छह साल से पहले फर्स्ट क्लास में नहीं मिलेगा एडमिशन, हाई कोर्ट ने इस राज्य में लागू किया नया नियम

हरियाणा से पहले, कई राज्यों में छह वर्ष की उम्र को न्यूनतम आयु कक्षा 1 के लिए तय कर दिया गया है, जिसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत लागू किया गया था। अब, इन राज्यों में कक्षा 1 के लिए छह वर्ष की आयु तय करने पर हाई कोर्ट ने कहा है कि यह नियम 6 साल की उम्र से पहले लागू नहीं होगा।

दिल्ली, गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, बिहार और गोवा जैसे राज्यों में इस नया नियम लागू होने से पहले 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने अपने नियमों में बदलाव कर दिया है। इसमें केंद्रीय विद्यालय और जवाहर नवोदय विद्यालय जैसे केंद्रीय स्कूलों में भी 2022-23 सत्र से छह वर्ष का नियम लागू किया गया है।

लेकिन तमिलनाडु, तेलंगाना और केरल समेत छह राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अभी भी यह नियम पूरी तरह से लागू नहीं हुआ है। इस नया नियम को लागू करने पर हाई कोर्ट ने कहा है कि 6 साल की उम्र से पहले बालों को कक्षा 1 में भर्ती नहीं किया जाएगा।
 
🤔 इस नया नियम को लागू करने पर हाई कोर्ट ने कहा है कि छह वर्ष की उम्र से पहले बालों को कक्षा 1 में भर्ती नहीं किया जाएगा, यह तो बहुत अच्छी बात है 🙌, लेकिन ये सवाल उठता है कि यह नियम कैसे लागू होगा जिन राज्यों में पहले से ही इसे लागू कर दिया गया था, और वे राज्य कहाँ हैं? 🤷‍♂️

लेकिन फिर भी यह नियम बहुत जरूरी है कि हमारे बच्चों को अच्छी शिक्षा मिले, उनकी सुरक्षा का ध्यान रखा जाए, और उनके भविष्य के लिए सुनिश्चित किया जाए कि वे अच्छी शिक्षा प्राप्त करें ताकि वे बेहतर जीवन जीने में सक्षम हों। 🌟
 
मुझे लगता है कि यह नियम लागू करना भले ही हमारे बच्चों की शिक्षा को बेहतर बनाने का प्रयास कर रहा है, फिर भी इसके पीछे कई सवाल उठते हैं। जैसे कि सरकार तय किया गया कि 6 साल की उम्र से पहले बच्चों को कक्षा 1 में भर्ती नहीं किया जाएगा, लेकिन फिर भी कई राज्यों ने इस नियम को लागू कर दिया है और अब उच्च न्यायालय तय कर रहा है कि यह नियम पूरी तरह से कहां लागू होगा। मुझे लगता है कि सरकार को अपने निर्णय पर विचार करना चाहिए और सभी राज्यों में इस नियम को एक समान तरीके से लागू करना चाहिए। 🤔
 
राज्यों में छह वर्ष की आयु को नियमित रूप से लागू करना एक अच्छा विचार है लेकिन कुछ जगहों पर यह धीमी गति से चल रहा है। मैंने देखा है कि कई बच्चे अपनी पहली बार ताकत और समझदारी से प्राप्त करने से पहले ही कक्षा 1 में भर्ती हो जाते हैं। यह उन्हें आगे पढ़ने के लिए तैयार नहीं करता। मुझे लगता है कि एक सामान्य नियम बनाकर इसे लागू करना चाहिए ताकि सभी बच्चों को समान अवसर मिले।
 
मुझे लगता है कि यह नया नियम बच्चों के लिए बहुत ही अच्छा होगा, लेकिन कुछ राज्यों में अभी भी 5 साल की उम्र को भी कक्षा 1 में भर्ती करने पर विचार नहीं किया गया है। मुझे लगता है कि अगर हम बच्चों को 6 साल की उम्र से पहले शिक्षा देने से उन्हें अच्छी शिक्षा और भविष्य की संभावनाएं मिल सकेंगी। लेकिन फिर भी, यह नया नियम हमारे समाज में एक बदलाव लाने वाला होगा, खासकर जब हमारे देश में बच्चों की शिक्षा पर जोर देने की बात कही जाती है। 😊
 
मैं समझ गया कि अब छह वर्ष के बच्चों को तो कक्षा 1 में भर्ती होने देने का निर्णय लिया गया है, लेकिन लगता है कि इस उम्र में वे स्कूल नहीं जाने दिए जाएंगे। यह तो एक अच्छा तरीका होगा कि हमारे बच्चों को जल्दी से पढ़ाई शुरू करने का मौका दिया जाए।
 
