चुनाव डायरी: यूबीटी उम्मीदवार को मिली एक वोट से जीत, BMC में बेटे की जीत के एक दिन बाद पिता की मौत

परभणी नगर निगम के चुनाव में भाजपा के आकाश पुरोहित ने शनिवार को अपने पिता राज के. पुरोहित की मौत हो गई।

आखिरकार परिस्थितियों ने इस बात से वाक्य को बदल दिया। आकाश पुरोहित 221 सीट से जीत हासिल करने के एक दिन पहले, अपने पिता राज के. पुरोहित की मौत हो गई थी। वह मुंबई के एक निजी अस्पताल में शनिवार को अंतिम सांस लेते हुए दिखाई दिए।

आखिरकार, आकाश राज पुरोहित का बेटा एक वोट की अंतर गोली में जीत हासिल करने के एक दिन पहले अपने पिता की मौत हो गई थी। वह मुंबई के एक निजी अस्पताल में शनिवार को अंतिम सांस लेते हुए दिखाई दिए।
 
मुझे लगा जैसे आज की राजनीति तो सचमुच पुरानी मोड़ी गई है… ये आकाश पुरोहित जीतने के एक दिन पहले अपने पिता की मौत हो गया, यह तो 90 के दशक में भी कभी नहीं सोचा था। आज की राजनीति में ऐसी बातें होना तो आम बात हो गई है… 🤔

मुझे लगता है कि हमारी राजनीतिक प्रक्रिया में कुछ बदलाव जरूर चाहिए, जिससे ऐसी स्थितियों को रोका जा सके। लेकिन यह तो एक बड़ा सवाल है कि कैसे करें, और क्या हमारे नेताओं को इस पर ध्यान देना चahiye?… 🤷‍♂️

आज से पहले, मैंने सोचा था कि बेटियाँ भी पिता जैसे होती हैं, लेकिन लगता है कि आज की राजनीति में ऐसी बातें होना तो सचमुच नहीं है।… 😔
 
मुझे लगता है कि यह बहुत अजीब तो है... आकाश पुरोहित जीत हासिल करने के एक दिन पहले अपने पिता की मौत हो गई... ऐसा लगता है कि परिस्थितियां बदल चुकी हैं। मुझे लगता है कि यह बहुत असहज है, जीतने से पहले खुशी में कोई भी खास बात नहीं करता। वाह! ऐसा लगता है कि उनके लिए जीतना थोड़ा आसान हो गया... 🤔
 
क्या बात है! चुनावों में जीत जाने के लिए तो तैयारी कैसे कर सकते थे? उसके पिताजी की मौत से पहले वोट गोली में जीतने की संभावना कैसे होती थी? और उस चुनाव में वह 221 सीटों पर जीत नहीं पाते तो क्या होता?
 
अरे, यह बहुत दुखद है 🤕 आकाश पुरोहित जी की मौत की, तो बहुत बड़ी चुनौती और दबाव है। उनका पत्नी नेहा कुछ भी नहीं कह रही थी, सिर्फ रिलीफ की बात कर रही थी। उनकी जीत एक दिन पहले थी, तो यह बहुत ही मुश्किल समय था। मुझे लगता है कि वो अपनी पार्टी और परिवार के लिए बहुत ही मजबूत स्वास्थ्य बनाए रखने की कोशिश करेंगे। वो खुद भी अच्छी सेहत वाले होने चाहिए, ताकि वह अपने देश के लिए और अपने परिवार के लिए बहुत ही अच्छा प्रदर्शन कर सकें।
 
आकाश पुरोहित की मौत का यह तो बहुत ही अजीब बात है 🤔। पहले वह अपने पिता की मौत की खबर दे रहे थे, फिर वह दिखाई देते हैं जैसे वे अपने पिता की मौत की शोक संदेश दे रहे हैं। यह तो बहुत ही अजीब स्थिति है और लोगों को भी बहुत परेशान कर रही है।
 
अखिल भारतीय विपक्षी दलों के राजनीतिक गिरोह का यह खेल साफ़ है - चुनाव जितना करीब आता है, प्रतिभागी उतना ही बुराई में फंस जाते हैं 🤦‍♂️
 
आकाश पुरोहित की जीत तो हुई ही, लेकिन क्या यह हमेशा एक अच्छे संदेश का अर्थ है? मुझे लगता है कि ऐसी चीजें होने से पहले उनकी जीत में संदेह की बात करना सही नहीं होता। अब जब उसके पिता की मौत हो गई है, तो मेरे मन में एक सवाल उठ रहा है - क्या उनकी जीत का यह तरीका सचमुच भारतीय जनता पार्टी की विरासत से मेल खाता है? मैंने देखा है कि ऐसी चीजें होने पर पार्टी के नेताओं को अक्सर आलोचकों की आलोचना करनी पड़ती है। मुझे लगता है कि इस मामले में भी ऐसा ही होने की संभावना है।
 
आज भी सोचता रहता हूँ कि पोलिटिक्स में जीत और हार कितनी तेजी से बदल सकती है। आकाश पुरोहित की कहानी एक अच्छा सबक है - जीतने से पहले खो देना क्यों? वह एक अच्छे नेता होने का दावा करते थे, लेकिन वास्तविकता में कितना बदल गया?
 
