चाय की दुकान से IAS तक का सफर, चायवाले के बेटे हिमांशु गुप्ता ने कैसे क्रैक किया UPSC?

उत्तराखंड के सितारगंज से उत्पन्न हिमांशु गुप्ता, जो आज भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) में न्यूनतम रैंक प्राप्त करने वाले व्यक्तियों में से एक हैं। उनकी कहानी हमें यह सिखाती है कि सफलता परिवार की आर्थिक स्थिति, बचपन के संघर्षों और सही दिशा में लगन से प्रयास करने पर आधारित होती है।
 
उत्तराखंड के सितारगंज से उत्पन्न हिमांशु गुप्ता की कहानी एक प्रेरणादायक संदेश देती है 🌟। उनकी सफलता परिवार की आर्थिक स्थिति से नहीं हुई, बल्कि बचपन के संघर्षों और सही दिशा में लगन से प्रयास करने पर आधारित है। यह हमें याद दिलाती है कि सफलता की कुंजी खुद को मजबूत बनाने में निवेश करना और अपने सपनों को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत करना होती है। 🏋️‍♀️

हिमांशु गुप्ता की कहानी हमें यह भी याद दिलाती है कि सफलता केवल उच्च रैंक प्राप्त करने तक सीमित नहीं है। उनकी यात्रा में कई चुनौतियों और असफलताओं का सामना करना पड़ा होगा, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। यह हमें प्रेरित करती है कि हम भी अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए कड़ी मेहनत करें और कभी हार नहीं मानें। 💪
 
मुझे लगता है कि हमारे देश में सच्ची सफलता की कहानियां बहुत कम देखी जाती हैं। यह हिमांशु गुप्ता की कहानी वाकई प्रेरणादायक है। उनकी कड़ी मेहनत और निरंतर प्रयास ने उन्हें एक ऐसी स्थिति तक पहुंचाया है जो कम से कम एक लाख लोगों की उम्मीदों को टिकाए।
 
मुझे लगता है कि ये ऐसी कहानियाँ हमेशा अच्छी लगती हैं लेकिन क्या यह सच है? क्या हर इंसान जैसा सफलता प्राप्त कर सकता है? मेरी राय में बाकी सब सही है परन्तु कहानियों में हमेशा एक ही नियम चलता है - संघर्ष और धैर्य।
 
मुझे लगता है कि ये सफलता की कहानी हमें सिखाती है कि जो भी हम अपने लक्ष्यों की ओर आगे बढ़ना चाहते हैं वो परिवार की आर्थिक स्थिति के बावजूद भी संघर्ष कर सकते हैं। लेकिन हमें याद रखना होगा कि सफलता में नशे में दीवानगी होना और अपने लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
 
ऐसा लगता है कि हमारे समाज में लोग खुद को परिभाषित करके अपने लक्ष्यों को प्राप्त करते हैं। यह इमान्दारी और संघर्ष की भावना ही सफलता की कुंजी है। अगर हम अपने जीवन में एक ऐसा मकसद निर्धारित कर लेते हैं जिस पर हम फिकर करते रहें, तो कुछ नहीं रोक सकता।

इसलिए, हिमांशु गुप्ता की कहानी से हमें यह जानने को मिलता है कि सफलता एक राह की खोज है, न केवल पूर्वार्ध की बात।
 
सुनकर बहुत खुश हूँ यह कहानी। जैसे हिमांशु गुप्ता ने अपनी पढ़ाई के लिए जो मेहनत की और अपने सपनों को पूरा करने के लिए कितनी कठिनाई तय की, वह हमें सबक सिखाता है कि सचमुच सफलता बहुत करीब है 🐈💡

अगर मैं उसे पूछूंगा तो उनकी कहानी मुझे यह सोचने पर मजबूर करती है कि हमारे परिवारों में कितनी महत्वपूर्ण भूमिका खेलती है, और बचपन से ही हमें किस तरह की दिशा में चलना चाहिए। और यह भी सच है कि जो सही दिशा में लगन से प्रयास करते हैं वे सफलता की ओर तेजी से बढ़ते हैं।
 
आजकल ऐसे कई दिन हो रहे हैं जिनमें नौकरी की तैयारी में बहुत से लोग अकेलेपन की भावना का सामना कर रहे हैं। हमें याद रखना चाहिए कि सफलता की कहानियाँ अक्सर परिवारिक आर्थिक स्थिति, बचपन के संघर्षों और सही दिशा में लगन से प्रयास करने पर आधारित होती हैं। 🤝

उत्तराखंड के हिमांशु गुप्ता जैसे व्यक्ति हमें यह सिखाते हैं कि नौकरी की तैयारी में लगन, धैर्य और सही दिशा में प्रयास करना बहुत जरूरी है। उनकी कहानी हमें यह भी याद दिलाती है कि सफलता के लिए परिवारिक आर्थिक स्थिति हमेशा अच्छी नहीं रहती, लेकिन अगर आप सही दिशा में प्रयास करते हैं तो आप अपने सपनों को पूरा कर सकते हैं। 💪
 
अरे, जानने योग्य है कि इस नौजवान ने अपनी पढ़ाई के लिए एक छोटे से शहर से शुरू किया था, फिर बाद में बीच-बीच में बागडोड़ में प्रतिस्पर्धाओं में भाग लेकर पैसे कमाने लगा। यह तो हिमांशु जी की सफलता की कहानी नहीं बनती।
 
उत्तराखंड का ये सितारगंज वाला हिमांशु गुप्ता तो बिल्कुल अद्भुत है 🤩, मुझे लगा की वह जितना सफल हुआ उतना भी निरंतर प्रयास करता रहा और अपने परिवार के साथ। मेरा विचार है कि हमें अपने बचपन से ही सही दिशा में आगे बढ़ने का फैसला करना चाहिए, खुद को विकसित करना चाहिए और कभी भी हार नहीं माननी चाहिए।
 
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