नक्सलियों के आत्मसमर्पण की बात सुनकर मुझे एक सवाल है कि इनके पास इतनी सुरक्षित जानकारी तो लगी हुई कि वे IG सुंदरराज पी के सामने सरेंडर कर दें। ये 45 साल नक्सल संगठन में बीते हुए हैं और अभी तक उन्होंने अपना हथियार नहीं छोड़ा था, तो इतना समय सोचकर क्या निकला।
जंगलों में कई बार सुरक्षाबलों की गोलियों से बचने के बाद ये सरेंडर कर देना अच्छा विचार नहीं लगता। लेकिन अगर यह व्यक्ति 63 साल का है और अब अपने जीवन को बदलना चाहता है, तो मुझे यह समझ में आता है।
जंगलों में कई बार सुरक्षाबलों की गोलियों से बचने के बाद ये सरेंडर कर देना अच्छा विचार नहीं लगता। लेकिन अगर यह व्यक्ति 63 साल का है और अब अपने जीवन को बदलना चाहता है, तो मुझे यह समझ में आता है।