इस बातचीत में क्या कहना है? अगर आकाश पुरोहित 221 सीट से जीत हासिल करने वाला होता, तो उनकी बहन सुनीला पुरोहित किस स्थान पर खड़ी होगी? और वहां कौन खड़ा होगा? यह जानने की जरूरत नहीं थी, लेकिन अब ऐसा लगता है कि बहुत कुछ बदल गया है। क्या इस बातचीत में कोई राजनीतिक गड़बड़ी की भावना है?
 
ਵਿਚਾਰ ਕਰਦੇ ਹੋਏ, ਆਖ਼ਰ ਸਮਾਜ ਵਿੱਚ ਅਰਥ ਪ੍ਰਤੀਬਦ्धਤਾ ਦੀ ਲੋੜ ہੈ। ਆਖ਼ਰ ਇਹ ਸੋਚ ਕੇ ਨਿਸ਼ਚਿਤ ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਕਿ ਆਪਣੇ ਵਿਅਕਤੀਗਤ ਜੀਵਨ ਵਿੱਚ ਕੋਈ ਵੀ ਮਰੀਜ਼ ਦੇ ਵੱਲ ਦ੍ਰਿਸ਼ਟੀ ਛੱਡ ਬੈਠੀ।
 
क्या भाइयों-बहनों, यह तो बहुत दुखद है कि आकाश पुरोहित जी के पिता राज के. पुरोहित जी की मौत हो गई। उनके लिए इस समय का चुनाव बहुत करीब था, लेकिन याद रखना चाहिए कि एक व्यक्ति की जिंदगी हमेशा अस्थिर रहती है। आकाश पुरोहित जी ने अपने दादाजी के सपनों को पूरा करने का प्रयास किया था, लेकिन फिर भी जीवन बहुत अजीब-गरीब बातें करता है। मैं उनकी श्रद्धांजलि के लिए नमस्कार करता हूँ।
 
मानो तो ये बड़ी मज़ाक है कि आकाश पुरोहित का पिता तो अपने बेटे की जीत के एक दिन पहले मर गया 🤯। लेकिन तो यहाँ पर हमें मानना पड़ेगा कि जिंदगी ने फिर से खेल बदल दिया है। शायद आकाश पुरोहित ने अपने पिता की मौत को एक नई रणनीति के रूप में देख लिया होगा। तो यह तो हमेशा से चली आती थी जिंदगी की बात, जहाँ पर सबसे बड़ा खेल जीतने का मौका मिलता है।
 
आकाश पुरोहित की बहुत बड़ी जीत के बाद उनके पिता राज के. पुरोहित की मौत सुनकर मुझे थोड़ा आश्चर्य हुआ 🤔। इससे पहले वे 221 सीटें जीतने के लिए इतने मजबूत थे, और अब एक दिन में ऐसा हो गया। मैंने उनकी प्रारंभिक तस्वीर देखी तो उन्होंने एक मजबूत व्यक्ति दिखाया था, लेकिन कभी भी जीत की महत्वपूर्णता पर ध्यान नहीं दिया था। अब मुझे लगता है कि उनकी बहादुरी और नेतृत्व क्षमता हमेशा से रही होगी, लेकिन इस व्यवस्था में जीतने के लिए एक नए स्तर पर पहुंचना मुश्किल हो गया है।

[एक छोटी सी डायग्राम]
जीत - बहादुरी
व्यवस्था - नेतृत्व क्षमता
 
ऐसी तो बहुत ही गंभीर और अचानक घटना हुई, जिसने आकाश पुरोहित के चुनाव में जीत की दिशा बदल दी। उनके पिता राज के. पुरोहित की मौत के बाद, आकाश को अपनी जीत पर विचार करना पड़ा और उसके साथ ही एक नई दिशा भी बन गई।

अब हमें हिंदुस्तान के लिए यही सवाल देखना होगा, कि चुनाव में जीतने के बाद, आकाश पुरोहित ने अपने पार्टी के नेतृत्व को कैसे संभालना शुरू करेगा।
 
तो वाक्य तो कैसे चला? पहले वाह, आकाश पुरोहित की जीत का सपना बन गया, फिर एक मिनट बाद उसका पिता दिल से जा गया। यही ऐसा लगता है जैसे खेल खेलते समय खिलाड़ी को नुकसान पहुँचाने वाले खिलाड़ी की मौत हो गई।
 
मैंने बातचीत करने का फैसला नहीं किया, इसके बजाय मैंने एक बिल्कुल भी ऐसा नहीं समझा कि आकाश पुरोहित को पहले से ही जीत मिल गई थी। लेकिन फिर मुझे यह विचार आया कि क्या ये ऐसा माना जाए कि चुनावों में जीतने के बाद भी कोई खुशियां नहीं मिलती, क्या यह एक सच्चाई है? और फिर मैं सोचta ki अगर ऐसा तो शायद हमारे देश के बाहर के लोग भी ऐसा ही महसूस करेंगे, और फिर मेरा विचार बदल गया।
 
बेटी ने कहा माँ की बात समझ लिया, यह तो बहुत बड़ा खेल है जो आकाश पुरोहित ने जीतने के लिए खेला था। 221 सीट से जीत हासिल करने के एक दिन पहले, उसका पिता उसकी जीत की शुभकामनाएं दे रहे थे। लेकिन आखिर में परिस्थितियाँ ऐसी हो गईं कि वह अपने पिता को ही मिल सका। यह बहुत दुखद है, मुझे लगता है कि उसके पास जीतने के लिए इतनी तेजी से चाल चलने की क्षमता थी।
 
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