के बारे में जागरूक किया जा सके। 📈

मैं देख रहा हूं कि लोग चुनाव सिस्टम में बदलाव करने की बात कर रहे हैं, लेकिन हमें यह तय करने की जरूरत है कि हम अपने देश को और अधिक स्वदेशी बनाना चाहते हैं या नहीं। 🤝
 
मुझे लगता है कि चुनाव आयोग को वोटर्स की जांच करने में भी सख्ती बरतनी चाहिए, लेकिन शक की निगाह से नहीं। अगर कोई संदिग्ध है, तो उन्हें वोट देने से पहले पता चलना चाहिए। इसमें समय और प्रयास लगेगा, लेकिन इससे मिलकर देश की गुणवत्ता बढ़ेगी। और फिर, सरकारों को विकास के लिए पैसे निकालने की बजाय खान-पान और आर्थिक रोजगार पर ध्यान देना चाहिए।
 
Back
Top