यह बहुत दिलचस्प है कि हाई कोर्ट ने कहा है कि छह वर्ष की आयु से पहले बालों को कक्षा 1 में भर्ती नहीं किया जाएगा। मुझे लगता है कि यह बहुत अच्छा निर्णय है, खासकर जब हम देखेंगे कि बच्चे बहुत छोटे होते हैं और उनकी सीखने की क्षमता भी बहुत कम होती है। मुझे लगता है कि 6 साल की उम्र से पहले वे स्कूल जाने के लिए तैयार नहीं हो पाएंगे, इसलिए यह नियम लागू करना एक अच्छा फैसला है।
 
मुझे लगता है कि यह नया नियम बहुत अच्छा है, लेकिन कुछ राज्यों में अभी भी बहुत सारे बच्चे ऐसे हैं जो 6 साल की उम्र से पहले मास्टरी कर रहे हैं। मुझे लगता है कि हमें इन बच्चों को अच्छी शिक्षा देने की जरूरत है, न कि उन्हें केवल एक उम्र में ही कक्षा 1 से बाहर निकालने की।
 
मुझे लगता है कि यह नया नियम बहुत अच्छा है, लेकिन अभी भी कुछ राज्यों में इसका पूरा लागू होने में थोड़ी देर लग सकती है। मैंने जो देखा है वह बहुत अच्छा है, बच्चों को पहले स्कूल जाने की उम्र कम करना बहुत जरूरी है, और यह नियम तभी अच्छा होगा जब सभी राज्य इसमें पूरी तरह से शामिल हों।
 
राज्यों में छह वर्ष की आयु को नियमित कर देने से पहले फिर से सोचने की जरूरत है ताकि छोटे बच्चों को अच्छी शिक्षा मिले। अब तक कई राज्यों में यह नियम लागू हो गया है, लेकिन तमिलनाडु, तेलंगाना और केरल जैसे राज्यों में अभी भी पूरी तरह से लागू नहीं हुआ है। यह जरूरी है कि छोटे बच्चों को अच्छी शिक्षा देने के लिए सरकारें और अन्य संगठनों को एक साथ मिलकर काम करें। 🤔
 
ज़रूरी तो यही कि छोटे बच्चों को अच्छी शिक्षा मिले, लेकिन कुछ राज्यों में अब ये नियम चलना है कि छह साल की उम्र के बच्चे कक्षा 1 में नहीं भर्ती, तो फिर कौन से राज्य इस नियम पर तैयार हैं?
 
આ વાત જેવી છે, કે દુનિયામાં બાળપણ અને શિક્ષણના ઉત્સાહ છે, પરંતુ આજની વાતમાં અભિલાષાઓ એક દિશામાં, સરકાર અને જરૂરિયાતની બાજુમાં જણાવી રહ્યા છે.

આ નિયમ અપનાવવા પછી દુખ કોઈ ગણીએ તો જ, સરકારે ત્યાં પહેલાં બધા રાજ્યોમાં આ નિયમ સવાળ કરી ગયા, તે એટલું પણ હોઈ શકે છે.

બાળને 6 વર્ષની ઉમરથી એક સરખા આંતર લગાવવાનો પ્રયાસ એટલું જ દિલચસ્પ છે, કે આ બાળકોની શક્તિ અને વિકાસમાં રહીને લડી જાય છે.

એટલાનો પ્રભાવ બદલાઈ શકે છે, પણ અહીં આ સમસ્યાનું એક મહત્વનું કારણ છે, બાળની અભિલાષાઓથી પૂર્વાધારમાં આ કદરતા બાળને 6 વર્ષની ઉમર છોડીને પ્રસ્તુત કરવાય છે.

જેઓ દુખ ગણીએ તો ફરિયાદનું કંઈ બચ્ચ નહિ, પણ મને લાગે છે કે આ 6 વર્ષની ઉમરનો આ નિયમ બદલાઈ જશે, સંભવત: કે 6 થી ઓછું.
 
मैं समझना चाहता हूँ कि इन राज्यों में छह वर्ष की उम्र को कक्षा 1 के लिए तय करने से पहले, बच्चों की शिक्षा को बहुत प्रभावित करेगा। अब, यह नियम 6 साल की उम्र से पहले लागू नहीं होगा, जिससे बच्चों और माता-पिताओं के लिए थोड़ा राहत मिलेगी। लेकिन, मुझे लगता है कि हमें यह भी सोचना चाहिए कि 6 साल की उम्र में बच्चे तैयार हैं कि नहीं।
 
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