छावनी बना दिल्ली का तुर्कमान गेट: मस्जिद के पास बुलडोजर एक्शन, भीड़ ने किया पुलिस पर पथराव; आंसू गैस का प्रयोग

दिल्ली की राजधानी में हुए अतिक्रमण हटाने वाली बुलडोजर कार्रवाई में स्थानीय लोगों ने विरोध किया और भीड़ आक्रोशित हो गई। भीड़ ने पुलिस और कार्रवाई कर रही टीम पर पथराव कर दिया। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि अतिक्रमण हटाने के कार्रवाई के दौरान कुछ उपद्रवियों ने पत्थरबाजी कर माहौल बिगाड़ने की कोशिश की। पुलिस ने हल्का बल प्रयोग कर हालात काबू किए और आंसू गैस के गोले भी छोड़े।

तुर्कमान गेट स्थित फैज-ए-इलाही मस्जिद पर बुलडोजर चलाकर दिल्ली नगर निगम (MCD) ने अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाया। इस कार्रवाई में पांच पुलिसकर्मी घायल हो गए। पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले दागे।

मस्जिद के आस-पास अवैध अतिक्रमण को तोड़ा गया और बरात घर के एक हिस्से को बुलडोजर चलाकर तोड़ा गया। स्थानीय लोगों ने विरोध किया और भीड़ आक्रोशित हुई। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि अतिक्रमण हटाने के दौरान कुछ उपद्रवियों ने पत्थरबाजी कर माहौल बिगाड़ने की कोशिश की।

इस घटना में आंसू गैस का प्रयोग भी किया गया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि स्थिति को तुरंत नियंत्रित किया गया और कम से कम बल का इस्तेमाल करके सामान्य स्थिति बहाल की गई।
 
बड़ा बड़ा यह बुलडोजर चलाने वाले लोग जो दिल्ली में ऐसी सारी चीजें तोड़ रहे हैं... मुझे लगता है कि ये लोग कुछ भी समझ नहीं रहे हैं। वे मस्जिद पर बुलडोजर चलाते समय निकाले गायों को सुरक्षित रखने के लिए क्या करेंगे? और यह पांच पुलिसकर्मी घायल होने की बात तो बड़ी ही अजीब है... ऐसे में क्या पुलिस थीं अपने जवानों को खतरे में डाल रही थीं।
 
दिल्ली में बुलडोजर कार्रवाई विरोध हुआ 🚫, लोगों ने कहा देखिए, पहले हम तो अपने घर की मरम्मत कर लेते थे अब तो बहुत बड़ा काम है जिसे करते समय भीड़ बाहर निकलकर मार रही है। 🤯 पुलिस कह रही है उपद्रवियों ने पत्थरबाजी की, लेकिन सवाल यह है कि सड़कें तो कैसे बनीं और मुस्लिम समुदाय का जीना तो कैसे होगा? 🤔

यह घटना बहुत गंभीर है, हमें यह सोचकर भी नहीं करना चाहिए कि ट्रैफिकिंग का एक मौका मिल गया है। पुलिस ने हल्का बलप्रयोग किया और आंसू गैस दी, लेकिन सड़कों पर साफ-सुथरी नहीं हो सकती। तुर्कमान गेट पर मस्जिद को बनाए रखने वाले लोगों को अपने अधिकारों के लिए लड़ना चाहिए।

सड़कों में सुरक्षित रास्ते होना चाहिए, हमें तय करना चाहिए कि कैसे भविष्य बनेगा, इसी तरह के मामले बढ़ते जाएंगे।
 
बुलडोजर चलाकर अतिक्रमण हटाने वाले दिल्ली नगर निगम (MCD) की यह कार्रवाई समझ में नहीं आई 🤔। पार्टी की राजनीति में स्थिरता होनी चाहिए, लेकिन इस तरह की बुलडोजर कार्रवाइयों से विरोध करने वाले लोगों पर अटैक करना उचित नहीं है 💔। पुलिस अधिकारियों को तुरंत काबू करने में सक्षम थे, लेकिन इस तरह की कार्रवाई से मुसीबत बढ़ गई। निगम को अपने निर्णयों पर खुद ही विश्वास रखना चाहिए, और लोगों से बात करनी चाहिए, ताकि किसी भी तरह की समस्याओं को पहले से ही हल कर लिया जा सके। 🤝
 
यह बिल्कुल सही है कि पुलिस को हल्का बलप्रयोग करना चाहिए न कि आंसू गैस... 😒 तुर्कमान गेट पर विरोध ज्यादा से ज्यादा माहौल बिगाड़ने के लिए हुआ, तो पुलिस ने सही तरीके से माहौल काबू कर लिया।
 
मैंने देखा है कि यह बुलडोजर कार्रवाई तो कुछ लोगों को बहुत परेशान कर रही है, विशेषकर मस्जिद आसपास के लोगों को। मुझे लगता है कि प्रशासन को यह सोचते समय ध्यान रखना चाहिए कि किस तरह के तरीके से ऐसी जानकारियां अपनाई जाती हैं। क्या जरूरी था ऐसी बड़ी टीम लगानी?
 
बेटा, ये घटनाएं सुनकर मुझे बहुत दुख हुआ 🤕 । पुलिस ने हल्का-फुल्का ही बलप्रयोग कर लिया तो भी, भीड़ बिलकुल सही कार्रवाई करने वाली नहीं लग रही। क्या उन्हें पता था कि उनकी गोलियाँ से कैसे लोगों की आँखें भर जाएं? 🙏

मुझे लगता है कि यह घटना तो दिल्ली के आगे-पीछे चलने वाले मुद्दों में से एक है। हमें अपने शहर को इतना ही बनाना चाहते हैं कि वहाँ पर लोग सामाजिक न्याय और शांति के साथ रहने का मौका भी नहीं मिले। 🤔

आजकल यह तो बुलडोजर चलाकर हमारी खान-पानी की ज़िंदगी की जा रही है। लोगों को अपना घर छोड़ने का मौका दिया गया तो भी, वे तो कहीं और बस जा रहे थे। यह तो हमारे समाज की समस्याओं को हल नहीं करेगा। 🤷‍♂️

हमें अपने शहर को ऐसा बनाना चाहिए कि वहाँ पर लोग स्वस्थ रहने का मौका भी हो, उनकी जरूरतों का ध्यान रखा जाए। और अगर हम ऐसा करना नहीं कर पाते, तो फिर हम अपने आप को शांति और सहनशक्ति का संग्रही घोषित कर लें। 🙏
 
बुलडोजर वाली ये घटना बहुत ही दुखद है 🤕 मुझे लगता है कि शहर को बनाने का इस्तेमाल हमारे समाज में गलत तरीके से किया जा रहा है। तुर्कमान गेट पर फैज-ए-इलाही मस्जिद का निर्माण कैसे किया गया, यह सवाल अभी भी हमारे समाज में नहीं उठता। पुलिस को ऐसे माहौल को तुरंत संभालना चाहिए जिसमें लोगों की भीड़ आक्रोशित हो गई है। आंसू गैस का इस्तेमाल करना एक बड़ी समस्या है, हमें सोच विचार करें कि ऐसे माहौल को तो बिना आंसू गैस के नियंत्रित किया जा सकता था।
 
बुलडोजर चलाकर मस्जिद का निर्माण हुआ था, पर फिर भी तुर्कमान गेट से लेकर सांसद खंड की सड़क तक सबको मात देने की कोशिश की गई। पुलिस पर पत्थरबाजियों से निपटने का ज्यादा सामान्य हुआ तो बुरा नहीं है, लेकिन अगर सुरक्षित थांग और सामाजिक नियमों का उल्लंघन किया गया तो यह सब कुछ वाईड सी गेगा।
 
मुझे लगता है कि यह घटना बहुत बड़ी चिंता का विषय है, मस्जिद पर बुलडोजर चलाकर तो हमारे देश की प्राचीन संस्कृति और ऐतिहासिक महत्व को कम करने का एहसास होता है 🤔

मुझे लगता है कि अगर मौजूदा समाधान जैसे पांच वाला योजना अच्छी तरह से लागू नहीं हो रही है, तो हमें एक और रोडमैप बनाने की जरूरत है। 👍
 
मुझे ये घटना बहुत परेशान करती है 💔, पुलिस अधिकारियों को लोगों की राह में आने-जाने की अनुमति देनी चाहिए जैसे सुरक्षा और सामाजिक न्याय का संदेश देती है 🌟। मुझे लगता है कि पुलिस अधिकारियों को अपने हाथों में खेलने की जरूरत नहीं है, लेकिन बुलडोजर चलाकर विरोधकारी और शांतिपूर्ण लोगों को अलग करना सही तरीका है 🔄
 
तो देखो, बुलडोजर चलाकर अतिक्रमण हटाने का विचार करने से पहले हमें यह सोच लेना चाहिए कि यह निश्चित रूप से कई परेशानियों का कारण बनेगा। मैंने देखा है कि भीड़ आक्रोशित हो गई और पुलिस अधिकारी आंसू गैस के गोले छोड़े। यह तो बहुत बड़ा हालात है। हमें अपने समाज में शांति और सौहार्द बनाए रखना चाहिए।
 
बुलडोजर चलाकर दिल्ली में फैज-ए-इलाही मस्जिद को तोड़ना चाहती है नगर निगम, लेकिन जैसे ही वे बुलडोजर चलाने लगे, स्थानीय लोगों ने तुरंत विरोध शुरू कर दिया। मुझे लगता है कि इससे अच्छा था अगर मुस्लिम समुदाय ने पहले ही मस्जिद को खोल रखा होता, तो अब विरोध होने की जरूरत नहीं होती।
 
कुछ लोगों को अपने घर का अधिकार समझ में नहीं आया 🤔। तो उन्होंने दूसरों का घर काट लिया और फिर विरोध कर दिया। यह जीता ही नहीं कि कैसे एक आदमी बिना किसी नियम के अपना घर बनाता है और फिर दूसरे को घर से निकालता है। पुलिस तो बस उनकी रक्षा करने आयी थी, लेकिन यह विरोध भी मुश्किल हो गया।
 
बिल्कुल यह तो चिंताजनक है, मस्जिद पर बुलडोजर चलाकर यह कार्रवाई क्या दिखाती है? मुझे लगता है कि पुलिस अधिकारियों को अपने कदमों पर सावधानी बरतनी चाहिए, जब भी विरोध होता है तो पत्थरबाजी नहीं करनी चाहिए। आंसू गैस का भी इस्तेमाल सीमित होना चाहिए और सामान्य लोगों पर इसके प्रभाव का ख्याल रखना चाहिए।
 
बुलडोजर कार्रवाई में स्थानीय लोगों ने विरोध किया, तो पुलिसने आंसू गैस का इस्तेमाल किया। यह घटना बड़ी ही दुखद है। मुझे लगता है कि पुलिस अधिकारियों ने अपनी जिम्मेदारी का भागीदारी कर काम को सुचारू रूप से चलाया हो। लेकिन, स्थानीय लोगों की चिंताएं और विरोध भी समझना जरूरी है।

क्या हमें इस तरह की घटनाओं से निपटने का तरीका नहीं ढूंढ सकते? बुलडोजर कार्रवाई में अवैध अतिक्रमण हटाने के साथ-साथ स्थानीय लोगों की भावनाओं को भी ध्यान में रखना चाहिए।
 
मेरे दोस्त ने कहा की ये बुलडोजर कार्रवाई में तो कोई विचार नहीं था 🤯, उन्होंने सोचा की फैज-ए-इलाही मस्जिद को भी तोड़ दें, तो शायद हमें घर के बाहर खिलौने निकाल देने की जरूरत होगी... 😂 मेरा विचार है कि मस्जिद पर बुलडोजर चलाकर कुछ लोगों को पैसे मिल जाएंगे, मैं जानता हूं की इससे उनके घर की मरम्मत भी निकलेगी। 🤑
 
ਇਹ ਕੀ ਸੋਚ ਵੀ ਨਾ? ਦਿੱਲੀ ਮੁਤਾਬਕ ਜ਼ਰੂਰ ਹੈ, ਪਰ ਗਲਤ ਤਰੀਕੇ ਵਿੱਚ? 🤔

ਅਸੀਂ ਮੁਸਲਮਾਨ ਭਾਈਚਾਰੇ ਦੀ ਸ਼ੋਧ ਕਰ ਰਹੇ ਹਾਂ, ਉਨ੍ਹਾਂ ਪਿੰਡ ਵਿੱਚ ਜ਼ਮੀਨ ਦਾ ਸਾਥ ਲੈ ਕੇ ਤਰੁੱਠੇ ਹਨ, ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੀ ਕੋਈ ਵੀ ਘੱਟ ਕਿਸਮਤ ਨਹੀਂ ਰਹਿੰਦੀ। ਪਰ ਇਹ ਭੀ ਸੁਆਲ ਹੈ ਕਿ ਵਾਹਿਦੇ ਜ਼ਮੀਨ ਉੱਤੇ ਚਲੇ ਗਏ, ਅਰੇ ਬਾਹਰ ਆ ਕੇ ਬਣਾ ਦਿੱਤੇ। ਕਿਸ ਨੂੰ ਕਿਉਂ? 🤷‍♂️

ਅਸੀਂ ਖ਼ਰਮ ਸਹਿਣ ਆਉਂਦੇ ਹਾਂ, ਪਰ ਬਚਾਓ ਕੋਈ ਲੋਕ ਜ਼ਮੀਨ ਵਲੋਂ ਤਿਆਰ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੇ। 🙏
 
बुलडोजर चलाकर मस्जिद पर आंकड़े टूटने देखकर मेरी भी खुशी हुई ना… लेकिन फिर भीड़ बनकर पुलिस पर पत्थर से हमला करने देखकर डर गया। पुलिस को बाध्य होकर आंसू गैस के गोले छोड़ना पड़ता तो कितनी शरारत। इतनी भीड़ निकलने के लिए क्यों नहीं थी। ये टीवी पर देखकर ही ऐसा लग रहा था।
 
बेटी, यह सोच में आ रहा है कि तुर्कमान गेट पर वैसी भीड़ बुलडोजर चलाए जाने पर निकलती है? पहले नहीं सोचता था कि ऐसा हो सकता है। लगता है कि तो लोग अपने घरों को बचाने के लिए और पुलिस की सहायता करने के लिए भीड़ बनाते हैं। बेटी, सारी दुनिया में ऐसे ही होते हैं जहां खुद को सुरक्षित महसूस करने के लिए हमारे पास कई तरीके होते हैं, और यह तो अच्छा है कि लोग अपने अधिकारों का प्रयोग करें।
 
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